गेहूं के MSP पर बढ़ा विवाद, कांग्रेस ने 25 रुपये बढ़ाने पर उठाए सवाल, सरकार से की ये मांग

गेहूं के MSP पर बढ़ा विवाद, कांग्रेस ने 25 रुपये बढ़ाने पर उठाए सवाल, सरकार से की ये मांग

गेहूं के MSP में 25 रुपये की बढ़ोतरी को कांग्रेस महासचिव और सिरसा सांसद कुमारी सैलजा ने किसानों की बढ़ती लागत के मुकाबले बेहद कम बताया. उन्होंने केंद्र सरकार से गेहूं समेत अन्य फसलों की MSP और खरीद व्यवस्था की समीक्षा कर किसानों को उचित मूल्य सुनिश्चित करने की मांग की.

wheat msp controversy (सांकेतिक तस्वीर)wheat msp controversy (सांकेतिक तस्वीर)
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Oct 01, 2026,
  • Updated Oct 01, 2026, 5:28 PM IST

कांग्रेस महासचिव और सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा ने गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में सिर्फ 25 रुपये की बढ़ोतरी को बेहद कम बताया है. उन्होंने केंद्र सरकार से किसानों की बढ़ती लागत, मजदूरी और खेती के जोखिम को ध्यान में रखते हुए कृषि नीति बनाने की मांग की. कुमारी सैलजा ने कहा कि केंद्र सरकार ने रबी मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए गेहूं का MSP 2,585 रुपये से बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल किया है. उन्होंने कहा कि यह बढ़ोतरी एक प्रतिशत से भी कम है, जबकि खेती की लागत और किसानों के रोजमर्रा के खर्च लगातार बढ़ रहे हैं.

किसानों की लागत और आय को लेकर उठाया सवाल

पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के वादे के साथ सत्ता में आई थी. उन्होंने कहा कि सरकार लगातार किसानों की पूरी उपज खरीदने और उत्पादन लागत के ऊपर लाभकारी मूल्य देने की बात करती रही है. उन्होंने कहा कि ऐसे में गेहूं के MSP में सिर्फ 25 रुपये की बढ़ोतरी किसानों की बढ़ती लागत और आर्थिक जरूरतों के अनुपात में बेहद कम है.

उत्पादन लागत में बीज से लेकर बिजली तक शामिल

कुमारी सैलजा ने सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि गेहूं उत्पादन की लागत 1,264 रुपये प्रति क्विंटल आंकी गई है, जबकि MSP 2,610 रुपये तय किया गया है. उन्होंने कहा कि किसानों को बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी, मशीनरी, डीजल और बिजली समेत कई तरह की लागत वहन करनी पड़ती है. सरकार भी अपनी लागत गणना में इन मदों को शामिल करती है. कुमारी सैलजा ने सवाल उठाया कि जब खेती की वास्तविक लागत और किसानों के घरेलू खर्च बढ़ रहे हैं, तो MSP में इतनी कम बढ़ोतरी क्यों की गई है?

धान खरीद में नमी जांच को लेकर भी चिंता

कांग्रेस सांसद ने धान किसानों की खरीद से जुड़ी शिकायतों का भी मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि खरीद के दौरान नमी के नाम पर किसानों को परेशान किए जाने की शिकायतें सामने आती रहती हैं. उन्होंने कहा कि क्‍वालिटी और नमी के लिए निर्धारित सरकारी मानकों का पालन किया जाना चाहिए, लेकिन जांच की प्रक्रिया पारदर्शी रहनी चाहिए. इससे किसानों को अनावश्यक कटौती या परेशानी से बचाया जा सकेगा. कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा की सरकारी खरीद व्यवस्था में धान की नमी जांचने के लिए FAQ (Fair Average Quality) मानकों के अनुसार नमी मीटर उपलब्ध कराए जाएं.

हरियाणा में नमी जांच के लिए मीटर उपलब्ध

कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि किसानों से किए गए वादों और जमीन पर उनकी आय और लागत की वास्तविक स्थिति के बीच के अंतर को कम किया जाए. उन्होंने कहा कि किसानों को केवल घोषणाओं की जरूरत नहीं है, बल्कि ऐसी कृषि नीति चाहिए जो बढ़ती लागत, मजदूरी और जोखिम के अनुरूप उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करे. कांग्रेस सांसद ने केंद्र सरकार से गेहूं और अन्य फसलों की MSP और खरीद व्यवस्था की समीक्षा करने और किसानों के लिए वास्तव में लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की मांग की. (पीटीआई)

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