विदर्भ में मॉनसून ने दिया बड़ा झटका! 27% कम बारिश, अब रबी फसल और पानी का संकट बढ़ा

विदर्भ में मॉनसून ने दिया बड़ा झटका! 27% कम बारिश, अब रबी फसल और पानी का संकट बढ़ा

विदर्भ में इस साल मॉनसून के दौरान सामान्य से करीब 27 फीसदी कम बारिश हुई है. कई जिलों में बारिश की कमी 40 फीसदी से ज्यादा रही. कम बारिश और घटती जमीन की नमी से खरीफ फसलों के बाद अब रबी सीजन की चिंता बढ़ गई है. भूजल स्तर और जल स्रोतों पर असर के चलते आने वाली गर्मियों में पानी की किल्लत का खतरा भी बढ़ा है.

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विदर्भ में मॉनसून ने दिया बड़ा झटका! 27% कम बारिश, अब रबी फसल और पानी का संकट बढ़ामॉनसून खत्म, विदर्भ में पानी की टेंशन शुरू!

महाराष्ट्र के विदर्भ में इस साल मॉनसून के दौरान बारिश का गणित बिगड़ गया है. 1 जून से 30 सितंबर के बीच पूरे विदर्भ में सामान्य से करीब 27 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. कई जिलों में बारिश की कमी 40 फीसदी से ज्यादा रही है. इसका सीधा असर खेती, किसानों और पानी की उपलब्धता पर पड़ रहा है. अब मॉनसून सीजन खत्म होने के बाद रबी फसलों और आने वाले गर्मी के मौसम में पानी की स्थिति को लेकर भी चिंता बढ़ गई है.

विदर्भ में करीब 250 मिलीमीटर कम बारिश

इस साल पूरे विदर्भ में करीब 940 मिलीमीटर बारिश होने की उम्मीद थी, लेकिन अब तक लगभग 690 मिलीमीटर बारिश ही दर्ज की गई है. यानी सामान्य बारिश की तुलना में करीब 250 मिलीमीटर की कमी रह गई है. मौसम विभाग ने मॉनसून की शुरुआत में ही विदर्भ में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान जताया था. जून से ही बारिश का स्तर कम रहा और बाद के महीनों में भी इसमें ज्यादा सुधार नहीं हुआ. कम बारिश का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है. बारिश कम होने से जमीन में नमी भी कम हो गई है. इससे फसलों की बढ़वार पर असर पड़ा है और किसानों के सामने खरीफ के बाद रबी फसल की तैयारी को लेकर भी चिंता बढ़ गई है.

अगस्त और सितंबर में अल नीनो का ज्यादा असर

नागपुर प्रादेशिक मौसम विभाग के अनुसार, मॉनसून की शुरुआत में अल नीनो का असर तुलनात्मक रूप से कम था. लेकिन अगस्त और सितंबर में इसका प्रभाव ज्यादा महसूस किया गया. प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से करीब 3 से 3.5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने का असर मौसम की गतिविधियों पर पड़ा. मौसम विभाग के मुताबिक, मध्य भारत और विदर्भ के कई हिस्सों में इसी वजह से बारिश सामान्य से कम रही. बारिश के कम होने के साथ उसका तरीका भी बदलता दिखाई दिया. कई जगह कुछ घंटों में तेज बारिश हुई, जबकि इसके बाद कई दिनों तक बारिश नहीं हुई. इस तरह की अनियमित बारिश खेती के लिए मुश्किल पैदा करती है, क्योंकि फसलों को पूरे सीजन में सही समय पर पानी की जरूरत होती है.

