अजमेर में जमीन बचाने सड़कों पर उतरे किसान, 100 ट्रैक्टरों के साथ कलेक्ट्रेट का किया घेराव

अजमेर में जमीन बचाने सड़कों पर उतरे किसान, 100 ट्रैक्टरों के साथ कलेक्ट्रेट का किया घेराव

अजमेर में सिंगला-रूपनगढ़ सिंचाई परियोजना के विरोध में चार गांवों के किसानों ने बड़ा प्रदर्शन किया. करीब 100 ट्रैक्टरों के साथ 52 किलोमीटर दूर से पहुंचे किसानों ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर जमीन अधिग्रहण का विरोध किया. किसानों ने करीब 3000 बीघा जमीन बचाने की मांग की. प्रशासन ने कमेटी बनाकर मामले की जांच का भरोसा दिया है.

जमीन जाने के डर से किसानों का हल्ला बोलजमीन जाने के डर से किसानों का हल्ला बोल
क‍िसान तक
  • Ajmer,
  • Aug 13, 2026,
  • Updated Aug 13, 2026, 10:42 AM IST

राजस्थान के अजमेर में सिंगला-रूपनगढ़ सिंचाई परियोजना के विरोध में किसानों का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला. चार गांवों के प्रभावित किसान अपनी जमीन के अधिग्रहण के विरोध में बड़ी संख्या में अजमेर पहुंचे. किसानों ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा. किसानों ने साफ कहा कि अगर उनकी मांगों पर समय रहते फैसला नहीं हुआ तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे.

52 किलोमीटर दूर से 100 ट्रैक्टरों के साथ पहुंचे किसान

किसान संघर्ष समिति के बैनर तले किसानों ने रूपनगढ़ से अजमेर तक करीब 52 किलोमीटर का सफर तय किया. इस दौरान करीब 100 ट्रैक्टरों का काफिला अजमेर पहुंचा. किसानों का कहना है कि सिंचाई परियोजना के लिए उनकी जमीन लेने की कोशिश की जा रही है, जिसका वे विरोध कर रहे हैं.

किसानों के इस बड़े प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा के इंतजाम कर रखे थे. कलेक्ट्रेट से करीब डेढ़ किलोमीटर पहले शास्त्री नगर पुलिस चौकी के पास भारी बैरिकेड्स लगाए गए थे. रास्ते को रोकने के लिए क्रेन और डंपर भी लगाए गए थे, ताकि ट्रैक्टरों को आगे जाने से रोका जा सके.

रास्ता रोके जाने पर सड़क पर बैठ गए किसान

जब किसानों के ट्रैक्टरों को आगे जाने से रोका गया तो मौके पर तनाव बढ़ गया. किसान प्रशासन के इस कदम से नाराज हो गए और उन्होंने सड़क पर ही धरना शुरू कर दिया. किसान अपनी जमीन बचाने की मांग को लेकर नारेबाजी करने लगे.

कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था. बताया गया कि प्रदर्शन स्थल पर 1000 से ज्यादा पुलिसकर्मी मौजूद रहे. पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने किसानों से बातचीत कर उन्हें समझाने की कोशिश की.

पैदल कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान

काफी देर तक बातचीत और समझाइश के बाद प्रशासन ने किसानों को पैदल कलेक्ट्रेट जाने की अनुमति दी. इसके बाद किसान अपने ट्रैक्टरों को वहीं छोड़कर पैदल कलेक्ट्रेट पहुंचे. यहां किसानों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया और अपनी मांगों को लेकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा.

किसानों ने प्रशासन से जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामलों पर स्पष्ट जानकारी देने और उनकी जमीन को सुरक्षित रखने की मांग की. किसानों का कहना है कि उनकी जमीन लंबे समय से उनके कब्जे और उपयोग में है और इसे सिंचाई परियोजना के नाम पर उनसे नहीं लिया जाना चाहिए.

किसानों की मांगों पर बनेगी कमेटी

किसानों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद जिला कलेक्टर ने कहा कि किसानों की समस्याओं और उनकी मांगों पर चर्चा की गई है. उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी. किसानों ने जिन जानकारियों और दस्तावेजों की मांग की है, उनकी कॉपी भी उन्हें उपलब्ध कराने की बात कही गई है.

प्रशासन की ओर से दिए गए इस आश्वासन के बाद किसानों ने फिलहाल अपनी बात रखी, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा.

करीब 3000 बीघा जमीन को लेकर बड़ा विवाद

किसान प्रतिनिधिमंडल में शामिल पूर्व सरपंच उगमाराम जाजूंन्दा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि प्रशासन ने किसानों को आश्वासन दिया है कि करीब 3000 बीघा जमीन किसानों के नाम और उनके खातों में यथावत रहेगी. किसानों का दावा है कि यह जमीन पिछले करीब 40 वर्षों से उनके पास है.

किसानों के मुताबिक, सिंचाई विभाग इस जमीन को परियोजना के लिए लेने की कोशिश कर रहा है. इसी वजह से प्रभावित गांवों के किसानों में नाराजगी है. किसानों का कहना है कि वे अपनी जमीन को लेकर किसी भी तरह का अन्याय स्वीकार नहीं करेंगे और अपनी मांगों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे.

मांग पूरी नहीं हुई तो आमरण अनशन की चेतावनी

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर उनकी सभी न्यायसंगत मांगों को समय रहते पूरा नहीं किया गया तो वे आंदोलन को और बड़ा करेंगे. किसानों ने कहा कि जरूरत पड़ने पर वे आमरण अनशन पर भी बैठेंगे.

फिलहाल प्रशासन ने किसानों की मांगों की जांच के लिए कमेटी बनाने और जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है. अब किसानों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है. माना जा रहा है कि कमेटी की जांच और उसके बाद होने वाली कार्रवाई से यह साफ होगा कि सिंगला-रूपनगढ़ सिंचाई परियोजना को लेकर प्रभावित किसानों की जमीन के मामले में आगे क्या फैसला लिया जाता है.

किसानों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर

अजमेर में हुआ यह प्रदर्शन सिंगला-रूपनगढ़ सिंचाई परियोजना को लेकर किसानों की नाराजगी को दिखाता है. एक तरफ सरकार और प्रशासन सिंचाई परियोजनाओं के जरिए पानी और खेती से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीन अधिग्रहण से प्रभावित किसानों की अपनी चिंताएं हैं.

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि किसानों की करीब 3000 बीघा जमीन को लेकर प्रशासन की जांच में क्या सामने आता है और किसानों की मांगों पर क्या फैसला लिया जाता है. फिलहाल किसान प्रशासन के आश्वासन के बाद आगे की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं. (चंद्र शेखर शर्मा)

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