
दिल्ली में रविवार को आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सियासी टकराव देखने को मिला. विपक्षी आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि गरीबों के लिए सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जाने वाले चावल की खरीद और बिक्री में गड़बड़ियां हुई हैं. वहीं, दिल्ली के लोक निर्माण विभाग मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए 7 अगस्त को विधानसभा में पेश नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें राजधानी में AAP के 11 साल के शासनकाल के दौरान "बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियों" का जिक्र किया गया है.
'दि हिंदू' की रिपोर्ट के मुताबिक, आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि खाद्य और आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के विभाग की सिफारिश पर भारतीय खाद्य निगम ने असम की नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल एग्रीकल्चरल मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड को तीन वर्षों के लिए हर हफ्ते 31 हजार टन अत्यधिक सब्सिडी वाला चावल उपलब्ध कराने पर सहमति दी थी, जो दिल्ली के गरीबों में बांटने के लिए था.
उन्होंने आरोप लगाया, "इसके बजाय कॉरपोरेशन ने कथित तौर पर इस चावल को हरियाणा की एक निजी कंपनी को लगभग दोगुनी कीमत पर बेच दिया, जिससे हर हफ्ते 70 से 71 करोड़ रुपये का कमीशन कमाया गया. इसी रफ्तार से तीन वर्षों में 22 हजार करोड़ रुपये का चावल बेचा जाता और 11 हजार करोड़ रुपये का कमीशन बनता."
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इस "रैकेट" का पता केंद्र सरकार के विजिलेंस अधिकारियों ने लगाया है और इस मामले में एक अधिकारी को सस्पेंड भी किया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद दिल्ली सरकार इस पूरे मामले पर चुप है. उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से मनजिंदर सिंह सिरसा का इस्तीफा लेने और कथित घोटाले की जिम्मेदारी तय करने की मांग की.
वहीं, आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए खाद्य और आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी. उन्होंने आम आदमी पार्टी के नेताओं को 24 घंटे के भीतर अपने आरोप वापस लेने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा. ऐसा नहीं करने पर उन्होंने उचित कानूनी कार्रवाई शुरू करने की बात कही.
मनजिंदर सिंह सिरसा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, "सौरभ भारद्वाज और संजीव झा ने आज फिर मेरे खिलाफ निराधार, झूठे, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाए हैं, जिनका उद्देश्य केवल मुझे बदनाम करना है. ऐसा दुर्भावनापूर्ण अभियान उनका 'तरीका' लगता है. माफी मांगिए, नहीं तो अदालत में मुलाकात होगी."
इधर, दिल्ली सरकार ने कहा कि पिछले 18 महीनों में उसे CAG की 24 रिपोर्टें मिली हैं और हर रिपोर्ट में आम आदमी पार्टी के शासनकाल के दौरान हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का खुलासा किया गया है. लोक निर्माण विभाग मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने CAG रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने नियमों का उल्लंघन किया, 1,185 मैनुअल टेंडर जारी किए और टेंडरों में मध्यस्थता से जुड़े प्रावधान जोड़कर बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों और सरकारी धन के नुकसान का रास्ता बनाया.
उन्होंने कहा, "कुछ कारोबारियों पर 70,410 करोड़ रुपये का टैक्स लंबित था. जीएसटी विभाग ने कुछ उद्योगपतियों और कारोबारियों के साथ मिलीभगत कर उनकी बकाया जीएसटी देनदारियों को लंबित रहने दिया. CAG रिपोर्ट में 68,680 करोड़ रुपये के 'फर्जी' ई-वे बिल तैयार किए जाने का भी उल्लेख किया गया है."