
भारत में मई महीने के दौरान पाम तेल आयात में सुधार दर्ज किया गया है. यह चार महीने के निचले स्तर से ऊपर आया है, लेकिन इसके बावजूद खरीद सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच सकी. उद्योग संगठन के आंकड़ों के अनुसार, रिफाइनरों ने इस दौरान अपेक्षाकृत सस्ते सोयाबीन तेल की ओर ज्यादा रुख किया, क्योंकि पाम ऑयल का पारंपरिक मूल्य लाभ पहले की तुलना में कम हो गया है. इससे खाद्य तेल बाजार में आयात का संतुलन बदलता दिख रहा है.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, उद्योग संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) ने शुक्रवार को बताया कि मई महीने में देश का पाम ऑयल आयात अप्रैल की तुलना में 7 प्रतिशत बढ़कर 5,49,356 मीट्रिक टन पहुंच गया. हालांकि, यह स्तर अभी भी सामान्य मांग के मुकाबले कमजोर माना जा रहा है. SEA के अनुसार, अक्टूबर 2025 में समाप्त हुए मार्केटिंग वर्ष के दौरान भारत का औसत मासिक पाम ऑयल आयात करीब 6.32 लाख टन रहा था.
मुंबई स्थित एक वैश्विक ट्रेडिंग हाउस से जुड़े डीलर ने कहा कि रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं की ओर से पाम ऑयल की खरीद पहले जैसी नहीं रही. खाना पकाने वाली गैस की उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों का असर मांग पर पड़ा है और यही वजह आयात पर भी दबाव बना रही है.
रिपोर्ट के मुताबिक, मई में सोया तेल आयात में मजबूत उछाल देखने को मिला. SEA के अनुसार, सोयाबीन तेल का आयात 37 प्रतिशत बढ़कर 4,93,854 टन पहुंच गया. दूसरी ओर सूरजमुखी तेल आयात में करीब 32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई और यह 2,95,726 टन रहा.
पाम ऑयल और सोयाबीन तेल की बढ़ी हुई खरीद के चलते कुल वनस्पति तेल आयात अप्रैल के मुकाबले 4.2 प्रतिशत बढ़कर 13.7 लाख टन पहुंच गया, जो पिछले तीन महीनों का सबसे ऊंचा स्तर रहा. 1 नवंबर से शुरू हुए 2026-27 मार्केटिंग वर्ष के पहले सात महीनों में भारत का कुल वनस्पति तेल आयात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 12 प्रतिशत बढ़कर 92 लाख टन पहुंच गया.
राजकोट स्थित ट्रेडिंग एवं रिसर्च फर्म जीजीएन रिसर्च के मैनेजिंग पार्टनर राजेश पटेल ने अनुमान जताया कि जून में भारत का पाम ऑयल आयात 6 लाख टन से ऊपर जा सकता है. वहीं, सोया तेल आयात घटकर करीब 3.5 लाख टन रहने की संभावना है. भारत अपनी पाम ऑयल जरूरतों का बड़ा हिस्सा इंडोनेशिया और मलेशिया से आयात करता है, जबकि सोया तेल और सूरजमुखी तेल मुख्य रूप से अर्जेंटीना, ब्राजील, रूस और यूक्रेन से आता है.