Pangasius Fish: तालाब में पंगेशियस है तो सितम्बर में जरूर करें ये खास काम 

Pangasius Fish: तालाब में पंगेशियस है तो सितम्बर में जरूर करें ये खास काम 

Pangasius Fish पंगेशियस मछली को ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है. यही वजह है कि आम दिनों के मुकाबले सितम्बर में पंगेशियस की पानी से लेकर उसे दिए जाने वाले फीड पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. साथ ही उसके तालाब में आक्सीजन की भी कमी न हो इसके लिए पानी में होने वाले प्रदूषण को भी रोकने के उपाय करने चाहिए. 

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Pangasius Fish: तालाब में पंगेशियस है तो सितम्बर में जरूर करें ये खास काम Fish in Pond (File Photo- Pexels)

खासतौर पर सितम्बर के महीने में मछली पालकों को बहुत अलर्ट रहने की जरूरत होती है. क्योंकि ये वो वक्त होता है जब तीन तरह के मौसम का एहसास होता है. गर्मी-बरसात तो देखने को मिलते ही हैं, साथ में मौसम भी बदलता है. जिसके चलते होता ये है कि बारिश के चलते तालाब का पानी दूषि‍त होने का खतरा बना रहता है तो फीड में नमी आने के चलते उसके खराब होने का भी खतरा रहता है. इतना ही नहीं इसी मौसम में तालाब के अंदर आक्सीजन की कमी होने लगती है. 

फिशरीज एक्सपर्ट की मानें तो मौसम और तापमान में होने वाले बदलाव के मुताबिक ही मछलियों को दिया जाने वाला फीड तय किया जाता है. फीड की मात्रा ही मछलियों की ग्रोथ में सहायक होती है. साथ ही तालाब के पानी पर दवाई का छिड़काव भी जरूरी हो जाता है. वर्ना मछलियों की मौत होने लगती है. इसलिए सितम्बर में मछली पालकों को ज्यादा अलर्ट रहने की जरूरत होती है. 

पंगेशियस के लिए सितम्बर में क्या करें 

  • पंगेशियस मछली पालन करने वाले सितम्बर में फीड का खास ख्याल रखें. 
  • पंगेशियस मछली को पहले से छठे महीने तक उसके कुल वजन का 1.5 फीसद से लेकर 2, 3, 4, 5 और 6 फीसद तक फीड देना चाहिए. 
  • पंगेशि‍यस मछली को उसकी उम्र के हिसाब से प्रोटीन फीड जरूर देना चाहिए. 
  • पंगेशियस मछली को पहले दो महीने 32 फीसद प्रोटीन देना चाहिए.
  • पंगेशि‍यस मछली को तीन से चार महीने में 28 फीसद प्रोटीन देना चाहिए. 
  • पंगेशि‍यस मछली को पांचवे महीने में 25 और छठे महीने में 20 फीसद प्रोटीन फीड देना चाहिए. 
  • पंगेशियस के तालाब में दूसरे महीने में 20 किग्रा प्रति एकड़ की दर से नमक का छिड़काव करें.

पंगेशियस को संक्रमण से ऐसे बचाएं 

  • बरसात में तालाब के पानी में संक्रमण की आशंका बनी रहती है. इससे मछलिया प्रभावित होती हैं. 
  • तालाब में मछलियों को संक्रमण से बचाने के लिए चूने का इस्तेमाल करें. 
  • हर 15 दिन पर 10-15 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से चूने के घोल का छिड़काव करें. 
  • तालाब का पानी भी बरसात में दूषि‍त हो जाता है. 
  • पानी का संक्रमण दूर करने के लिए महीने में एक बार प्रति एकड़ की दर से 400 ग्राम पोटाशियम परमेग्नेट और पानी का घोल बनाकर छिड़काव करें.
  • मछली को पारासाईटिक संक्रमण से बचाने हेतु फसल चक्र में दूसरे महीने में दो बार 40 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से नमक को पानी में घोल कर छिड़क दें. 
  • महीने में एक सप्ताह प्रति किलोग्राम फीड में 10 ग्राम नमक मिलाकर मछलियों को खिलाएं. 

पंगेशियस के तालाब में करें ये काम

  • पानी का तापमान 20 डिग्री से कम और 36 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा है तो फीड आधा कर दें. 
  • तालाब का पानी ज्यादा हरा हो जाए तो तालाब में रासायनिक उर्वरक और चूने का इस्तेमाल रोक दें. 
  • तालाब का पानी ज्यादा हरा हो जाए और कंट्रोल ना हो तो रसायन का इस्तेमाल करें. 
  • हरे पानी में दोपहर के वक्त 800 ग्राम कॉपर सल्फेट या 250 ग्राम एट्राजीन आधा एकड़ की दर से 100 लीटर पानी में घोल बनाकर तालाब में छिड़क दें. 
  • तालाब में ऑक्सीजन कम होने पर ऑक्सीजन बढ़ाने वाले टेबलेट का छिड़काव 400 ग्राम प्रति एकड़ से करें.
  • मछली का वजन बढ़ाने के लिए प्रति किलोग्राम फीड में 10 ग्राम मिनरल मिक्सचर, 2-5 ग्राम गट प्रोबायोटिक्स को वनस्पति तेल या बाजार में उपलब्ध कोई भी बाईंडर 30 एमएल मिलाकर रोजाना दे सकते हैं.  
  • तालाब में ऑक्सीजन का लेवल बढ़ाने के लिए सुबह-शाम दो-दो घंटे एरेटर चलाएं. 
  • नर्सरी तालाब में रासायनिक खाद का इस्तेमाल ज्यादा नहीं करना चाहिए. 
  • मछली बीज का उत्पादन करने वाले सितम्बर में काम ना करें.

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