सेब आयात पर टैक्स घटाने का किसानों ने किया विरोध, राष्ट्रव्यापी आंदोलन का ऐलान

सेब आयात पर टैक्स घटाने का किसानों ने किया विरोध, राष्ट्रव्यापी आंदोलन का ऐलान

हिमाचल प्रदेश के सेब किसान राष्ट्रव्यापी किसान हड़ताल में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने चेतावनी दी है कि भारत-अमेरिका और अन्य मुक्त व्यापार समझौतों के तहत हाल ही में आयात शुल्क में की गई कटौती से पहाड़ी राज्य की सेब आधारित अर्थव्यवस्था तबाह हो सकती है.

सेब किसानों का विरोध प्रदर्शनसेब किसानों का विरोध प्रदर्शन
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Feb 08, 2026,
  • Updated Feb 08, 2026, 2:18 PM IST

हिमाचल प्रदेश के सेब किसानों ने राष्ट्रव्यापी किसान हड़ताल में शामिल होने का फैसला किया है. दरअसल, केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की ओर से भारत- अमेरिका व्यापार समझौता में भारतीय सेब उत्पादकों के हितों की रक्षा के बार-बार आश्वासन के बावजूद, हिमाचल प्रदेश के सेब किसानों ने 12 फरवरी को होने वाली राष्ट्रव्यापी किसान हड़ताल में शामिल होने की तैयारी तेज कर दी है. साथ ही सेब किसानों ने दिल्ली मार्च की घोषणा की है.  उन्होंने चेतावनी दी है कि भारत-अमेरिका और अन्य मुक्त व्यापार समझौतों के तहत हाल ही में आयात शुल्क में की गई कटौती से पहाड़ी राज्य की सेब आधारित अर्थव्यवस्था तबाह हो सकती है.

"किसान विरोधी" व्यापार नीतियों का आरोप

हिमाचल प्रदेश के किसान संगठनों ने केंद्र सरकार पर "किसान विरोधी" व्यापार नीतियों का आरोप लगाया है और कहा है कि उत्पादक अब संयुक्त राष्ट्र आंदोलन के तहत दिल्ली तक मार्च करने के लिए तैयार हैं. जुब्बल और रोहरू में आयोजित हिमाचल प्रदेश सेब उत्पादक संघ (एचपीएजीए) की ब्लॉक स्तरीय बैठकों में इस आह्वान को दोहराया गया, जहां बाग मालिकों ने 12 फरवरी की हड़ताल के लिए गांव स्तर पर किसानों को संगठित करने का संकल्प लिया.

पूर्व विधायक और वरिष्ठ किसान नेता राकेश सिंघा ने चेतावनी दी कि संयुक्त राज्य अमेरिका, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के देशों से सेब पर आयात शुल्क कम होने से स्थानीय उत्पादक भारी सब्सिडी वाले विदेशी उत्पादों के प्रति असुरक्षित हो जाएंगे. उन्होंने कहा कि इस नीति का प्रभाव बहुत गहरा होगा. अमेरिकी सेब की खेती को वॉलमार्ट और कारगिल जैसी बड़ी कंपनियों का भारी समर्थन प्राप्त है और उन्हें भारी सब्सिडी मिलती है.

वहीं, हमारे किसानों को इसका एक अंश भी नहीं मिलता. आयात शुल्क में यह कमी यहां के सेब के बागों को बर्बाद कर देगी. उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम राजनीतिक रूप से प्रेरित था और इसका उद्देश्य हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करना था.उन्होंने कहा कि यह सिर्फ सेबों का मामला नहीं है. यह हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने का मामला है. यह लड़ाई हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए है, और हम एकजुट आंदोलन के माध्यम से इसे रोकेंगे.

ये समझौता सेब अर्थव्यवस्था को कर देगा "तबाह" 

हिमाचल प्रदेश सेब उत्पादक संघ के अध्यक्ष संजय चौहान ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता और अन्य मुक्त व्यापार समझौते पहाड़ी राज्यों की सेब अर्थव्यवस्था को "तबाह" कर देंगे. चौहान ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते ने गंभीर विवाद खड़ा कर दिया है. इससे हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर और उत्तराखंड के किसानों के 15 लाख से अधिक परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. उन्होंने मांग की है कि केंद्र सरकार व्यापार समझौते का पूरा विवरण व्यापक चर्चा के लिए संसद के समक्ष रखे.

उन्होंने आगे कहा कि यह समझौता कृषि, व्यापार और विनिर्माण को प्रभावित करता है. सेब पर आयात शुल्क पहले ही कम किया जा चुका है. यह भारत की संघीय संरचना और आर्थिक रूप से कमजोर पहाड़ी राज्यों पर हमला है.  चौहान ने इस मुद्दे को राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) और जीएसटी मुआवजे की वापसी से भी जोड़ा.

"पीयूष गोयल ने पूरे मामले को उलझा दिया है"

संजय चौहान ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को पहले ही राजस्व सहायता में लगभग 48,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. आरडीजी और जीएसटी मुआवजे को समाप्त करने से राज्य और अधिक कर्ज में डूब जाएगा. यह हिमाचल प्रदेश की जनता पर सीधा आर्थिक हमला है, उन्होंने मुख्यमंत्री से सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह करते हुए कहा. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के आश्वासनों पर चौहान ने कहा कि पीयूष गोयल ने पूरे मामले को उलझा दिया है, और कहा है कि व्यापार समझौते से संबंधित संयुक्त बयानों में सेब उत्पादकों के लिए किसी स्पष्ट संरक्षण का उल्लेख नहीं किया गया है.

