MSP, कर्जमाफी, कृषि कानूनों पर SKM सख्त—13 अप्रैल तक महापंचायतों का ऐलान

MSP, कर्जमाफी, कृषि कानूनों पर SKM सख्त—13 अप्रैल तक महापंचायतों का ऐलान

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने 10 मार्च से 13 अप्रैल तक देशभर में महापंचायतों और 23 मार्च को साम्राज्यवाद‑विरोधी दिवस मनाने का ऐलान किया है. MSP की कानूनी गारंटी, कर्जमाफी और भारत‑अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध प्रमुख मुद्दे रहेंगे.

 Rakesh Tikait Rakesh Tikait
क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Feb 24, 2026,
  • Updated Feb 24, 2026, 7:34 PM IST

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की राष्ट्रीय परिषद की बैठक ने निर्णय लिया है कि जब तक प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. इस आंदोलन में किसानों के साथ मजदूरों की भी भागीदारी रहेगी. प्रमुख मांगों में भारत–अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करना, बिजली बिल, बीज विधेयक, चार श्रम संहिताओं, ग्राम-जी अधिनियम का विरोध और MSP@C2+50% की कानूनी गारंटी, कर्जमाफी और 2013 के LARR अधिनियम के क्रियान्वयन जैसी लंबित मांगें शामिल हैं.

SKM ने कहा कि संगठन केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और कृषि मजदूर संगठनों के मंच के साथ समन्वय बैठकें करेगा और संयुक्त संघर्षों के अंतिम कार्यक्रम पर निर्णय लेगा.

SKM का 9 मार्च तक गांवों में जनसभा

SKM 9 मार्च तक गांवों में जनसभाओं के माध्यम से संघर्ष को गांव-गांव तक ले जाएगा. इसमें भारत के राष्ट्रपति से वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को बर्खास्त करने, प्रधानमंत्री को राष्ट्रविरोधी भारत–अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करने का निर्देश देने और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को गेहूं और धान किसानों के बोनस को समाप्त करने वाले डीओ पत्र को वापस लेने का निर्देश देने की मांग की जाएगी. किसान डाकघरों तक जुलूस निकालकर राष्ट्रपति को ऐसे खुले पत्र भेजेंगे. बैठक ने सेब, सोयाबीन, कपास, मक्का आदि प्रभावित फसलों की खेती करने वाले गांवों में विशेष अभियान चलाने का भी निर्णय लिया.

27 फरवरी या उसके बाद SKM के प्रतिनिधिमंडल संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विपक्ष के नेताओं से मिलेंगे. उनसे केंद्र की मोदी सरकार द्वारा सत्ता के केंद्रीकरण का विरोध करने, राज्यों के संघीय अधिकारों की रक्षा करने, संसद से जीएसटी अधिनियम में संशोधन कर राज्यों की कराधान शक्ति बहाल करने और विभाज्य कर पूल (सेस और अधिभार सहित) में राज्यों की हिस्सेदारी वर्तमान 33% के बजाय 60% करने की मांग की जाएगी.

9 मार्च को जंतर-मंतर पर किसान संसद

बैठक ने निर्णय लिया कि संसद के अगले सत्र के पहले दिन, 9 मार्च को जंतर-मंतर पर ट्रेड यूनियनों और कृषि मजदूर संगठनों के मंच के साथ मिलकर मजदूर–किसान संसद आयोजित की जाएगी.

बैठक ने सभी राज्य समन्वय समितियों से आह्वान किया कि वे 10 मार्च से 13 अप्रैल (जलियांवाला बाग दिवस) तक देशभर में महापंचायतें आयोजित करें. इसकी शुरुआत पंजाब के बरनाला से होगी. इन महापंचायतों में हजारों किसान भाग लेंगे, भारत–अमेरिका व्यापार समझौते और मोदी सरकार की अन्य कॉरपोरेट-समर्थक नीतियों के खतरों को समझाया जाएगा और भविष्य के लंबे संघर्ष की तैयारी की जाएगी.

एसकेएम ने कहा, 23 मार्च शहीद दिवस को देशभर में साम्राज्यवाद-विरोधी दिवस के रूप में मनाया जाएगा. इसके विस्तृत कार्यक्रम राज्य स्तर पर तय किए जाएंगे.

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