
महाराष्ट्र में किसानों की कर्जमाफी योजना की शर्तों को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल बातचीत के रास्ते पर पहुंच गया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने सोमवार को अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है. उन्होंने यह आंदोलन महाराष्ट्र सरकार की कृषि कर्जमाफी योजना में शामिल कुछ शर्तों को हटाने की मांग को लेकर शुरू किया था. रोहित पवार ने सोलापुर जिले के पंढरपुर में शुक्रवार से अनशन शुरू किया था. उनका कहना था कि कर्जमाफी योजना की कुछ शर्तों की वजह से बड़ी संख्या में किसान इसका लाभ लेने से वंचित हो जाएंगे. उन्होंने सरकार से मांग की थी कि सभी पात्र किसानों को बिना किसी कठिन शर्त के कर्जमाफी का लाभ दिया जाए.
रविवार देर रात महाराष्ट्र सरकार के मंत्री गिरीश महाजन पंढरपुर पहुंचे और रोहित पवार से मुलाकात की. उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार किसानों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है और इस मुद्दे पर चर्चा के लिए बैठक आयोजित की जाएगी. मंत्री ने कहा कि अगर कर्जमाफी योजना में बदलाव की जरूरत महसूस होती है, तो रोहित पवार मुंबई आकर सरकार के सामने अपनी बात रख सकते हैं. उन्होंने कहा कि विधानसभा के मॉनसून सत्र से पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में बैठक कर समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी.
सरकार के आश्वासन के बाद रोहित पवार ने कहा कि अगर सरकार किसानों की समस्याओं पर चर्चा के लिए तैयार है तो आंदोलन को लंबा खींचने का कोई फायदा नहीं है. उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दों को राजनीतिक रंग देने के बजाय बातचीत के जरिए समाधान निकालना बेहतर होगा. हालांकि उन्होंने साफ किया कि जब तक कर्जमाफी योजना की विवादित शर्तों पर फैसला नहीं होता, तब तक किसानों के हितों की लड़ाई जारी रहेगी. इसके बाद उन्होंने आंदोलन में शामिल किसानों से सरकार के साथ बातचीत करने को लेकर राय मांगी. किसानों की सहमति के बाद रोहित पवार ने अपना उपवास समाप्त कर दिया. रोहित पवार ने अपने परिवार और किसानों की मौजूदगी में पंढरपुर स्थित विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर की पवित्र सीढ़ी संत नामदेव पायरी पर जाकर अपना अनशन खत्म किया. यह स्थान 13वीं सदी के संत-कवि नामदेव की समाधि स्थल के रूप में प्रसिद्ध है.
महाराष्ट्र सरकार ने 2 जून को 'पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर शेतकरी कर्जमुक्ति योजना' को मंजूरी दी थी. इस योजना पर करीब 36,585 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इससे लगभग 56 लाख किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है. योजना के तहत किसानों का 2 लाख रुपये तक का कृषि कर्जमाफी किया जाएगा. इसमें तीन हिस्से शामिल हैं- कर्जमाफी, एकमुश्त निपटान (OTS) और प्रोत्साहन लाभ.
जिन किसानों का फसल लोन 2 लाख रुपये तक है और जो तय अवधि की शर्तों को पूरा करते हैं, उन्हें पूरी कर्जमाफी का लाभ मिलेगा. वहीं, जिन किसानों पर 2 लाख रुपये से अधिक का कर्ज है, उन्हें OTS योजना के तहत शामिल किया जाएगा. ऐसे किसानों को अतिरिक्त राशि जमा करने के बाद 2 लाख रुपये तक की राहत मिलेगी. अब सरकार और किसानों के प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बैठक पर सबकी नजरें हैं. उम्मीद है कि बातचीत के जरिए कर्जमाफी योजना की शर्तों को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति दूर हो सकेगी. (PTI)