
हरियाणा में सामने आए एक बड़े वित्तीय घोटाले पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. सरकार ने हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड के कंट्रोलर फाइनेंस एंड अकाउंट्स राजेश सांगवान को सेवा से बर्खास्त कर दिया है. यह कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2)(b) के तहत की गई है. सरकार का कहना है कि घोटाले की गंभीरता को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त संदेश दिया जा सके और प्रशासन में पारदर्शिता बनी रहे.
सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, इस मामले की शुरुआत उस समय हुई जब हरियाणा राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 14 मार्च 2026 को रणधीर सिंह नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया. उसके खिलाफ मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की अलग-अलग धाराओं के तहत दर्ज किया गया है. जांच के दौरान सरकारी धन के दुरुपयोग, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं.
जांच एजेंसियों के मुताबिक यह मामला एक सुनियोजित और बहु-स्तरीय वित्तीय घोटाले से जुड़ा हुआ है. आरोप है कि सरकारी प्रक्रियाओं में हेरफेर कर फर्जी बैंकिंग लेन-देन के जरिए सरकारी धन को आरोपी और उनके सहयोगियों से जुड़े खातों और संस्थाओं में ट्रांसफर किया गया. इस घोटाले के कारण राज्य को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है, जिससे प्रशासनिक तंत्र में भी हड़कंप मच गया है.
मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा सरकार ने इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी है, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच हो सके. उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए राजेश सांगवान को पद से बर्खास्त कर दिया.
सरकार का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही या नरमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यह कार्रवाई न सिर्फ दोषियों के खिलाफ सख्त संदेश है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है. आने वाले समय में जांच के आधार पर और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.