
बिहार के बांका जिले में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं. सोमवार को अखिल भारतीय किसान महासभा के बैनर तले भाकपा माले के कार्यकर्ताओं ने शंभूगंज प्रखंड मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन किया. प्रदर्शन में किसानों से जुड़ी समस्याओं, सिंचाई की व्यवस्था, भूमिहीन परिवारों को जमीन का पर्चा देने और न्यूक्लियर पावर प्लांट की योजना पर रोक लगाने समेत कुल 12 मांगें उठाई गईं.
भाकपा माले और अखिल भारतीय किसान महासभा के दर्जनों कार्यकर्ता झखरा नहर मोड़ से हाथों में झंडे और बैनर लेकर निकले. इस दौरान कार्यकर्ता सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए शंभूगंज प्रखंड मुख्यालय पहुंचे. यहां आईटी भवन परिसर में धरना दिया गया. प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की और कहा कि किसानों तथा गरीब परिवारों की समस्याओं का जल्द समाधान किया जाना चाहिए.
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने "न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाना बंद करो", "भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौता रद्द करो" और "भूमिहीनों को वासगीत का पर्चा दो" जैसे नारे लगाए. कार्यकर्ताओं का कहना था कि किसी भी बड़ी परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले स्थानीय लोगों और किसानों की समस्याओं और आशंकाओं को समझना जरूरी है.
बांका में न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाए जाने की चर्चा के बीच जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल इस परियोजना को लेकर कुछ भी पूरी तरह से कन्फर्म नहीं है. उन्होंने बताया कि एनटीपीसी जैसी सरकारी संस्था की ओर से इस संबंध में बात कही गई है.
डीएम के मुताबिक, अगर भविष्य में यह परियोजना बांका जिले में आती है तो इससे क्षेत्र को आर्थिक फायदा हो सकता है. इतनी बड़ी परियोजना आने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार के अवसर बढ़ने की संभावना भी बन सकती है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी परियोजना को लेकर अंतिम स्थिति सामने नहीं आई है.
जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन इस मुद्दे पर लोगों से बातचीत करने की कोशिश कर रहा है. कुछ लोगों से संपर्क भी किया जा रहा है और प्रशासन की टीम क्षेत्र में जाकर लोगों की बात समझ रही है. प्रशासन का प्रयास है कि परियोजना को लेकर लोगों के मन में जो भी सवाल और आशंकाएं हैं, उन्हें बातचीत के जरिए समझा जाए.
डीएम ने यह भी कहा कि लोगों को खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि इतनी बड़ी योजना का आखिर विरोध क्यों हो रहा है. प्रशासन की कोशिश है कि पूरे मामले में संवाद बना रहे और स्थानीय लोगों की चिंताओं को समझते हुए आगे की स्थिति स्पष्ट की जा सके.
धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए भाकपा माले नेता कामरेड रणवीर कुशवाहा ने केंद्र और राज्य सरकार पर किसान और गरीब विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि किसानों को खेती के लिए जरूरी खाद और बीज हासिल करने में परेशानी हो रही है. उनका आरोप है कि खाद और बीज की कालाबाजारी के कारण किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
उन्होंने कहा कि किसानों के सामने एक बड़ी समस्या सिंचाई की भी है. कई इलाकों में पर्याप्त सिंचाई व्यवस्था नहीं होने के कारण खेती प्रभावित हो रही है. किसानों को समय पर पानी नहीं मिलने से उनकी फसल पर असर पड़ता है और खेती की लागत बढ़ जाती है.
प्रदर्शनकारियों ने भूमिहीन परिवारों की समस्या भी उठाई. भाकपा माले नेताओं का कहना है कि बड़ी संख्या में भूमिहीन परिवार आज भी वासगीत की जमीन और उसका पर्चा मिलने का इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने सरकार से ऐसे परिवारों की समस्या का जल्द समाधान करने की मांग की.
किसान संगठनों ने कहा कि गरीब और भूमिहीन परिवारों को रहने के लिए जमीन उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है. इसके अलावा खेती करने वाले किसानों को सिंचाई, खाद, बीज और दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग की गई.
धरना-प्रदर्शन के दौरान भाकपा माले नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर समय रहते सकारात्मक पहल नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा. नेताओं ने कहा कि किसानों और गरीब परिवारों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया जाएगा.
प्रदर्शन समाप्त होने के बाद कार्यकर्ताओं ने अपनी 12 सूत्री मांगों से जुड़ा ज्ञापन शंभूगंज के बीडीओ और सीओ को सौंपा. ज्ञापन के जरिए सरकार और प्रशासन से किसानों की समस्याओं का समाधान करने, सिंचाई की उचित व्यवस्था करने, भूमिहीनों को वासगीत का पर्चा देने और न्यूक्लियर पावर प्लांट की योजना पर रोक लगाने सहित अन्य मांगें रखी गईं.
धरना-प्रदर्शन में प्रखंड अध्यक्ष ब्रहदेव दास, धनंजय दास, रंजीत दास, बासुकी दास, नंदनी देवी, लक्ष्मी देवी सहित बड़ी संख्या में भाकपा माले और किसान महासभा के कार्यकर्ता मौजूद रहे. प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और सरकार से किसानों तथा गरीब परिवारों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देने की मांग की.
बांका में न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. प्रशासन जहां परियोजना को संभावित आर्थिक अवसर के तौर पर देख रहा है, वहीं किसान संगठनों और कुछ स्थानीय लोगों की ओर से इसका विरोध किया जा रहा है. ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच होने वाली बातचीत इस मुद्दे पर आगे की दिशा तय करने में अहम हो सकती है. (दीपक कुमार का इनपुट)
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