बिदादी टाउनशिप विवाद: किसानों के मुद्दे लेकर सड़क पर उतरे BJP और JDS, कांग्रेस सरकार पर लगाए ये आरोप

बिदादी टाउनशिप विवाद: किसानों के मुद्दे लेकर सड़क पर उतरे BJP और JDS, कांग्रेस सरकार पर लगाए ये आरोप

कर्नाटक में प्रस्तावित ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (GBIT) परियोजना के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहण के विरोध में जेडी(एस) और भाजपा ने संयुक्त तीन दिवसीय पदयात्रा शुरू की. विपक्षी नेताओं ने सरकार पर किसानों की अनदेखी और रियल एस्टेट हितों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है.

Bidadi row jds on roadBidadi row jds on road
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Aug 09, 2026,
  • Updated Aug 09, 2026, 8:28 PM IST

कर्नाटक विधानसभा के मॉनसून सत्र से पहले ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (GBIT) परियोजना यानी बिदादी टाउनशिप के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. किसानों की जमीन ‘जबरन’ अध‍िग्रहित किए जाने के विरोध में जनता दल (सेक्युलर) और उसकी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी ने रविवार से तीन दिवसीय संयुक्त पदयात्रा की शुरुआत कर दी है. यह यात्रा बिदादी के पास बायरमंगला से बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क तक निकाली जा रही है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, करीब 38 किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा का नेतृत्व जेडी(एस) युवा इकाई के अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी कर रहे हैं, जिसमें दोनों दलों के नेता, कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हैं.

एचडी कुमारस्वामी ने दिखाई पदयात्रा को हरी झंडी

केंद्रीय मंत्री और जेडी(एस) नेता एचडी कुमारस्वामी ने विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक सहित अन्य नेताओं की मौजूदगी में बायरमंगला से पदयात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने हमारी जमीन, हमारा अधिकार जैसे नारे लगाए. प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार पर रियल एस्टेट हितों को बढ़ावा देने, कथित तौर पर कमीशनखोरी करने और किसानों पर झूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें दबाने का आरोप लगाया.

इससे पहले भाजपा और जेडी(एस) ने बिदादी से बेंगलुरु तक अलग-अलग विरोध मार्च की घोषणा की थी. हालांकि, हाल ही में दोनों दलों के नेताओं की बैठक के बाद यह तय किया गया कि भूमि अधिग्रहण के विरोध में विधानसभा के भीतर और बाहर संयुक्त रूप से आंदोलन किया जाएगा. कर्नाटक विधानसभा का मॉनसून सत्र 13 अगस्त से शुरू होना है.

कांग्रेस सरकार ने बनाई हाई लेवल कमेटी

इधर, राज्य की कांग्रेस सरकार ने ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप परियोजना पर सामने आए अलग-अलग मतों और सुझावों की समीक्षा के लिए हाईकोर्ट से सेवानिवृत्त जस्टिस गुहानाथन नरेंद्र की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई है. समिति को 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है.

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने पिछले महीने किसानों को भरोसा दिलाया था कि उनकी जमीन जबरन अधिग्रहित नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा था कि जो किसान अपनी जमीन नहीं देना चाहते, वे खेती जारी रख सकते हैं. मुख्यमंत्री यह भी कई बार कह चुके हैं कि GBIT परियोजना उनकी या वर्तमान कांग्रेस सरकार की पहल नहीं है, बल्कि वर्ष 2006 में एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली भाजपा-जेडी(एस) गठबंधन सरकार के दौरान प्रस्तावित योजना का ही विस्तार है. भाजपा और जेडी(एस) नेताओं ने कांग्रेस सरकार की ओर से अखबारों में छपवाए फुल पेज विज्ञापनों की भी आलोचना की, जिनमें इस पदयात्रा को "प्रायश्चित यात्रा" बताया गया था.

'किसान 500 दिन से आंदोलन कर रहे'

सभा को संबोधित करते हुए आर. अशोक ने इस आंदोलन को ‘भ्रष्‍ट सरकार’ के अंत की आखिरी घंटी बताया. उन्होंने कहा, "जो सरकारें किसानों के खिलाफ काम करती हैं, वे कभी टिक नहीं पातीं." उन्होंने मुख्यमंत्री और सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वे अपने रुख पर अड़े रहे तो उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे. आर. अशोक ने कहा कि किसान 500 दिनों से अधिक समय से आंदोलन कर रहे हैं और यह कोई फर्जी आंदोलन नहीं है, बल्कि किसान और उनके परिवार अपने अधिकारों और आजीविका की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

