
भारतीय किसान यूनियन (एकता-सिद्धूपुर) मंगलवार को दो गुटों में बंटती दिखी, जब आठ जिलों के सीनियर पदाधिकारियों, ब्लॉक अध्यक्षों और जिला अध्यक्षों ने अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल को हटाने की मांग की. इस ग्रुप ने यूनियन के संस्थापक पिशोरा सिंह सिद्धूपुर के बेटे दलबीर सिंह सिद्धूपुर को संयोजक घोषित किया.
'दि ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला पटियाला के पास बहादुरगढ़ में गुरुद्वारा साहिब पातशाही नौवीं में हुई एक मीटिंग में लिया गया. मीटिंग में शामिल लोगों ने कहा कि वे जगजीत सिंह डल्लेवाल के अंडर काम नहीं करेंगे, और उन पर तानाशाही तरीके से काम करने का आरोप लगाया.
डल्लेवाल एक जाने-माने किसान नेता हैं, जो पिछले साल 26 नवंबर से 9 अप्रैल तक 131 दिनों की भूख हड़ताल पर रहे थे, ताकि आंदोलनकारी किसानों की अलग-अलग मांगों को पूरा किया जा सके. इन मांगों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कानूनी गारंटी भी शामिल थी. उन्होंने साल भर चले किसान आंदोलन 2.0 के दौरान खनौरी मोर्चे का नेतृत्व भी किया था.
मीटिंग का नेतृत्व यूनियन के राज्य प्रेस सचिव मेहर सिंह ने किया और इसमें मोहाली, फतेहगढ़ साहिब, पटियाला, संगरूर, बरनाला, फिरोजपुर और रूपनगर के जिला अध्यक्षों के अलावा अन्य पदाधिकारी और किसान भी शामिल हुए.
मीडिया को जानकारी देते हुए दलबीर सिंह ने कहा कि हर तीन साल में होने वाले संगठनात्मक चुनाव छह साल से नहीं हुए हैं. उन्होंने दावा किया कि इसलिए यूनियन संवैधानिक रूप से बिना किसी वैध अध्यक्ष के है और इसमें कोई नई भर्ती नहीं हुई है.
उन्होंने आरोप लगाया कि संयुक्त किसान मोर्चा से दूर रहने और शंभू और खनौरी मोर्चे को स्वतंत्र रूप से शुरू करने का फैसला फेल हो गया. उन्होंने दावा किया कि साल भर चले विरोध प्रदर्शन के दौरान कई लोगों की जान चली गई और कई किसान अभी भी अपने चोरी हुए ट्रैक्टर और अन्य कीमती सामान ढूंढ रहे हैं. उन्होंने कहा कि जिन सदस्यों ने आपत्ति जताई, उन्हें निकाल दिया गया.
दलबीर सिंह ने कहा कि उनके पिता की मौत के बाद, संगठन ने परिवार से सलाह लेने के बाद नेतृत्व डल्लेवाल को सौंपा था, लेकिन आरोप लगाया कि वह यूनियन को एकजुट रखने में फेल रहे और प्रमुख पदाधिकारियों को निकाल दिया.
चुनाव की योजना बनाने के लिए पांच सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई. इस प्रक्रिया की देखरेख के लिए दलबीर सिंह को संयोजक नियुक्त किया गया.
'दि ट्रिब्यून' के सवाल पर जगजीत सिंह डल्लेवाल ने अभी कोई टिप्पणी नहीं दी है. हालांकि, सीनियर नेता काका सिंह कोटरा ने कहा कि संगठन में कोई बंटवारा नहीं हुआ है और बुधवार को जालंधर में एक कॉन्फ्रेंस बुलाकर इसका खंडन किया जाएगा.