दशकों बाद पंजाब बाढ़ के उस दर्द से गुजर रहा है जिससे उबरने में उसे कई साल लग जाएंगे. कई लोगों के घर डूब गए, किसानों की फसलें तबाह हो गईं, कई लोगों की मौत हो गई और कई जानवरों की भी जान चली गई. इस बाढ़ के लिए पहाड़ों में हो रही लगातार बारिश को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. लेकिन अब कांग्रेस ने इसके पीछे आम आदमी पार्टी (आप) की अगुवाई वाली भगवंत मान की सरकार को भी दोषी बताया है. पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने राज्य के कुछ हिस्सों में बाढ़ की स्थिति के लिए राज्य सरकार की आलोचना की है.
उन्होंने कहा है कि बांधों और जल स्रोतों का कुप्रबंधन इसके लिए ज़िम्मेदार है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब भारी बारिश का पूर्वानुमान था तो इसके बावजूद, बांधों में पानी जमा क्यों होने दिया गया और उसे चरणबद्ध तरीके से समय पर क्यों नहीं छोड़ा गया. उन्होंने कहा कि यह किसी अप्रत्याशित प्राकृतिक आपदा से ज़्यादा 'आपराधिक लापरवाही' है. पिछले तीन दिनों में पंजाब के विभिन्न बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने वाले वारिंग का कहना था कि हजारों लोग बेघर हो गए हैं, कई लोगों की जान चली गई है और फसलों व पशुओं के नुकसान का आकलन अभी बाकी है.
मान सरकार ने उनका सवाल था कि बांधों से पानी धीरे-धीरे पहले ही क्यों नहीं छोड़ा गया ताकि बांध बाद में अतिरिक्त पानी को रोक सकें? उन्होंने कहा कि अगर यह समय पर किया गया होता, तो तबाही को कम किया जा सकता था. पठानकोट में माधोपुर हेडवर्क्स के दो फ्लडगेट गिरने का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि यह खराब रखरखाव के कारण हुआ. लुधियाना के सांसद ने दावा किया कि हेडवर्क्स से अतिरिक्त पानी भी समय पर नहीं छोड़ा गया, जिससे भारी दबाव पैदा हुआ और अंततः गेट गिर गए.
कांग्रेस नेता ने इस आपदा के लिए जिम्मेदारी तय करने और दोषियों को सजा देने की मांग की. उन्होंने कहा, 'हम जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों से समय पर कार्रवाई न करने की उम्मीद नहीं करते, वह भी ऐसे मुश्किल समय में.' हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण सतलुज, व्यास और रावी नदियों और मौसमी नालों में आई बाढ़ से पंजाब के कई हिस्से तबाह हो गए हैं. पठानकोट, गुरदासपुर, फाजिल्का, कपूरथला, तरनतारन, फिरोजपुर, होशियारपुर और अमृतसर जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं.
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