
तमिलनाडु में कृषि बजट पेश होने से पहले एक नया विवाद खड़ा हो गया है. राज्य के कृषि मंत्री आर विनोद शनिवार को तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर पहुंचे और अपने साथ कृषि बजट से जुड़ा एक दस्तावेज लेकर भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन किए. मंत्री ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर बजट को सफलतापूर्वक पेश करने के लिए भगवान का आशीर्वाद मांगा. लेकिन जैसे ही यह तस्वीर सामने आई, विपक्ष ने सवाल उठाने शुरू कर दिए कि आखिर विधानसभा में पेश होने से पहले बजट से जुड़ा दस्तावेज मंदिर तक कैसे पहुंच गया.
तमिलनाडु की टीवीके सरकार अपना पहला कृषि बजट 6 अगस्त को विधानसभा में पेश करने वाली है. कृषि मंत्री आर विनोद इस बजट को सदन में पेश करेंगे. इसी बीच मंत्री का तिरुमला मंदिर पहुंचना और हाथ में कृषि बजट से जुड़ा कागज रखना विवाद का कारण बन गया.
मंदिर के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए मंत्री ने बताया कि उन्होंने बजट पेश करने से पहले भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए प्रार्थना की है. इसके बाद विपक्षी दलों ने सवाल उठाया कि क्या बजट से जुड़े गोपनीय दस्तावेज को विधानसभा में पेश होने से पहले सार्वजनिक जगह पर ले जाना सही है.
विवाद बढ़ने के बाद कृषि मंत्री आर विनोद ने सफाई देते हुए कहा कि उनके पास पूरा बजट दस्तावेज नहीं था. उनके अनुसार, वह केवल कृषि बजट की प्रस्तावना (Preface) लेकर गए थे, जिसमें बजट की कुछ मुख्य बातें और शुरुआती जानकारी शामिल थी.
मंत्री ने कहा कि अंतिम बजट दस्तावेज अभी भी कृषि विभाग के सचिव के पास सुरक्षित है. उन्होंने बताया कि जो दस्तावेज उनके पास था, उसे मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय को दिखाया जाना था. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग किसी भी स्थिति में विवाद खड़ा करना चाहते हैं, लेकिन उनका पूरा ध्यान सिर्फ बजट को सफल तरीके से पेश करने पर है.
हालांकि, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने इस मामले में अलग राय रखी. अधिकारी ने कहा कि बजट से जुड़े सभी दस्तावेज आमतौर पर विधानसभा में पेश होने तक गोपनीय माने जाते हैं. इन्हें सदन में पेश किए जाने से पहले सार्वजनिक नहीं किया जाता.
अधिकारी ने कहा कि यह तय करना विधानसभा अध्यक्ष का काम है कि यह मामला विशेषाधिकार उल्लंघन (Breach of Privilege) के दायरे में आता है या नहीं. लेकिन सामान्य तौर पर बजट के कागजात सरकार के आधिकारिक दस्तावेज होते हैं और उन्हें सदन में पेश होने से पहले सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए.
मंत्री के इस कदम को लेकर विपक्षी दलों ने तमिलनाडु सरकार पर हमला बोला. विपक्ष का कहना है कि बजट केवल एक सरकारी दस्तावेज नहीं होता, बल्कि यह जनता के पैसों के इस्तेमाल की पूरी योजना बताने वाला संवैधानिक दस्तावेज होता है.
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) के मदुरै सांसद एसयू वेंकटेशन ने मंत्री के इस कदम को असंवैधानिक बताया. उन्होंने कहा कि बजट एक राजनीतिक और संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है, इसे किसी व्यक्तिगत धार्मिक आस्था से जोड़ना उचित नहीं है.
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) के राज्य सचिव एम वीरापांडियन ने भी मंत्री के इस कदम पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि विधानसभा में पेश होने वाले बजट दस्तावेज को पहले से बाहर ले जाना सही नहीं है.
वहीं, तमिलनाडु की प्रमुख विपक्षी पार्टी एआईएडीएमके ने इसे विधानसभा की परंपराओं का उल्लंघन बताया. पार्टी की आईटी विंग ने सवाल उठाया कि जब बजट अभी सदन में पेश नहीं हुआ था, तो उससे जुड़ा दस्तावेज राज्य से बाहर क्यों ले जाया गया.
एआईएडीएमके ने यह भी पूछा कि क्या विधानसभा अध्यक्ष इस मामले में कोई कार्रवाई करेंगे या नहीं. पार्टी का कहना है कि अगर बजट दस्तावेज गोपनीय होता है तो उसकी सुरक्षा और नियमों का पालन किया जाना चाहिए.
इस पूरे मामले ने एक बार फिर धार्मिक आस्था और सरकारी संवैधानिक प्रक्रियाओं को लेकर बहस शुरू कर दी है. मंत्री का कहना है कि उन्होंने केवल आशीर्वाद लेने के लिए बजट की प्रस्तावना अपने साथ रखी थी, जबकि विपक्ष इसे विधानसभा की परंपराओं और गोपनीयता से जोड़कर देख रहा है.
अब सभी की नजर विधानसभा अध्यक्ष के रुख पर है कि इस मामले में कोई कार्रवाई होती है या नहीं. फिलहाल कृषि बजट 6 अगस्त को विधानसभा में पेश किया जाना है.
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