बड़े-बड़े नेताओं के बीच पीएम मोदी से मिलने वाला ये खास किसान कौन है? पढ़िए 'जैकफ्रूट किंग' की कहानी

बड़े-बड़े नेताओं के बीच पीएम मोदी से मिलने वाला ये खास किसान कौन है? पढ़िए 'जैकफ्रूट किंग' की कहानी

शरद पवार के घर सजी वीआईपी महफिल में एक शख्स पीएम मोदी को फोन में कुछ दिखाने लगा. सब हैरान थे कि दिग्गजों के बीच यह आम इंसान कौन है? ये कोई नेता नहीं, बल्कि किसान मिथिलेश हैं. लेकिन असली सस्पेंस यह है कि आखिर क्यों इन्होंने जर्मनी की नौकरी और यूपीएससी का ख्वाब ठुकरा दिया? ऐसा क्या कमाल किया कि आज ये 95 लाख रुपये कमा रहे हैं?

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बड़े-बड़े नेताओं के बीच पीएम मोदी से मिलने वाला ये खास किसान कौन है? पढ़िए 'जैकफ्रूट किंग' की कहानीपीएम मोदी से मिलने वाला 'कटहल किंग

दिल्ली में कल शाम को 6 जनपथ पर देश के सबसे बड़े सियासी दिग्गजों की महफिल सजने लगी थी. मौका था एनसीपी प्रमुख शरद पवार की नातिन और सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले के रिसेप्शन का. उस शाम ऐसा लग रहा था जैसे यह आवास पूरे देश का 'पावरहाउस' बन गया हो. एक ही छत के नीचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव जैसे बड़े-बड़े चेहरे मौजूद थे. लेकिन, इस भारी-भरकम वीआईपी महफिल के बीच एक नजारे ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया. पीएम नरेंद्र मोदी, शरद पवार के ठीक बगल में बैठे थे और उनसे गहरी बातचीत कर रहे थे. तभी नीली शर्ट और काली जैकेट पहने एक नौजवान पीएम मोदी के बहुत करीब आकर खड़ा हो गया. यह शख्स अपने मोबाइल फोन और कुछ कागजातों में पीएम मोदी को कुछ दिखा रहा था. पीएम भी बड़े गौर से उसकी बातें सुन रहे थे.

वहां मौजूद हर इंसान हैरान था कि आखिर यह नौजवान है कौन? कुछ लोगों को लगा कि शायद यह शरद पवार का कोई खास रिश्तेदार या कोई बड़ा नेता होगा. लेकिन, जब इस चेहरे की हकीकत सामने आई, तो हर कोई दंग रह गया. यह कोई सियासी आदमी नहीं था, बल्कि महाराष्ट्र का एक आम, लेकिन बेहद खास किसान था. इस शख्स का नाम है मिथिलेश देसाई, जिसे दुनिया आज 'जैकफ्रूट किंग'  के नाम से जानती है. मोबाइल पर वह पीएम मोदी को कोई आम चीज नहीं, बल्कि अपनी उसी कामयाबी का सफर दिखा रहे थे.

जर्मनी की नौकरी छोड़कर चुनी खेती की राह

मिथिलेश देसाई महाराष्ट्र के जिले रत्नागिरी के रहने वाले हैं. उनकी कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. वह एक होनहार इंजीनियर थे. उनकी काबलियत का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि उन्होंने जर्मनी तक में काम किया. सिर्फ इतना ही नहीं, देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी की तैयारी की और इंटरव्यू राउंड तक भी पहुंचे.

एक तरफ शानदार सरकारी अफसर बनने का रास्ता था और दूसरी तरफ विदेश में इंजीनियर की ऐशो-आराम वाली जिंदगी. लेकिन, मिथिलेश के दिल में कुछ और ही चल रहा था. उन्होंने आराम की नौकरी और यूपीएससी का सपना छोड़कर एक ऐसा रास्ता चुना, जिसके बारे में सोचकर लोग अक्सर डर जाते हैं. उन्होंने अपने पिता के कटहल जिसे महाराष्ट्र में फनस कहते हैं, उगाने के सपने को अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया और खेती की दुनिया में कदम रख दिया.

एक-दो नहीं, बल्कि 86 तरह के कटहल उगाते हैं

अक्सर लोग सोचते हैं कि खेती में क्या रखा है? लेकिन मिथिलेश ने साबित कर दिया कि अगर सही विजन, नई सोच और विज्ञान को मिला दिया जाए, तो मिट्टी से भी सोना निकाला जा सकता है. उन्होंने भारत लौटकर कटहल की बड़े पैमाने पर वैज्ञानिक तरीके से खेती शुरू की.

उन्होंने कुछ ऐसा कर दिखाया जो आज तक पूरी दुनिया में किसी ने नहीं किया था. मिथिलेश ने कटहल के पेड़ों में कलम बनाकर और एक्सटर्नल पॉलीनेशन तकनीक का इस्तेमाल किया. उनकी इस सालों की मेहनत का नतीजा यह हुआ कि उन्होंने कटहल की 86 नई प्रजातियां विकसित कर दीं. एक ही जगह पर 86 तरह के कटहल उगाने का यह कारनामा दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा अजूबा था.

'जैकफ्रूट किंग' का रुतबा मिथिलेश सिर्फ कटहल उगाकर नहीं रुके. वह जानते थे कि खेती को एक फायदे का कारोबार कैसे बनाना है. उन्होंने अपनी कंपनी 'जैकफ्रूटकिंग एग्रो' की शुरुआत की. आज वह सिर्फ फल नहीं बेचते, बल्कि कटहल को प्रोसेस करके उससे कई तरह के प्रोडक्ट्स बनाते हैं और पूरी दुनिया में एक्सपोर्ट करते हैं.

आज के दौर में जहां किसान अपनी आमदनी को लेकर परेशान रहते हैं, वहीं मिथिलेश अपनी इस आधुनिक खेती और स्मार्ट बिजनेस से सालाना 95 लाख रुपये से ज्यादा का टर्नओवर हासिल कर रहे हैं. यही वजह है कि आज उन्हें कटहल किंग का रुतबा हासिल हुआ है.

दुनिया भर की रिसर्च लैब्स को करते हैं सप्लाई

मिथिलेश देसाई की कामयाबी सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं है. उनका उगाया हुआ कटहल आज इंसानियत के बड़े काम आ रहा है. आजकल दुनिया भर के वैज्ञानिक इस बात पर रिसर्च कर रहे हैं कि कटहल कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी के इलाज में कैसे मददगार साबित हो सकता है.आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया की कई बड़ी रिसर्च लैब मिथिलेश के खेतों से ही कटहल मंगाती हैं. मिथिलेश इन लैब्स को अपना कटहल एक्सपोर्ट करते हैं, ताकि मेडिकल साइंस में कुछ नया और बड़ा खोजा जा सके.

एक नई उम्मीद और मिसाल

दिल्ली की उस महफिल में मिथिलेश देसाई का पीएम मोदी से मिलना सिर्फ एक तस्वीर नहीं थी, बल्कि यह देश के हर उस युवा के लिए एक बड़ा पैगाम है जो कुछ अलग करना चाहता है. मिथिलेश ने दिखा दिया है कि खेती कोई मजबूरी का नाम नहीं है. अगर इंसान के इरादे मजबूत हों, कुछ नया करने का जज्बा हो, तो वह खेतों में भी कामयाबी की ऐसी फसल उगा सकता है, जिसकी महक से पूरी दुनिया वाकिफ हो जाती है.

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