'धान देश पर बोझ’ बयान पर भड़के CM विजयन, केंद्र सरकार पर साधा निशाना

'धान देश पर बोझ’ बयान पर भड़के CM विजयन, केंद्र सरकार पर साधा निशाना

केंद्र सरकार ने आलोचना की है कि धान के उत्पादन में बढ़ोतरी से देश पर "बोझ" है.  पिनाराई विजयन ने इसे  किसानों के लिए एक चुनौती और केरल के प्रति दुश्मनी का संकेत बताया है. उन्होंने कहा कि यह न केवल किसानों बल्कि पूरे केरल के प्रति दुश्मनी वाला रवैया दिखाता है.

मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Feb 08, 2026,
  • Updated Feb 08, 2026, 4:13 PM IST

केंद्र सरकार की ओर से धान उत्पादन पर दिए गए बयान से सियासी बवाल मच गया है. इस बयान को लेकर केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है. दरअसल, केंद्र सरकार ने आलोचना की है कि धान के उत्पादन में बढ़ोतरी से देश पर "बोझ" है.  पिनाराई विजयन ने इसे  किसानों के लिए एक चुनौती और केरल के प्रति दुश्मनी का संकेत बताया है. एक बयान में CM ने कहा कि केंद्र सरकार ने मांग की है कि केरल के धान किसानों को दिया जा रहा अतिरिक्त प्रोत्साहन बोनस बंद कर दे.

मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय के व्यय सचिव  वी. वुअलनाम ने आधिकारिक तौर पर सूचित किया है कि चूंकि धान का उत्पादन ज़रूरत से ज़्यादा है, इसलिए खरीद लागत सरकारी खजाने पर बोझ बन जाएगी. विजयन ने कहा कि इस स्थिति के बारे में एक पत्र राज्य के मुख्य सचिव को मिला है.

धान किसानों को दिए जाने वाला बोनस बोझ कैसे?

CM विजयन ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP से ज़्यादा बोनस देकर धान किसानों का समर्थन करती है, और सवाल किया कि केंद्र सरकार को इससे क्यों दिक्कत है? उन्होंने बताया कि केरल धान खरीद के लिए प्रति किलोग्राम 6.31 रुपये अतिरिक्त देता है. साथ ही CM विजयन ने केंद्र पर आरोप लगाया कि जो लोग हजारों करोड़ रुपये के कॉर्पोरेट लोन माफ करने में संकोच नहीं करते, वे धान किसानों को दिए जाने वाले बोनस को एक बड़ा बोझ बता रहे हैं.

विजयन ने कहा कि बढ़े हुए उत्पादन को बोझ बताकर राज्य पर मौजूदा बोनस नीति की समीक्षा करने का दबाव डाला जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह न केवल किसानों बल्कि पूरे केरल के प्रति दुश्मनी वाला रवैया दिखाता है. उन्होंने केंद्र से यह भी पूछा कि क्या यह कदम भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलने की दिशा में पहला कदम है.

अतिरिक्त प्रोत्साहन बोनस को बंद करने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि केंद्र ऐसे कदम तब उठा रहा है जब वह धान किसानों को दी जाने वाली सहायता का अपना हिस्सा समय पर जारी करने में विफल रहा है. विजयन का यह बयान सत्तारूढ़ LDF के संयोजक टी पी रामकृष्णन द्वारा केंद्र से राज्य सरकार द्वारा धान खरीद के लिए दिए जा रहे अतिरिक्त प्रोत्साहन बोनस को बंद करने के निर्देश को तुरंत वापस लेने की मांग के एक दिन बाद आया है.

रामकृष्णन ने आरोप लगाया था कि इस तरह के हस्तक्षेप से देश की खाद्य आत्मनिर्भरता कमजोर होगी. उन्होंने इस कदम के खिलाफ कड़े विरोध प्रदर्शन का भी आग्रह किया था और केंद्र के फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की थी, यह कहते हुए कि यह देश की खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा है.

धान की जगह दलहन फसलों को उगाने पर जोर

9 जनवरी को केंद्रीय वित्त मंत्रालय में सचिव (व्यय) वी वुअलनम ने केरल के मुख्य सचिव ए जयतिलक को पत्र लिखकर राज्य से अपनी मौजूदा बोनस नीति की समीक्षा करने और गेहूं और धान पर अतिरिक्त प्रोत्साहन बंद करने पर विचार करने को कहा था. पत्र में यह भी अनुरोध किया गया था कि पोषण सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और टिकाऊ कृषि पर राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप दालों, तिलहन और मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन पर ध्यान केंद्रित किया जाए.

इसमें कहा गया था कि गेहूं और धान के बंपर उत्पादन के कारण गेहूं और चावल का स्टॉक पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम, बफर नॉर्म्स और अन्य कल्याणकारी और आपातकालीन ज़रूरतों से कहीं ज़्यादा हो गया है. पत्र में कहा गया कि यह सरप्लस साल-दर-साल बढ़ता जा रहा है, जिससे सरकारी खजाने पर एक बड़ा और लगातार बोझ पड़ रहा है.  वहीं, केरल के कृषि मंत्री पी प्रसाद ने केंद्र के सुझाव को "अस्वीकार्य" बताते हुए खारिज कर दिया था, और कहा था कि धान की खेती पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा. (PTI)

MORE NEWS

Read more!