
कर्नाटक में बिदादी के किसानों की मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन अब चर्चा में है. किसानों से मुलाकात के बाद उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने उनकी पदयात्रा का समर्थन किया है. उन्होंने पुलिस को साफ निर्देश दिया है कि किसानों को पदयात्रा करने से न रोका जाए. शिवकुमार ने कहा कि लोकतंत्र में किसानों को अपनी मांगों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने का अधिकार है. ऐसे में पुलिस को उनके रास्ते में बाधा नहीं डालनी चाहिए.
विधान सौध में बिदादी के किसानों के साथ हुई बैठक के बाद डीके शिवकुमार ने बताया कि बड़ी संख्या में किसान अपनी समस्याएं लेकर उनसे मिलने पहुंचे थे. किसानों की मुख्य मांग कुछ गांवों के लिए अधिसूचना जारी करने की है. उन्होंने बताया कि कई गांवों के लिए अभी तक जरूरी अधिसूचना जारी नहीं हुई है. इसके कारण वहां के किसान सरकार की ओर से मिलने वाले मुआवजे का लाभ नहीं ले पा रहे हैं.
शिवकुमार ने कहा कि सरकार की ओर से किसानों को अच्छा मुआवजा दिया जा रहा है, लेकिन जिन गांवों के लिए अधिसूचना जारी नहीं हुई है, वहां के किसानों को इसका लाभ लेने में परेशानी हो रही है. किसानों ने उनसे अनुरोध किया है कि जल्द से जल्द संबंधित गांवों के लिए अधिसूचना जारी की जाए.
किसानों की मांग पर डीके शिवकुमार ने कहा कि वह संबंधित अधिकारियों से इस मामले में बात करेंगे. उन्होंने भरोसा दिया कि जिन गांवों के लिए अभी तक अधिसूचना जारी नहीं हुई है, वहां जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए जाएंगे.
सरकार का कहना है कि किसानों को उचित मुआवजा देने की व्यवस्था की गई है. ऐसे में अधिसूचना की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है, ताकि प्रभावित किसान मुआवजे का लाभ उठा सकें. किसानों की इसी मांग को लेकर पदयात्रा भी निकाली जा रही है.
डीके शिवकुमार के मुताबिक, इस पदयात्रा में करीब 160 किसान शामिल हैं. ये किसान मैसूरु और मांड्या क्षेत्र से आए हैं. किसान अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए पैदल यात्रा कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है. लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर सकते हैं. इसलिए किसानों को उनकी पदयात्रा जारी रखने दी जानी चाहिए.
डीके शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने पुलिस से किसानों को परेशान नहीं करने और उनकी पदयात्रा में रुकावट नहीं डालने को कहा है. उन्होंने साफ तौर पर निर्देश दिया कि पुलिस किसानों को न रोके और उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जारी रखने दिया जाए.
उनका कहना है कि किसान जितना चलना चाहते हैं, चल सकते हैं और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर सकते हैं. सरकार उनकी मांगों पर अधिकारियों के साथ चर्चा करेगी.
बिदादी के किसानों का विवाद मुख्य रूप से अधिसूचना और मुआवजे से जुड़ा हुआ है. किसानों का कहना है कि जब तक संबंधित गांवों के लिए अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक वे मुआवजे की प्रक्रिया का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं. यही वजह है कि किसान सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
डीके शिवकुमार ने किसानों की बात सुनने के बाद अधिकारियों से इस मामले में आगे कदम उठाने की बात कही है. अब किसानों की नजर सरकार की ओर से जारी होने वाली अधिसूचनाओं पर है. अगर संबंधित गांवों के लिए अधिसूचना जारी होती है, तो इससे प्रभावित किसानों को मुआवजा मिलने का रास्ता साफ हो सकता है.
डीके शिवकुमार के बयान से फिलहाल यह साफ है कि सरकार किसानों के शांतिपूर्ण आंदोलन को रोकने के पक्ष में नहीं है. उन्होंने पुलिस को भी इसी आधार पर निर्देश दिए हैं. अब देखना होगा कि किसानों की अधिसूचना से जुड़ी मांग पर सरकार कितनी जल्दी कार्रवाई करती है और मुआवजे का इंतजार कर रहे किसानों को कब राहत मिलती है.
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