
मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में केन बेतवा लिंक परियोजना का विरोध जारी है. यहां बिजावर क्षेत्र के ढोढन पलकोंआ सहित 14 गांव के किसान विरोध कर रहे हैं. ये सभी किसान देश की पहली नदी जोड़ो योजना केन बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित हुए हैं.
सभी किसान अपने हक की लड़ाई के लिए पिछले 10 दिनों से लगातार अनशन पर अड़े हुए हैं. प्रदर्शन के दौरान किसानों ने जल सत्याग्रह, मिट्टी सत्याग्रह, चिता सत्याग्रह और चूल्हा बंद सत्याग्रह किया है. किसान अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं.
किसानों ने कहा कि उनकी मांगें नहीं मानी गई तो वे नदी किनारे अपना विरोध प्रदर्शन इसी तरह जारी रखेंगे. प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले अमित भटनागर ने बताया कि परियोजना से प्रभावित किसानों को अधिग्रहण के अनुसार उचित मुआवजा नहीं दिया गया, इसलिए वे विरोध में उतरे हैं.
किसान नेता ने कहा, सरकार ने वादा किया था कि 18 वर्ष से अधिक आयु वाले हर व्यक्ति को मुआवजे की राशि दी जाएगी जो अभी तक सिर्फ 10% लोगों को दी गई है. इन किसानों के मकान तोड़ दिए गए और वहां पर सरकारी निर्माण शुरू हो चुका है. किसान बेघर हो चुके हैं जिन्हें बसाने के लिए कुछ नहीं हो रहा है.
किसानों का कहना है कि पिछले 4 साल से उनका आंदोलन चल रहा है. किसान दिल्ली जाकर अपना आंदोलन करने वाले थे, लेकिन उन्हें रोक दिया गया. यही वजह है कि वे केन-बेतवा के तट पर अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इस प्रदर्शन में छोटे-छोटे बच्चे, महिलाएं और पुरुष शामिल हैं.
किसानों का कहना है जब प्रशासन मांगें मानेगा तभी धरना स्थल से उठेंगे, नहीं तो यहीं जान दे देंगे. प्रदर्शन कर रहे इन किसानों के पास न तो खाने पीने का पर्याप्त इंतजाम है और न रात गुजारने के लिए बिस्तर. किसान दिन-रात नदी के किनारे अपने आंदोलन को जारी रखे हुए हैं.
किसानों ने बताया कि धरना स्थल पर ही आटे की रोटियां लकड़ी के चूल्हे पर बनाकर नमक और चटनी के साथ खा लेते हैं. बाकी बच्चों को न दूध मिल रहा न फल. सिर्फ नदी का पानी पीकर काम चलाया जा रहा है. कुछ किसानों को 12. 50 लाख रुपये मुआवजा दिया गया तो कुछ किसानों को सिर्फ 5 लाख मिला है.(लोकेश चौरसिया का इनपुट)