BKU चढ़ूनी ने 23 जून को किया विरोध-प्रदर्शन का आह्वान, भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सरकार को दी चेतावनी

BKU चढ़ूनी ने 23 जून को किया विरोध-प्रदर्शन का आह्वान, भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सरकार को दी चेतावनी

भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील का विरोध करते हुए इसे देश की खाद्य सुरक्षा, कृषि, डेयरी और किसानों की आजीविका के लिए खतरा बताया है. संगठन प्रमुख गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने 23 जून को देशभर में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया और सरकार से सभी प्रस्ताव सार्वजनिक करने की मांग की.

BKU Charuni PC ChandigarhBKU Charuni PC Chandigarh
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jun 20, 2026,
  • Updated Jun 20, 2026, 1:41 PM IST

भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर कड़ा विरोध जताया है और इसे देश की खाद्य सुरक्षा, कृषि व्यवस्था, डेयरी और पोल्ट्री सेक्टर के लिए संभावित खतरा बताया है. संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने किसानों, छात्रों, मजदूर संगठनों और आम नागरिकों से 23 जून को देशभर में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने की अपील की है. चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताएं अंतिम चरण में बताई जा रही हैं और इसको लेकर किसानों के बीच चिंता बढ़ रही है. उन्‍होंने कहा कि अगर कृषि क्षेत्र को विदेशी उत्पादों के लिए अधिक खोला गया तो इसका सीधा असर देश के करोड़ों किसानों की आजीविका पर पड़ सकता है.

आयात शुल्क में ढील से बढ़ सकती है प्रतिस्पर्धा

बीकेयू (चढ़ूनी) ने कहा कि अगर कपास, लाल ज्वार, सोयाबीन तेल, संतरे के रस समेत अन्य कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम या समाप्त किया गया तो भारतीय किसानों को भारी सब्सिडी वाले विदेशी उत्पादों से मुकाबला करना पड़ेगा. संगठन ने कहा कि इससे घरेलू कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर दबाव बढ़ सकता है.

डेयरी, पोल्ट्री और GM उत्पादों पर जताई आपत्ति

संगठन ने आशंका जताई कि प्रस्तावित समझौते के जरिए अमेरिकी डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों के आयात को आसान बनाया जा सकता है. साथ ही जेनेटिकली मॉिफाइड यानी GM कृषि उत्पादों के भारतीय बाजार में प्रवेश को लेकर भी चिंता जाहिर की. गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि इससे कृषि ढांचे और उपभोक्ताओं के हितों पर असर पड़ सकता है.

MSP और सरकारी खरीद व्यवस्था पर सवाल

गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि किसानों के बीच यह आशंका भी है कि विश्व व्यापार संगठन के स्तर पर भारत की न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP व्यवस्था और सार्वजनिक खरीद प्रणाली पर दबाव बनाया जा सकता है. उन्‍होंने कहा कि अगर MSP आधारित खरीद कमजोर हुई तो गेहूं, धान और खाद्य तेल उत्पादक किसान बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएंगे, जिसका असर विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में दिखाई देगा.

सरकार से पारदर्शिता और चर्चा की मांग

बीकेयू (चढ़ूनी) ने केंद्र सरकार से मांग की कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील से जुड़े प्रस्ताव सार्वजनिक किए जाएं और किसानों, डेयरी उत्पादकों, मजदूर संगठनों और कृषि विशेषज्ञों से व्यापक चर्चा के बाद ही कोई निर्णय लिया जाए. संगठन ने सरकार से कृषि और खाद्य क्षेत्र के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की.

23 जून को देशव्यापी विरोध का आह्वान

गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने किसानों, छात्र-युवा संगठनों और आम नागरिकों से 23 जून को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने की अपील की. उन्होंने कहा कि लोग काली पट्टियां बांधकर और बैनर-तख्तियों के साथ बाजारों, शहरों और सार्वजनिक स्थानों पर अपना विरोध दर्ज करा सकते हैं.

25 जून को संयुक्त रणनीति बैठक होगी

संगठन ने घोषणा की कि 25 जून 2026 को सुबह 10 बजे किसान भवन, सेक्टर-35A, चंडीगढ़ के सतलुज-व्यास हॉल में विभिन्न किसान, मजदूर, कर्मचारी और सामाजिक संगठनों की संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी. इस बैठक में प्रस्तावित ट्रेड डील के संभावित प्रभावों पर चर्चा करते हुए आगे की रणनीति तैयार की जाएगी. संगठन ने कहा कि अगर किसानों के हितों के खिलाफ कोई फैसला लिया गया तो व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा.

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