अमृतसर में किसानों-मजदूरों का हल्लाबोल, केंद्र से पंजाब सरकार तक उठी आवाज

अमृतसर में किसानों-मजदूरों का हल्लाबोल, केंद्र से पंजाब सरकार तक उठी आवाज

अमृतसर में किसानों, मजदूरों, आंगनवाड़ी, आशा और मिड-डे मील वर्करों ने डीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. किसानों ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड एग्रीमेंट और केंद्र की नीतियों का विरोध किया. वहीं, आंगनवाड़ी वर्करों ने मानदेय, ऑनलाइन काम और फीड से जुड़ी समस्याएं उठाईं. संगठनों ने मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी.

अमृतसर में किसानों का शक्ति प्रदर्शनअमृतसर में किसानों का शक्ति प्रदर्शन
क‍िसान तक
  • Amritsar,
  • Aug 10, 2026,
  • Updated Aug 10, 2026, 7:22 PM IST

पंजाब के अमृतसर में सोमवार को किसानों, मजदूरों और अलग-अलग कर्मचारी संगठनों ने डीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. प्रदर्शन में किसानों के साथ आंगनवाड़ी वर्कर, आशा वर्कर, मिड-डे मील वर्कर, भट्ठा मजदूर और अन्य संगठनों के लोग शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और पंजाब सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की.

अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड एग्रीमेंट का विरोध

प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर भी विरोध जताया. किसान नेता परमिंदर सिंह ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा की 28 जुलाई को हुई बैठक में 10 अगस्त को देशभर में बड़े स्तर पर आंदोलन करने का आह्वान किया गया था.

किसान संगठनों का कहना है कि अमेरिका के साथ होने वाले संभावित व्यापार समझौते का असर भारत के किसानों और मजदूरों पर पड़ सकता है. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अमेरिका की ओर से भारत की व्यापार और विदेश नीति पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है. हालांकि, ये प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोप हैं.

किसान नेता ने कहा कि किसान संगठन पहले भी इस मुद्दे को लेकर ट्रैक्टर और मोटरसाइकिल मार्च निकाल चुके हैं. इसके अलावा गांवों में बैठकें और धरने भी किए गए हैं. उनका कहना था कि अब इस आंदोलन को और बड़े स्तर पर ले जाने की जरूरत है.

10 अगस्त को देशभर में प्रदर्शन का दावा

किसान नेता परमिंदर सिंह ने बताया कि 10 अगस्त को देशभर में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया है. उन्होंने इसे ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की तर्ज पर शुरू किए जाने वाले संघर्ष के रूप में बताया. किसान संगठनों का कहना है कि उनकी लड़ाई सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मजदूर, युवा, विद्यार्थी और अलग-अलग कर्मचारी संगठन भी शामिल होंगे.

उन्होंने कहा कि जिस तरह दिल्ली में किसान आंदोलन ने बड़े स्तर पर लोगों को जोड़ा था, उसी तरह इस बार भी किसानों और दूसरे वर्गों को एक मंच पर लाने की कोशिश की जा रही है. प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों में बदलाव की मांग की.

आंगनवाड़ी वर्करों ने पंजाब सरकार पर लगाए आरोप

प्रदर्शन में आंगनवाड़ी वर्करों ने भी अपनी समस्याएं सामने रखीं. आंगनवाड़ी वर्कर यूनियन की जिला अध्यक्ष गुरविंदर कौर ने पंजाब सरकार पर वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सरकार बनने से पहले आंगनवाड़ी वर्करों और हेल्परों के मानदेय में बढ़ोतरी का वादा किया गया था. उनके अनुसार, काफी समय बीतने के बाद भी वर्करों को उस हिसाब से बढ़ा हुआ मानदेय नहीं मिला, जिसकी उन्हें उम्मीद थी.

गुरविंदर कौर ने कहा कि आंगनवाड़ी वर्करों से लगातार कई तरह के काम करवाए जा रहे हैं. इनमें ऑनलाइन काम भी शामिल है. उनका आरोप है कि वर्करों को ऑनलाइन काम करने के लिए जरूरी सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं. कई वर्करों के पास काम के लिए जरूरी मोबाइल और इंटरनेट की पर्याप्त सुविधा नहीं है.

फीड और ऑनलाइन काम को लेकर भी नाराजगी

आंगनवाड़ी वर्करों ने फीड यानी बच्चों और लाभार्थियों को मिलने वाली खाद्य सामग्री से जुड़े मुद्दे को भी उठाया. वर्करों का कहना है कि खाद्य सामग्री और फीड को लेकर समय-समय पर जारी होने वाले अलग-अलग निर्देशों के कारण उन्हें परेशानी होती है. गुरविंदर कौर ने आरोप लगाया कि आंगनवाड़ी वर्करों से उनके नियमित काम के अलावा भी कई तरह की जिम्मेदारियां निभाने को कहा जाता है. उनका कहना है कि अतिरिक्त काम के बदले अलग से मेहनताना नहीं दिया जाता.

उन्होंने कहा कि सिर्फ आंगनवाड़ी वर्कर ही नहीं, बल्कि आशा वर्कर, मिड-डे मील वर्कर और दूसरे कर्मचारी भी अपनी-अपनी समस्याओं को लेकर परेशान हैं. इसी वजह से अलग-अलग संगठनों ने एक साथ मिलकर अपनी आवाज उठाने का फैसला किया है.

किसान, मजदूर और कर्मचारी एक मंच पर

प्रदर्शन के दौरान किसानों और कर्मचारियों ने कहा कि उनकी कई समस्याएं अलग-अलग होने के बावजूद सरकार की नीतियों का असर सभी वर्गों पर पड़ता है. इसलिए किसान, मजदूर, आशा वर्कर, आंगनवाड़ी वर्कर और दूसरे कर्मचारी संगठन मिलकर संघर्ष करने की तैयारी कर रहे हैं.

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं और चाहते हैं कि उनकी समस्याओं पर बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाए. उनका कहना है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा.

डीसी कार्यालय में सौंपा गया मांगपत्र

प्रदर्शन के दौरान जिला प्रशासन की ओर से डिस्ट्रिक्ट रेवेन्यू ऑफिसर नवकीरत सिंह रंधावा ने प्रदर्शनकारियों से मांगपत्र लेने की बात सामने आई. बताया गया कि केंद्र सरकार से जुड़ी मांगों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर आगे भी आंदोलन जारी रखेंगे. अगर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले समय में प्रदर्शन, धरने और दूसरे कार्यक्रमों को और तेज किया जा सकता है.

फिलहाल अमृतसर में हुआ यह प्रदर्शन किसानों के साथ कई कर्मचारी और मजदूर संगठनों के एक साथ आने की तस्वीर दिखाता है. एक तरफ किसान अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड एग्रीमेंट और केंद्र की नीतियों का विरोध कर रहे हैं, वहीं आंगनवाड़ी और दूसरे कर्मचारी पंजाब सरकार से अपने पुराने वादे पूरे करने की मांग कर रहे हैं. अब देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या कदम उठाती है. (अमित शर्मा का इनपुट)

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