
मlई का महीना समाप्त होने के साथ ही 1 जून से कुछ महत्वपूर्ण बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जिनका असर आम लोगों की दैनिक जरूरतों और खर्चों पर पड़ सकता है. इनमें सबसे ज्यादा चर्चा एलपीजी सिलेंडर से जुड़े बदलावों की है. हर महीने की पहली तारीख को ऑयल मार्केटिंग कंपनियां गैस सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा कर नए रेट जारी करती हैं. ऐसे में जून की शुरुआत के साथ घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकता है.
इसके साथ ही एलपीजी कनेक्शन को लेकर नया प्रावधान लागू होगा. सरकार ने साफ किया है कि जिन उपभोक्ताओं के पास पीएनजी और एलपीजी दोनों कनेक्शन मौजूद हैं, उन्हें एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा. इसके लिए सरकार ने ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो दोनों सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं.
1 जून 2026 से पेट्रोल, डीजल और एयर टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर नया शुल्क भी प्रभावी होने जा रहा है. वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष के बीच केंद्र सरकार ने इन उत्पादों के निर्यात पर शुल्क लगाने का फैसला किया है. सरकारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर 1.5 रुपये प्रति लीटर, डीजल के निर्यात पर 13.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ के निर्यात पर 9.5 रुपये प्रति लीटर का शुल्क लागू किया जाएगा. इसके अलावा हर महीने की तरह जून की पहली तारीख को एटीएफ की कीमतों की भी समीक्षा की जाएगी, जिसका असर हवाई यात्रा क्षेत्र पर पड़ सकता है.
जून महीने की शुरुआत के साथ सोलर पैनल उद्योग में भी एक अहम बदलाव लागू होगा. 1 जून 2026 से सोलर पैनल के लिए अप्रूव्ड मॉडल एंड मैन्युफैक्चरर्स लिस्ट (एएलएमएम लिस्ट-II) लागू हो जाएगी इसके बाद सरकारी योजनाओं और सब्सिडी आधारित परियोजनाओं में केवल उन्हीं सोलर मॉड्यूल और सेल का उपयोग किया जा सकेगा, जो इस सूची में शामिल होंगे. यह व्यवस्था गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की जा रही है.
हालांकि, इसके चलते सोलर पैनल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना भी जताई जा रही है. 1 जून से लागू होने वाले इन बदलावों का असर अलग-अलग क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है. एलपीजी से लेकर ईंधन और सोलर सेक्टर तक कई नियमों में परिवर्तन होने जा रहा है, इसलिए उपभोक्ताओं की नजर महीने की पहली तारीख पर बनी हुई है.