
महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में एक मादा बाघिन की रहस्यमय मौत से वन विभाग और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है. यह सनसनीखेज घटना सिंदेवाही तहसील के नवरगांव वन क्षेत्र अंतर्गत रत्नपुर परिसर में सामने आई, जहां एक बाघिन अपने तीन शावकों के साथ खेत में घुसी थी. इसी दौरान बाघिन ने एक वन रक्षक पर हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया. हमले के करीब एक घंटे बाद ही बाघिन का शव खेत में पड़ा मिला.
मृत बाघिन की पहचान टी‑84 के रूप में हुई है. उसकी उम्र करीब 9 से 10 men बताई जा रही है. फिलहाल उसकी मौत के सही कारणों का पता नहीं चल सका है. वन विभाग का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वजह स्पष्ट हो पाएगी.
रविवार सुबह करीब 11:30 बजे, रत्नपुर गांव के किसान मंगेश टोंडफोडे अपने मक्के के खेत में टहलने गए थे. इसी दौरान उन्होंने खेत में एक मृत बैल पड़ा देखा. संदेह होने पर जब उन्होंने आसपास निरीक्षण किया, तो मक्के की फसल में एक बाघिन को उसके तीन शावकों के साथ छिपा हुआ पाया.
इसके बाद ग्रामीणों और वन विभाग को सूचना दी गई. बाघिन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए. शोर‑शराबे और भीड़ के कारण बाघिन घबरा गई और अपने शावकों के साथ सुरक्षित जगह की ओर जाने की कोशिश करने लगी.
इसी बीच वन विभाग की टीम बाघिन और उसके शावकों को जंगल की ओर खदेड़ने में जुट गई. अफरातफरी के माहौल में तीनों शावक अलग‑अलग दिशाओं में बिछड़ गए, जबकि बाघिन अकेली रह गई. अपने बच्चों से बिछड़ने के बाद बौखलाई बाघिन ने वन रक्षक सज्जन पारेकर पर हमला कर दिया. इस हमले में उनके हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आईं. प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें पहले सिंदेवाही और फिर चंद्रपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है.
हमले के बाद बाघिन रत्नपुर‑शंकरपत सड़क के किनारे दामोदर लोधे के धान के खेत में जाकर छिप गई. इसी दौरान इलाके में भारी भीड़ जमा रही. करीब एक घंटे बाद, दोपहर लगभग 1 बजे, वही बाघिन मृत अवस्था में पाई गई.
बाघिन और उसके तीनों शावक पिछले दो‑तीन महीनों से नवरगांव इलाके में घूम रहे थे. शावकों की उम्र लगभग 6‑7 महीने बताई जा रही है. इस उम्र में वे खुद शिकार नहीं कर सकते, ऐसे में मां की मौत के बाद उनके भूख से मरने का खतरा मंडरा रहा है.
वन अधिकारी अंजलि सायंकार ने बताया कि “तीनों शावकों की तलाश जारी है. बाघिन की मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा. पोस्टमार्टम के बाद बाघिन का अंतिम संस्कार कर दिया गया है.”
फिलहाल इलाके में कई सवाल उठ रहे हैं—बाघिन की मौत प्राकृतिक थी या मानवीय कारणों से हुई? क्या लोगों की भीड़ और हस्तक्षेप से हालात बिगड़े? मां से बिछड़े शावकों का पुनर्वास कैसे होगा? इन सभी सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ पाएंगे.(विकास राजूरकर का इनपुट)