Wheat Procurement: यूपी में 6.10 लाख मीट्रिक गेहूं की खरीद हुई, 1.15 लाख किसानों के खातों में पहुंचे इतने करोड़

Wheat Procurement: यूपी में 6.10 लाख मीट्रिक गेहूं की खरीद हुई, 1.15 लाख किसानों के खातों में पहुंचे इतने करोड़

राज्य में गेहूं खरीद ने रफ्तार पकड़ी है और लाखों किसानों को इसका लाभ मिला है. सरकार ने पारदर्शी व्यवस्था के जरिए किसानों के खातों में बड़ी राशि ट्रांसफर की है, जिससे प्रक्रिया आसान बनी है.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • May 01, 2026,
  • Updated May 01, 2026, 8:27 PM IST

इस समय देशभर में केंद्रीय पूल के तहत भारत सरकार गेहूं की खरीद कर रही है. इस बीच, उत्तर प्रदेश में रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के दौरान गेहूं खरीद अभियान तेज गति से आगे बढ़ रहा है. राज्य सरकार की सक्रिय रणनीति और मजबूत जमीनी व्यवस्था के चलते 28 अप्रैल तक कुल 6.10 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद दर्ज की गई है. यह आंकड़ा दर्शाता है कि खरीद प्रक्रिया इस बार व्यवस्थित और प्रभावी तरीके से संचालित हो रही है. सरकार ने खरीद अभियान में पारदर्शिता और किसानों की सुविधा को प्राथमिकता दी है. अब तक 1,15,854 किसानों को 1318 करोड़ रुपये का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से किया जा चुका है. समय पर भुगतान मिलने से किसानों में संतोष का माहौल है और वे बिना किसी परेशानी के अपनी उपज बेच पा रहे हैं.

'खरीद केंद्रों पर बेहतर व्यवस्थाएं'

राज्‍य सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्रदेश के सभी खरीद केंद्रों पर व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया गया है. तौल, भंडारण और भुगतान की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है, ताकि किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि हर केंद्र पर पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रहें और किसी भी किसान को लौटना न पड़े.

पूर्वांचल के जिलों का शानदार प्रदर्शन

सरकारी बयान के मुताबिक, पूर्वांचल के जिलों ने इस बार गेहूं खरीद में बेहतर प्रदर्शन किया है. देवरिया जिले ने 55.82 प्रतिशत खरीद के साथ प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है. इसके अलावा बस्ती, प्रतापगढ़, बलरामपुर और संतकबीरनगर जैसे जिले भी खरीद के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. इन जिलों में प्रशासनिक सक्रियता और किसानों की भागीदारी साफ दिखाई दे रही है.

बेमौसम बारिश के बाद राहत का फैसला

वहीं, बेमौसम बारिश से प्रभावित गेहूं को लेकर सरकार ने राहत भरा फैसला लिया है. गुणवत्ता में कमी को देखते हुए केंद्र सरकार ने 70 प्रतिशत तक चमकविहीन और 20 प्रतिशत तक सिकुड़े या टूटे दाने वाले गेहूं की खरीद बिना किसी कटौती के करने की अनुमति दी है. इससे किसानों को नुकसान से बचाने में मदद मिलेगी.

डिजिटल व्यवस्था से आसान हुई प्रक्रिया

खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया गया है. पंजीकरण से लेकर भुगतान तक सभी चरण ऑनलाइन किए गए हैं जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और प्रक्रिया आसान हुई है. निगरानी तंत्र को भी मजबूत किया गया है ताकि अधिक से अधिक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके.

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