अमरावती और अकोला में 40 फीसदी से ज्यादा कमी

विदर्भ के कई जिलों में बारिश की कमी काफी ज्यादा रही है. अमरावती में सामान्य से 43 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई, जबकि अकोला में 41 फीसदी की कमी रही. वाशिम में 37 फीसदी, नागपुर और वर्धा में 34-34 फीसदी और चंद्रपुर में 33 फीसदी कम बारिश हुई. यवतमाल में बारिश की कमी 27 फीसदी रही. बुलढाणा में 21 फीसदी, भंडारा और गडचिरोली में 16-16 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई. वहीं, गोंदिया में सामान्य बारिश के मुकाबले सिर्फ 1 फीसदी की कमी रही. इन आंकड़ों से साफ है कि विदर्भ के अलग-अलग जिलों में बारिश की स्थिति एक जैसी नहीं रही, लेकिन कई इलाकों में कमी काफी ज्यादा है.

बारिश की कमी से किसानों की बढ़ी चिंता

विदर्भ में खेती बड़े स्तर पर बारिश पर निर्भर रहती है. ऐसे में कम और अनियमित बारिश से किसानों की परेशानी बढ़ गई है. खरीफ सीजन में पर्याप्त नमी नहीं मिलने से फसलों पर असर पड़ा है. जिन इलाकों में बारिश के बीच लंबा अंतर रहा, वहां किसानों को फसल बचाने के लिए अतिरिक्त पानी की जरूरत पड़ी. अब खरीफ सीजन खत्म होने के बाद रबी फसलों को लेकर चिंता बढ़ रही है. रबी की खेती के लिए खेतों में पर्याप्त नमी और सिंचाई के पानी की जरूरत होती है. इस साल बारिश कम होने के कारण जमीन में पानी का भंडार भी कम हो सकता है. ऐसे में गेहूं, चना और दूसरी रबी फसलों की खेती किसानों के लिए चुनौती बन सकती है.

गांवों और शहरों में पानी की चिंता

कम बारिश का असर जल स्रोतों पर भी पड़ सकता है. विदर्भ के कई गांवों और शहरों में अभी से पानी की कमी के संकेत दिखाई देने लगे हैं. बारिश कम होने के कारण तालाब, जलाशय और दूसरे जल स्रोत पूरी क्षमता से नहीं भर पाए हैं. इसका असर आने वाले महीनों में पीने के पानी पर भी पड़ सकता है. भूजल स्तर को लेकर भी चिंता बढ़ रही है. अगर जमीन में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचा तो कुओं और बोरवेल का जलस्तर नीचे जा सकता है. ग्रामीण क्षेत्रों में इसका सीधा असर पीने के पानी और सिंचाई दोनों पर पड़ सकता है.

आने वाले दिनों में तेज बारिश की उम्मीद कम

मॉनसून अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है. मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में विदर्भ में विशेष या बहुत ज्यादा बारिश का अनुमान नहीं है. ऐसे में बारिश की मौजूदा कमी को पूरा करना मुश्किल हो सकता है. बादल कम रहने की संभावना के कारण दिन के तापमान में भी बढ़ोतरी हो सकती है. मौसम विभाग के मुताबिक, अल नीनो के प्रभाव का असर बारिश के साथ तापमान पर भी देखने को मिला है. अब मॉनसून खत्म होने के बाद विदर्भ में मौसम का रुख गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क रहने की संभावना है.

रबी सीजन और गर्मी के पानी पर नजर

मॉनसून सीजन खत्म होने के साथ विदर्भ में कम बारिश की तस्वीर साफ हो गई है. खरीफ फसलों पर असर के बाद अब किसानों की नजर रबी सीजन पर है. जमीन में कम नमी, नीचे जाता भूजल स्तर और सीमित जल स्रोत रबी की खेती के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं. इसके अलावा आने वाली गर्मियों में पानी की किल्लत बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है. अगर जलाशयों और भूजल स्रोतों में पर्याप्त पानी नहीं रहा तो गांवों में पीने के पानी और पशुओं के लिए पानी की समस्या गंभीर हो सकती है. ऐसे में विदर्भ के लिए आने वाले कुछ महीने खेती, पानी और किसानों के लिहाज से अहम रहने वाले हैं.

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