कर्ज माफी को लेकर बढ़ा विवाद, किसानों ने तमिलनाडु सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

कर्ज माफी को लेकर बढ़ा विवाद, किसानों ने तमिलनाडु सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

किसानों का आरोप है कि राज्य सरकार ने विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए फसल लोन माफी के वादे अब तक पूरे नहीं किए हैं, जिससे किसानों में भारी नाराजगी है. प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में किसानों ने अपने सिर पर काला कपड़ा बांधा और हाथों में काले झंडे लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की.

तमिलनाडु सरकार के खिलाफ खोला मोर्चातमिलनाडु सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
क‍िसान तक
  • Noida,
  • May 30, 2026,
  • Updated May 30, 2026, 12:02 PM IST

तमिलनाडु में किसानों ने शुक्रवार को पेरम्बालूर जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. किसानों का आरोप है कि राज्य सरकार ने विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए फसल लोन माफी के वादे अब तक पूरे नहीं किए हैं, जिससे किसानों में भारी नाराजगी है. प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में किसानों ने अपने सिर पर काला कपड़ा बांधा और हाथों में काले झंडे लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. किसानों का कहना है कि चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें फसल लोन माफ करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन सरकार उस वादे को लागू करने में विफल रही है. प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से मांग की है कि फसल लोन माफी योजना की तत्काल समीक्षा की जाए और चुनाव से पहले किसानों को दिए गए सभी आश्वासनों को बिना किसी देरी के लागू किया जाए.

लोन माफी योजना को लेकर किसानों की नाराजगी

यह विरोध प्रदर्शन मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अगुवाई वाली टीवीके सरकार की सहकारी फसल लोन माफी योजना को लेकर किसानों की नाराजगी के कारण हुआ. किसानों का कहना है कि सरकार की ओर से घोषित योजना चुनाव के दौरान किए गए वादों से मेल नहीं खाती. प्रदर्शन कर रहे किसानों के अनुसार, चुनाव से पहले मुख्यमंत्री विजय ने वादा किया था कि पांच एकड़ से कम जमीन वाले छोटे और सीमांत किसानों का पूरा फसल ऋण माफ किया जाएगा, जबकि बड़े किसानों के बकाया लोन में 50 फीसदी की छूट दी जाएगी. किसानों का आरोप है कि मौजूदा योजना में इन वादों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया है.

किसानों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

किसानों का आरोप है कि सरकार ने लोन माफी योजना में कई शर्तें और अधिकतम सीमा तय कर दी है, जिससे उन्हें पूरी राहत नहीं मिल पाएगी. उनका कहना है कि तय सीमा से अधिक लोन होने पर किसानों को केवल 5,000 रुपये तक की ही माफी मिलेगी, जो बहुत कम है. इसी बात से नाराज होकर अलग-अलग किसान संगठनों के सदस्य कलेक्ट्रेट के बाहर एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. किसानों ने इस योजना को "झूठा वादा" बताते हुए इसमें बदलाव की मांग की. प्रदर्शन के दौरान किसानों ने नारे लगाए, "विजय अन्नाची, चुनावी वादे का क्या हुआ?" और "जब तक वादे पूरे नहीं होंगे, हमारा संघर्ष जारी रहेगा."

तमिलनाडु में लोन माफी को लेकर किसान आंदोलन

आंदोलन में शामिल तमिलनाडु किसान संघ के नेताओं ने कहा कि धान और गन्ना उत्पादक किसान पहले से ही आर्थिक तंगी और फसल नुकसान से जूझ रहे हैं. ऐसे में सरकार की नई लोन माफी योजना ने उन्हें और निराश कर दिया है. किसानों का कहना है कि सरकार योजना को सही ठहराने के लिए केंद्र के नियमों का हवाला दे रही है, जबकि यह राज्य के सहकारी कानूनों और अदालत के पुराने फैसलों के अनुरूप नहीं है.

घोषणापत्र और सरकारी योजना में अंतर का आरोप

पेरम्बालूर के साथ-साथ वेल्लोर में भी किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया. वेल्लोर में किसान संघ के सदस्यों ने जिला कलेक्टर कार्यालय में आयोजित मासिक शिकायत निवारण बैठक का बहिष्कार कर दिया और लोन माफी योजना के विरोध में बैठक छोड़कर बाहर आ गए. इसके बाद किसानों ने कलेक्ट्रेट परिसर में नारेबाजी की और विरोध जताने के लिए जमीन पर लेटकर प्रदर्शन किया. उनका आरोप था कि सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों के हितों को नजरअंदाज किया है. प्रदर्शन कर रहे किसानों ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय से मांग की कि चुनावी वादे के अनुसार छोटे और सीमांत किसानों का पूरा फसल लोन माफ किया जाए, जबकि बड़े किसानों को 50 प्रतिशत लोन माफी का लाभ दिया जाए. (ANI)

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