कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणेमहाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे इस समय बीड जिले के दौरे पर हैं. माजलगांव में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कर्जमाफी और किसानों की अलग-अलग मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे NCP शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार से अपना आंदोलन वापस लेने की अपील की है. कृषि मंत्री भरणे ने कहा कि हर समस्या का समाधान चर्चा से ही संभव है, इसलिए रोहित पवार को अपनी भूख हड़ताल खत्म कर मुख्यमंत्री के साथ चर्चा के लिए आगे आना चाहिए.
कृषि मंत्री भरणे ने जानकारी दी कि मंगलवार यानी 16 जून को कैबिनेट और सभी संबंधित विभागों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है. इस बैठक में कृषि विभाग, सहकारिता विभाग और कर्जमाफी से जुड़े सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को एक साथ बुलाया गया है. उन्होंने कहा कि रोहित पवार को अपना आंदोलन रोककर इस बैठक में शामिल होना चाहिए ताकि सीधे बातचीत की जा सके.
इस कर्जमाफी योजना में रोहित पवार को किन नियमों और शर्तों में बदलाव की आवश्यकता लगती है, इस पर चर्चा होना बेहद जरूरी है. हम मुख्यमंत्री और रोहित पवार की एक संयुक्त बैठक आयोजित कराएंगे. बातचीत से निश्चित ही सकारात्मक रास्ता निकलेगा, इसलिए उन्हें मंगलवार की बैठक में शामिल होना चाहिए. बता दें कि, रोहित पवार महाराष्ट्र सरकार की नई कृषि कर्जमाफी योजना की शर्तों को लेकर पिछले 3 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे है.
महाराष्ट्र सरकार की 'अहिल्याबाई होल्कर कर्जमाफी योजना' को कृषि मंत्री ने किसानों के लिए ऐतिहासिक फैसला बताया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा घोषित इस योजना को लागू करने के लिए सरकार को 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च करनी होगी. कृषि मंत्री ने कहा कि कर्जमाफी योजना की शर्तों को लेकर किसानों के बीच अभी कुछ भ्रम की स्थिति है. लेकिन जैसे ही योजना की प्रक्रिया शुरू होगी, किसानों को पूरी जानकारी और स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को राहत देना और उनके हित में काम करना है. उन्होंने दावा किया कि महायुति सरकार किसानों के कल्याण के लिए लगातार बड़े फैसले ले रही है और यह कर्जमाफी भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
कृषि मंत्री ने फसल बीमा योजना को लेकर कहा कि पहले के कुछ नियमों और मानकों में बदलाव किए गए हैं. अब फसल बीमा का लाभ मुख्य रूप से फसल कटाई प्रयोग के आधार पर तय किया जाता है. उन्होंने बताया कि अगर कोई क्षेत्र तकनीकी मानकों को पूरा नहीं करता है तो वहां किसानों को बीमा का लाभ मिलने में परेशानी आ सकती है. हालांकि, जिन क्षेत्रों में फसल बीमा के नियम लागू होते हैं, वहां किसानों को इसका लाभ मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि बीमा कंपनियों को जरूरी निर्देश दिए जाएंगे और किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए पूरे मामले की समीक्षा की जाएगी.
कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं को लेकर गंभीर है और बातचीत के रास्ते खुले हैं. किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए जल्द ही सभी संबंधित विभागों की एक संयुक्त बैठक बुलाई जाएगी. इस बैठक में कर्जमाफी योजना और फसल बीमा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर उचित निर्णय लिया जाएगा. सरकार का कहना है कि उसका लक्ष्य किसानों को अधिक से अधिक राहत पहुंचाना और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाना है.
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