499 एकड़ जमीन अधिग्रहण के खिलाफ किसानों का हल्लाबोल, 22 जून को प्रदर्शन का ऐलान

499 एकड़ जमीन अधिग्रहण के खिलाफ किसानों का हल्लाबोल, 22 जून को प्रदर्शन का ऐलान

कर्नाटक के बेंगलुरु दक्षिण जिले में प्रस्तावित GBIT टाउनशिप प्रोजेक्ट को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है. 499 एकड़ जमीन अधिग्रहण के फैसले के खिलाफ किसान संगठनों ने 22 जून को बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है.

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499 एकड़ जमीन अधिग्रहण के खिलाफ किसानों का हल्लाबोल, 22 जून को प्रदर्शन का ऐलानकिसानों का प्रदर्शन (सांकेतिक तस्वीर)

कर्नाटक के बेंगलुरु दक्षिण जिले में प्रस्तावित ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (GBIT) प्रोजेक्ट को लेकर किसानों और ग्रामीणों का विरोध बढ़ता जा रहा है. राज्य सरकार द्वारा 499 एकड़ जमीन अधिग्रहण के लिए अंतिम अधिसूचना जारी किए जाने के बाद किसानों ने 22 जून को बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है. यह प्रदर्शन ग्रामीणों, किसानों और किसान संगठनों की ओर से किया जाएगा. इसमें कर्नाटक राज्य रैथा संघ भी शामिल होगा. शनिवार को हुई बैठक में किसान नेताओं और संगठनों ने सरकार के फैसले का विरोध करने और प्रभावित किसानों के समर्थन में आंदोलन तेज करने का फैसला लिया.

499 एकड़ जमीन अधिग्रहण का विरोध

GBIT प्रोजेक्ट के लिए रामनगर और हारोहल्ली तालुका के तीन गांवों में 499 एकड़ जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई है. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, यह मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक है, जिसे देश की पहली AI आधारित इंटीग्रेटेड टाउनशिप के रूप में विकसित करने की योजना है. बताया जा रहा है कि इस पूरे प्रोजेक्ट में करीब नौ गांवों की लगभग 7,481 एकड़ जमीन शामिल हो सकती है. किसानों का आरोप है कि सरकार धीरे-धीरे जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है, जबकि ग्रामीण इसका लगातार विरोध कर रहे हैं.

किसान नेताओं ने कहा कि 22 जून को होने वाले प्रदर्शन में करीब 5,000 लोगों के शामिल होने की संभावना है. उन्होंने कहा कि किसान किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देना चाहते और वे अपनी जमीन बचाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे.

किसानों ने लगाया रियल एस्टेट एजेंडे का आरोप

किसान संगठनों का आरोप है कि इस जमीन अधिग्रहण के पीछे विकास से ज्यादा रियल एस्टेट हित जुड़े हुए हैं. उनका कहना है कि खेती की जमीन खत्म होने से किसानों की आजीविका प्रभावित होगी. किसान नेताओं ने कहा कि सरकार को किसानों की भावनाओं को समझना चाहिए और उनकी सहमति के बिना जमीन अधिग्रहण नहीं करना चाहिए.

सरकार ने बताया विकास की जरूरत

वहीं, मुख्यमंत्री डी. के शिवकुमार ने इस प्रोजेक्ट का बचाव करते हुए कहा है कि बेंगलुरु शहर पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए नई टाउनशिप की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है. CM शिवकुमार के अनुसार, इस तरह की टाउनशिप से शहर का विस्तार बेहतर तरीके से हो सकेगा और लोगों को नई सुविधाएं मिलेंगी.

विपक्ष भी किसानों के समर्थन में उतरा

इस मामले में विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (सेक्युलर) ने भी सरकार के फैसले का विरोध किया है. विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की उपजाऊ जमीन छीनने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि लंबे समय से विरोध कर रहे किसानों की मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है.

वहीं, एच. डी. कुमारस्वामी ने भी सरकार के फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है. उन्होंने कहा कि वह प्रभावित किसानों के साथ खड़े रहेंगे और जमीन अधिग्रहण के खिलाफ न्याय की लड़ाई जारी रखेंगे. फिलहाल बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट को लेकर सरकार और किसानों के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा कर्नाटक की राजनीति में और गर्मा सकता है. (PTI)

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