कृषि मंत्री चौहान ने नए बीज कानून पर किसान संगठनों से की चर्चा, बोले- पारंपरिक बीजों पर जारी रहेगी राहत

कृषि मंत्री चौहान ने नए बीज कानून पर किसान संगठनों से की चर्चा, बोले- पारंपरिक बीजों पर जारी रहेगी राहत

केंद्र सरकार प्रस्तावित नए सीड बिल को अंतिम रूप देने से पहले देशभर के किसान संगठनों से सुझाव ले रही है. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मौजूदा 1966 का कानून समय के साथ पुराना हो गया है और करीब 70 फीसदी बीज इसके दायरे से बाहर हैं.

Shivraj Meets Farm Leaders for Seed Bill 2026Shivraj Meets Farm Leaders for Seed Bill 2026
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Sep 10, 2026,
  • Updated Sep 10, 2026, 8:53 PM IST

केंद्र सरकार प्रस्तावित नए सीड बिल को अंतिम रूप देने से पहले किसान संगठनों के साथ व्यापक चर्चा कर रही है. इसी कड़ी में केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कृषि भवन में देशभर के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. बैठक में अलग-अलग राज्यों से आए किसान नेताओं ने प्रस्तावित कानून को लेकर अपने सुझाव और जमीनी अनुभव साझा किए. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मौजूदा बीज अधिनियम 1966 का है और बीज नियंत्रण आदेश 1983 में लागू हुआ था. 

उन्‍होंने कहा कि समय के साथ कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव आए हैं और अब बीजों की क्‍वालिटी और नकली बीजों की समस्या से निपटने के लिए मौजूदा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि खराब बीज के लिए जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था प्रभावी नहीं होने के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है.

70 फीसदी बीज मौजूदा कानून के दायरे से बाहर

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में इस्तेमाल होने वाले करीब 70 फीसदी बीज मौजूदा बीज कानून के दायरे से बाहर हैं. राज्यों में बीजों के नियंत्रण और निगरानी की प्रक्रियाएं भी अलग-अलग हैं. ऐसे में नए कानून के जरिए व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी बनाने और नकली और घटिया बीजों पर सख्ती से अंकुश लगाने की जरूरत है.

सरकार ने नवंबर-दिसंबर 2025 में प्रस्तावित सीड बिल के मसौदे पर सार्वजनिक सुझाव मांगे थे. उस दौरान किसानों और किसान संगठनों की ओर से करीब 18 हजार सुझाव मिले थे. शिवराज सिंह ने कहा कि इन सुझावों का अध्ययन किया गया है, लेकिन किसान संगठनों से सीधे बातचीत इसलिए जरूरी समझी गई, ताकि किसानों के बीच काम करने वाले संगठनों के अनुभवों को भी कानून में शामिल किया जा सके.

कानून पर सुझावों के बाद होगा अंतिम फैसला: चौहान

केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि सीड बिल को लेकर सरकार कोई जल्दबाजी नहीं करेगी. किसान संगठनों, किसानों और दूसरे हितधारकों से मिलने वाले सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा. उन्होंने कहा कि अभी कानून को अंतिम रूप देने के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की गई है और सुझावों का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा.

पारंपरिक बीजों पर नहीं लगेगा रजिस्‍ट्रेशन का बोझ

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रस्तावित कानून में किसानों के अधिकारों की पूरी सुरक्षा की जाएगी. किसान अपने पारंपरिक और कृषक किस्मों के बीजों का इस्तेमाल करने के साथ उन्हें आपस में साझा और बेच सकेंगे. ऐसे बीजों के लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं होगा. हालांकि किसान अपनी इच्छा से किसी किस्म का पंजीकरण करा सकेंगे.

केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसान अगर अपने इस्तेमाल के लिए बीज तैयार करता है, गांव में बांटता है या किसी कंपनी के लिए बीज का उत्पादन करता है तो उसके लिए डिजिटल रजिस्‍ट्रेशन अनिवार्य नहीं होगा. सरकार का उद्देश्य किसानों पर अनावश्यक नियामकीय बोझ डालना नहीं, बल्कि बाजार में उपलब्ध बीजों की गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है.

नए बिल में तीन श्रेणियों में होंगे अपराध

प्रस्तावित सीड बिल में अपराधों को तीन श्रेणियों में बांटने का प्रावधान रखा गया है. छोटी गलती की स्थिति में पहली बार चेतावनी और दोबारा गलती होने पर अधिक जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है. सरकार का जोर ऐसी व्यवस्था बनाने पर है, जिससे नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके.

प्रस्तावित व्यवस्था में बीजों की ट्रेसेबिलिटी पर भी जोर दिया गया है. इसका उद्देश्य बीज की पहचान और उसकी पूरी श्रृंखला का रिकॉर्ड बेहतर बनाना है. इससे किसान को सही बीज की पहचान करने में मदद मिलने के साथ खराब या नकली बीज की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने में भी आसानी होगी.

करीब 20 किसान संगठनों ने रखे अपने सुझाव

बैठक में भारतीय किसान संघ, बीकेयू के विभिन्न घटक, अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति, किसान महापंचायत, भारतीय कृषक समाज सहित कई किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए. कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, बिहार, तमिलनाडु, झारखंड और केरल समेत कई राज्यों से आए किसान प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे. 

शिवराज सिंह ने बताया कि गुरुवार की बैठक में करीब 20 किसान संगठनों ने सुझाव दिए हैं. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों के अलावा बीज क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों के साथ भी चर्चा की जा रही है. उन्होंने कहा कि खेती का आधार किसान है और प्रस्तावित कानून में किसान हित को सबसे ऊपर रखा जाएगा.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर किसान के विजन के अनुरूप नए कानून की दिशा तय की जा रही है. उन्होंने कहा कि किसान संगठनों से मिले सुझावों में जो बातें व्यावहारिक और किसान हित में होंगी, उन्हें अंतिम मसौदे में शामिल करने पर विचार किया जाएगा. सरकार का लक्ष्य ऐसी प्रभावी व्यवस्था तैयार करना है, जो किसानों को नकली और घटिया बीजों से होने वाले नुकसान से बचा सके.

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