
बिजली की हाईटेंशन लाइनों के मुआवजे के नियम को लेकर हरियाणा में किसानों का विरोध तेज होता दिखाई दे रहा है. भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर के बैनर तले बुधवार को रोहतक के मानसरोवर पार्क में किसानों ने पंचायत आयोजित की और इसके बाद कमिश्नर कार्यालय तक मार्च निकाला. किसानों ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नाम ज्ञापन सौंपकर 29 अप्रैल 2026 की नई मुआवजा व्यवस्था को वापस लेने की मांग उठाई.
किसानों का कहना है कि 30 जनवरी 2026 को जारी नियमों में हाईटेंशन लाइनों से प्रभावित जमीन के लिए मुआवजा तय करने की व्यवस्था अधिक पारदर्शी और किसानों के हित में थी. किसानों ने कहा कि उस व्यवस्था में खंभों के नीचे आने वाले क्षेत्र की मार्केट वैल्यू का 200 प्रतिशत और तारों के नीचे और साइड क्षेत्र के लिए 30 प्रतिशत, 45 प्रतिशत या 60 प्रतिशत तक मुआवजा देने का प्रावधान था. उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में जारी नई अधिसूचना में मार्केट वैल्यू तय करने के तरीके में बदलाव कर लॉटरी व्यवस्था लागू कर दी गई, जिससे प्रभावित किसानों को नुकसान हो सकता है.
ज्ञापन में किसानों ने कहा कि मार्केट वैल्यू तय करने के लिए लॉटरी व्यवस्था अपनाने से किसानों की ओर से नियुक्त वैल्यूएटर की भूमिका कमजोर हो जाएगी और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होंगे. किसानों ने मांग की कि मुआवजा तय करते समय प्रभावित पक्ष की राय और वैल्यूएशन को भी तय प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाए. किसानों ने 29 अप्रैल 2026 की अधिसूचना वापस लेने की मांग दोहराई है.
किसानों ने यह भी मांग रखी कि शहर की सीमा से 15 किलोमीटर तक के गांवों को शहरी क्षेत्र की श्रेणी में माना जाए और हाईटेंशन तारों के नीचे और आसपास आने वाली जमीन के लिए मार्केट वैल्यू का 60 प्रतिशत मुआवजा दिया जाए. उन्होंने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों की जमीन की वास्तविक कीमत को ध्यान में रखकर भुगतान किया जाना चाहिए.
मार्च के बाद किसान प्रतिनिधियों की प्रशासन से बातचीत हुई. इसके बाद किसानों के प्रतिनिधिमंडल को कल सुबह 10 बजे चर्चा के लिए बुलाया गया है. किसानों ने कहा कि अगर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आगे आंदोलन को तेज करने पर विचार किया जाएगा.
कार्यक्रम शुरू होने से पहले किसानों ने रोहतक में आग की घटना में जान गंवाने वाले व्यापारी परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दो मिनट का मौन रखा. इसी वजह से मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी भी नहीं की. पंचायत और मार्च में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए, जिनमें होशियार सिंह गिल, हर्षदीप सिंह, मोनिका नैन, सुमित मकड़ौली, अनिल बल्लू प्रधान, अभिमन्यु कोहाड़, देवेंद्र गहलावत सहित कई किसान प्रतिनिधि मौजूद रहे.