PHOTOS: बहराइच पहुंचा किसान कारवां, किसानों को बताया गया इंटीग्रेटेड फार्मिंग का तरीका

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PHOTOS: बहराइच पहुंचा किसान कारवां, किसानों को बताया गया इंटीग्रेटेड फार्मिंग का तरीका

किसान कारवां
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उत्तर प्रदेश के 75 जिलों की यात्रा पर निकला किसान कारवां अपने 59वें पड़ाव के तौर पर जनपद बहराइच पहुंचा. यह कार्यक्रम जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर तेजवापुर ब्लॉक के गजपतिपुर गांव पहुंचा, जहां ग्रामीणों की भारी संख्या देखने को मिली. इस दौरान जिले के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के साथ पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने किसानों को खेती और पशुपालन से संबंधित सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी.

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पहले चरण में केवीके के वैज्ञानिक बहराइच वन डॉ. अरुण कुमार राजभर ने किसानों को इंटीग्रेटेड फार्मिंग को लेकर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कहा कि समन्वित कृषि प्रणाली से खेती करने पर किसान मुर्गी पालन, बकरी पालन, मछली पालन, बागवानी सहित अलग-अलग फसलों की खेती के साथ फूलों की खेती भी कर सकते हैं. 

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दूसरे चरण में जिला कृषि अधिकारी बहराइच डॉ. सूबेदार यादव ने किसानों को कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में जानकारी दी. इसके साथ ही उन्होंने किसान रजिस्ट्रेशन की जानकारी दी और इसके महत्व के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा कि अब कृषि विभाग फॉर्म रजिस्ट्रेशन के लिए गांव-गांव में कैंप लगा रहा है, तो कृपया जिनका रजिस्ट्रेशन अभी नहीं हो पाया है, वे कैंप में जाकर अपना रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरवा सकते हैं.

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तीसरे चरण में चंबल फर्टिलाइजर एंड केमिकल लिमिटेड के प्रतिनिधि बृजेंद्र यादव ने उत्तम प्रणाम और उत्तम सुपरराइजा उत्पादों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि ये दोनों जैव-उत्पाद किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हैं. वहीं, इनके उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बनी रहती है. ये उत्पाद रसायन-मुक्त हैं और खेत की सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाते. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चंबल फर्टिलाइजर की ओर से मिट्टी की जांच निशुल्क कराई जाती है.

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चौथे चरण में केवीके बहराइच वन के वैज्ञानिक डॉ. नंदन सिंह ने किसानों को मिट्टी जांच के लिए खेतों से मिट्टी कैसे निकालें, इसको लेकर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कहा कि मिट्टी जांच के दौरान इस बात का जरूर ध्यान देना चाहिए कि किसान यह जानकारी दें कि वे मिट्टी में कौन सी फसल की खेती करने वाले हैं. इसका फायदा यह होता है कि सॉयल हेल्थ कार्ड बनता है.  

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पांचवें चरण में केवीके बहराइच वन के कृषि वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र सिंह ने किसानों को मूंग की खेती से जुड़ी जानकारी दी और मूंग की प्रजातियों के बारे में भी विस्तार से बताया. आगे उन्होंने कहा कि किसान जो भी बीज बाजार से लाते हैं, उसका बीज शोधन जरूर कर लें, उसके बाद ही खेतों में उसका उपयोग करें. इसका फायदा यह होता है कि उत्पादन करीब 15 से 20 फीसदी तक बढ़ जाता है.

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छठवें चरण में इफको के प्रतिनिधि प्रभात यादव मिट्टी के विभिन्न प्रकारों को ध्यान में रखते हुए उर्वरकों के उपयोग के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के उपयोग से फसलों को लगभग 80–90 प्रतिशत तक पोषक तत्वों की उपलब्धता का लाभ मिलता है. इसके साथ ही उन्होंने सागरिका उत्पाद के बारे में जानकारी दी.

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सातवें चरण में जादूगर सलमान ने अपनी कला के माध्यम से खेती से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत की. उन्होंने किसानों को गोबर खाद के उपयोग और पशुपालन को बढ़ावा देने का सुझाव दिया. इसके साथ ही उन्होंने किसानों से हर शुभ अवसर पर वृक्ष लगाने की अपील की. इसके अलावा उन्होंने किसानों को आय डबल करने को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी. 

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अंतिम, आठवें चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 10 विजेताओं को 500 रुपये और तीन विजेताओं को एक–एक हजार रुपए दिए गए. इसके साथ ही महिला किसान पूनम को 2000 रुपये दिया गया. किसान तक’ का यह कारवां किसानों को आधुनिक तकनीक, बाजार से जुड़ाव और आय बढ़ाने के उपायों से जोड़ने का एक प्रभावी मंच प्रदान कर रहा है.

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