2006 की समिति का किया जिक्र

आर. अशोक ने कहा कि वर्ष 2006 में कांग्रेस की तथ्य जांच समिति, जिसकी अध्यक्षता कागोडु थिम्मप्पा कर रहे थे और जिसमें डी.के. शिवकुमार भी सदस्य थे, ने इस परियोजना का विरोध किया था. समिति ने बिदादी क्षेत्र की जमीन को उपजाऊ बताते हुए उसके अधिग्रहण का विरोध किया था और कहा था कि जो भी ऐसा करेगा, उसका नुकसान होगा. उन्होंने कहा कि किसानों के विरोध के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने विधानसभा में परियोजना आगे नहीं बढ़ाने की घोषणा की थी.

रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

आर. अशोक ने सवाल उठाया, "जब पहले इसका विरोध किया गया था तो अब डी.के. शिवकुमार इस परियोजना को आगे क्यों बढ़ा रहे हैं?" उन्होंने सरकार से समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की और कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो विपक्ष विधानसभा सत्र में इसे सामने लाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस बिदादी की जमीन लूटना चाहती है. उन्‍होंने कहा, "जब तक इस सरकार को सत्ता से बाहर नहीं किया जाएगा, हम चैन से नहीं बैठेंगे."

विधानसभा में भी उठाया जाएगा मुद्दा: आर अशोक

आर. अशोक ने कहा कि विपक्ष विधानसभा में यह मुद्दा मजबूती से उठाएगा और जब तक बिदादी के किसानों की जमीन का मामला हल नहीं हो जाता, सदन को सुचारु रूप से नहीं चलने देगा. उन्होंने यह भी कहा कि यदि भाजपा-जेडी(एस) गठबंधन सत्ता में आया तो यह परियोजना आगे नहीं बढ़ेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इस परियोजना को रियल एस्टेट हितों और पार्टी नेतृत्व के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से आगे बढ़ाया है.

वहीं, एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि जेडी(एस) यह पदयात्रा किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि किसानों के हित में कर रही है. उन्होंने कहा कि यह जिला उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत का आधार रहा है. उन्होंने दावा किया कि भाजपा-जेडी(एस) सरकार के समय केवल बेंगलुरु पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए टाउनशिप का प्रस्ताव विचाराधीन था और उस दौरान भूमि अधिग्रहण की कोई प्रारंभिक या अंतिम अधिसूचना जारी नहीं की गई थी. उन्होंने कहा, "डी.के. शिवकुमार सरकार की तरह हमारे कार्यकाल में न तो प्रारंभिक अधिसूचना जारी हुई थी और न ही अंतिम अधिसूचना." उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर का बुनियादी ढांचा, उद्योग और रोजगार देने का वादा किया था.

मुआवजे और रिपोर्ट पर भी उठाए सवाल

एचडी कुमारस्वामी ने दावा किया कि भूमि का मुआवजा 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3 करोड़ रुपये कर दिया गया है और पूछा, "क्या यह मोलभाव का खेल है?" उन्होंने वर्ष 2006 की कांग्रेस की तथ्य जांच समिति की रिपोर्ट के अंश पढ़ते हुए आरोप लगाया, "यह लुटेरों की सरकार है.... यहां विधायक को मंत्री बनने के लिए भी पैसा देना पड़ता है." उन्होंने कहा कि भाजपा और जेडी(एस) विधानसभा के भीतर और बाहर मिलकर भ्रष्ट सरकार को हटाने की लड़ाई लड़ेंगे.

निखिल कुमारस्वामी का आरोप

निखिल कुमारस्वामी ने कहा कि किसानों की जमीन का अधिग्रहण कांग्रेस सरकार का 35 हजार करोड़ रुपये का रियल एस्टेट धंधा है. उन्होंने कहा कि यह जमीन किसानों की आजीविका और उनकी पुश्तैनी विरासत का आधार है.

परियोजना के लिए कितनी जमीन अधिग्रहित

राज्य सरकार ने GBIT परियोजना के लिए सात गांवों में 5,400 एकड़ से अधिक भूमि अधिग्रहण की दो अंतिम अधिसूचनाएं जारी की हैं. इस परियोजना को भारत की पहली एआई आधारित इंटीग्रेटेड टाउनशिप के रूप में पेश किया गया है. इससे पहले राज्य सरकार ने पिछले वर्ष मार्च में नौ गांवों की 7,481 एकड़ भूमि के अधिग्रहण के लिए शुरूआती नोटिफिकेशन जारी की थी और आने वाले दिनों में अन्य नोटिफिकेशन जारी होने की भी संभावना है. (पीटीआई)

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