
हाल ही में कुछ नेताओं और समूहों ने सरकार पर आरोप लगाए कि किसानों के साथ व्यापारिक डील में धोखा हुआ. राहुल गांधी ने कहा कि इस डील के जरिए देश के किसानों को नुकसान हुआ. अखिलेश यादव ने भी आरोप लगाया कि किसानों के हितों की अनदेखी की गई. कुछ किसान संगठन और मोर्चे कहते हैं कि अमेरिका के दबाव के सामने सरकार झुक गई और किसानों के हितों की परवाह नहीं की गई. ऐसे आरोपों के बीच यह सवाल उठता है कि क्या सच में किसानों का नुकसान हुआ है या नहीं.
इन तमाम सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा कहा है कि उनका पहला काम किसानों के हित की रक्षा करना है. उन्होंने स्पष्ट किया कि देश का भला और किसानों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है. शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा कि व्यापारिक डीलों में कभी भी ऐसा कदम नहीं उठाया जाएगा जिससे किसानों को नुकसान पहुंचे. सरकार ने मुख्य अनाज, डेयरी उत्पाद और प्रमुख फलों की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित की है. प्रधानमंत्री का कहना है कि किसानों की फसल और उनकी आमदनी सुरक्षित हैं, और इस मामले में किसी भी तरह का समझौता नहीं किया गया है.
सरकार ने यह भी बताया कि टैरिफ कम होने से भारत के किसानों को नए अवसर मिलेंगे. पिछले साल भारत ने ₹63,000 करोड़ का चावल निर्यात किया है. अब टैरिफ घटने के बाद बासमती चावल, अन्य प्रकार के चावल और मसालों का नया बाजार खुलेगा. इसके अलावा कपास और टेक्सटाइल का निर्यात भी बढ़ेगा, जिससे कपास उत्पादक किसानों को भी फायदा होगा. सरकार यह स्पष्ट करती है कि इस डील के जरिए किसानों को कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि उनके लिए नए अवसर और अधिक आमदनी के रास्ते खुलेंगे.
भारत में कुछ चीज़ों का उत्पादन इतना नहीं होता कि हमारी जरूरत पूरी हो सके. उदाहरण के लिए दालें, तेल और कुछ विशेष फल. ऐसे मामलों में सरकार को उन्हें विदेश से मंगाना पड़ता है. इसका मतलब यह नहीं कि किसानों का नुकसान हुआ. प्रधानमंत्री मोदी और सरकार लगातार प्रयास कर रहे हैं कि इन वस्तुओं का उत्पादन बढ़े और भारत आत्मनिर्भर बने. इसलिए कुछ चीजें आयात करनी पड़ती हैं, लेकिन इसका असर किसानों की सुरक्षा और आमदनी पर नहीं पड़ता.
संसद में विपक्ष के कई सवाल उठाए गए. सरकार ने कहा कि सभी सवालों का जवाब दिया गया और नियम और प्रक्रिया के अनुसार कार्यवाही हुई. किसी को बोलने का मौका दिया गया, और माइक डाउन होने जैसे मामले प्रक्रिया के तहत ही हुए. सरकार ने यह भी बताया कि रात के 2 बजे तक विपक्ष को सुना गया, ताकि उनके सवालों का उत्तर दिया जा सके. इस तरह संसद में हर कदम नियमों के अनुसार हुआ और किसानों के हितों की सुरक्षा बनी रही.
सरकार ने किसानों के लिए कई योजनाएं बनाई हैं. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत सीधे किसानों को मदद मिलती है. किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से अब किसान कम ब्याज पर लोन ले सकते हैं, और यह कुल राशि ₹25 लाख करोड़ तक पहुंच चुकी है. फर्टिलाइज़र सब्सिडी सीधे किसानों को दी जाती है ताकि खेती में उनका खर्चा कम हो. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत अब तक ₹1.91 लाख करोड़ रुपए के क्लेम किसानों को दिए जा चुके हैं. इन सभी योजनाओं का उद्देश्य छोटे, लघु और सीमांत किसानों की मदद करना है ताकि वे साहूकारों से कर्ज लेने की स्थिति में न रहें.
सरकार और प्रधानमंत्री मोदी हमेशा किसानों के हित में काम कर रहे हैं. किसी भी डील से किसानों को नुकसान नहीं होगा. नई ट्रेड डीलों से किसानों को नए बाजार मिलेंगे और उनकी आमदनी बढ़ेगी. सभी योजनाओं और प्रावधानों के जरिए छोटे और सीमांत किसान भी सुरक्षित और समर्थ होंगे. प्रधानमंत्री का संदेश साफ है – किसान सुरक्षित हैं और उनकी भलाई हमेशा सरकार की पहली प्राथमिकता है.
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