
तमिलनाडु के किसानों का आक्रोश एक बार फिर व्यवस्था के सामने फूट पड़ा, जब नागपुर में पेशी से जुड़े समन अचानक रद्द होने के बाद भी यात्रा खर्च की भरपाई नहीं की गई. इसी मुद्दे को लेकर मंगलवार को किसानों ने तिरुचिरापल्ली (त्रिची) रेलवे जंक्शन पर धरना देकर विरोध दर्ज कराया. प्रदर्शन का नेतृत्व नेशनल साउथ इंडियन रिवर्स लिंकिंग फार्मर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष किसान नेता अय्याकन्नु ने किया. किसानों ने कहा कि उन्हें नागपुर में आरपीएफ कोर्ट में पेश होने के लिए समन भेजा गया था, जिसके बाद उन्होंने यात्रा की तैयारी करते हुए ट्रेन टिकट खरीदे.
मंगलवार को लगभग 10 किसान तिरुचिरापल्ली रेलवे जंक्शन पहुंचे और नागपुर के लिए रवाना होने वाले थे. किसानों की योजना प्रतीकात्मक अर्धनग्न प्रदर्शन के जरिए अपनी मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की थी. हालांकि, स्टेशन पर मौजूद रेलवे सुरक्षा बल के जवानों ने उन्हें यह जानकारी दी कि नागपुर में पेश होने से संबंधित समन रद्द कर दिया गया है और अब यात्रा की जरूरत नहीं है.
अचानक बदले इस फैसले से किसान भड़क गए. उन्होंने आरोप लगाया कि अंतिम समय पर दी गई इस सूचना से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है. किसानों ने रेलवे स्टेशन परिसर में ही धरना शुरू कर दिया और मांग की कि पहले से खरीदे गए टिकटों की पूरी राशि उन्हें लौटाई जाए. धरने के चलते स्टेशन पर कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बनी रही और यात्रियों को भी असुविधा का सामना करना पड़ा.
किसानों ने यह भी सवाल उठाया कि जब समन रद्द ही करना था तो इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई. उन्हाेंने कहा कि प्रशासन की इस तरह की कार्यप्रणाली किसानों को बार-बार अपमानित करती है और उनकी परेशानियों को और बढ़ा देती है. प्रदर्शनकारी किसानों ने आरोप लगाया कि एक ओर उनके खिलाफ मामले दर्ज किए जाते हैं और दूसरी ओर बिना स्पष्ट कारण के समन रद्द कर दिए जाते हैं, जिससे वे मानसिक दबाव में आ जाते हैं.
यह पूरा मामला पहले की घटनाओं से भी जुड़ा हुआ है. बीते साल 20 नवंबर को तमिलनाडु के किसान अय्याकन्नु के नेतृत्व में दिल्ली की ओर कूच कर रहे थे. उस दौरान उन्हें नागपुर में ट्रेन से उतारकर हिरासत में लिया गया था. किसानों ने कहा कि तब से ही वे प्रशासनिक कार्रवाई और नोटिसों के दायरे में हैं, जबकि उनकी मूल मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया.
किसानों की प्रमुख मांगों में फसलों के लिए लाभकारी दाम, राष्ट्रीयकृत बैंकों से लिए गए कृषि लोन की माफी, सहकारी बैंकों के कर्ज को लेकर स्पष्ट नीति और कावेरी नदी पर चेक डैम बनाकर जल भंडारण की व्यवस्था शामिल है. उन्हाेंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें चुनाव के समय किसानों से बड़े-बड़े वादे करती हैं, लेकिन बाद में उन्हें भुला दिया जाता है. धरने के दौरान किसानों ने नारेबाजी करते हुए चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है. (एएनआई)