व्यापार समझौता पहाड़ी किसानों के लिए "खतरनाक"

हिमाचल प्रदेश में संयुक्त किसान संघों के संयोजक और प्रगतिशील सेब उत्पादक हरीश चौहान ने भी इसी तरह की चिंताओं को व्यक्त करते हुए व्यापार समझौतों को पहाड़ी किसानों के लिए "मृत्यु का फरमान" बताया. उन्होंने कहा कि ये विदेशी व्यापार समझौते हिमाचल प्रदेश, कश्मीर और उत्तराखंड में सेब, अखरोट और बादाम उत्पादकों को कुचल रहे हैं. शुल्क और गैर-शुल्क बाधाएं भी हटाई जा रही हैं. सेब किसानों के लिए शुल्क में लगभग 25 प्रतिशत की कमी की गई है. इस सौदे में हमें बलि का बकरा बनाया गया है. उन्होंने चेतावनी दी कि पूर्व के आंकड़ों से पता चलता है कि जब भी टैरिफ कम किए गए हैं, अमेरिकी सेब आयात में तेजी से वृद्धि हुई है.

उन्होंने कहा कि जैसे ही टैरिफ कम होंगे, सस्ते सेब भारतीय बाजार में भर जाएंगे. हमारी सेब आधारित अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी. यह समझौता पहाड़ी किसानों के लिए मौत के फरमान से कम नहीं है. उन्होंने भविष्य में आनुवंशिक रूप से संशोधित सेब और दुग्ध उत्पादों के संभावित प्रवेश पर भी चिंता व्यक्त की.

"सेब अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा गंभीर असर"

कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि आयात शुल्क में कमी से हिमाचल प्रदेश की सेब अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा. राठौर ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश को अपना दूसरा घर बताया था और सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने की घोषणा की थी. आज के एफटीए किसानों के खिलाफ हैं और हमारी अर्थव्यवस्था को तबाह कर देंगे. हिमाचल प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार सेब की खेती है, जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 5-6 लाख परिवारों को आजीविका देता है. जम्मू और कश्मीर और उत्तराखंड के साथ मिलकर ये पहाड़ी राज्य भारत के सेब उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा हैं, जो प्रतिवर्ष हजारों करोड़ रुपये का योगदान देते हैं और बड़े पैमाने पर मौसमी रोजगार सृजित करते हैं.

हिमाचल प्रदेश सेब उत्पादक संघ की जुब्बल और रोहरू में आयोजित ब्लॉक स्तरीय बैठकों के दौरान विरोध प्रदर्शनों को औपचारिक रूप दिया गया. जुब्बल में हुई बैठक की अध्यक्षता करते हुए संजय चौहान ने कहा कि किसान कई संकटों का सामना कर रहे हैं, जिनमें भूमि से बेदखली, घरों की सीलिंग और सरकारी सहायता में कमी शामिल है. उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते , प्रस्तावित बीज विधेयक, एमजीएनआरईजीए का कमजोर होना, स्मार्ट मीटर और बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत बजटीय समर्थन में कटौती कृषि को और भी गहरे संकट में धकेल रहे हैं.

12 फरवरी को हड़ताल में शामिल होंगे किसान

बैठकों में सर्वसम्मति से यह संकल्प लिया गया कि हिमाचल किसान सभा के समन्वय से 12 फरवरी को होने वाली राष्ट्रव्यापी किसान हड़ताल में अधिक मात्रा में किसान शामिल हों, स्थानीय इकाइयों को सेब उत्पादक क्षेत्रों में लामबंदी प्रयासों को तेज करने का निर्देश दिया गया. रोहरू में किसानों ने सामूहिक कार्रवाई के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. रोहरू ब्लॉक के सचिव रमन थार्ता ने बताया कि हिमाचल किसान सभा और हिमाचल सेब उत्पादक संघ का जिला स्तरीय सम्मेलन 27 और 28 फरवरी को शिमला में आयोजित किया जाएगा.

पीयूष गोयल ने कि चिंताओं को दूर करने की कोशिश

शनिवार को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने किसानों की चिंताओं को दूर करने की कोशिश की और कहा कि भारतीय सेब उत्पादकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद हैं. गोयल ने कहा कि आज भी लगभग छह लाख मीट्रिक टन सेब आयात किए जाते हैं, जिनमें से एक बड़ी मात्रा में सेब अमेरिका से आयात होते हैं. फिलहाल, सेब 50 रुपये प्रति किलो के न्यूनतम भाव से आयात किए जाते हैं, और 50 प्रतिशत आयात शुल्क (25 रुपये) के साथ, यह किसानों को संरक्षण देता है. इसका मतलब यह है कि आयातित सेब 75 रुपये प्रति किलो से कम कीमत पर भारतीय बाजार में प्रवेश नहीं कर सकते. हमारा उत्पादन सीमित है, जबकि खपत बढ़ रही है.

इस बीच हिमाचल प्रदेश के बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने चेतावनी दी कि केंद्र सरकार द्वारा हस्ताक्षरित विदेशी व्यापार समझौतों और आयात शुल्क में कमी से राज्य की सेब आधारित अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होगी. नेगी ने बताया कि भारत सरकार द्वारा हस्ताक्षरित विदेशी व्यापार समझौतों के तहत, हिमाचल प्रदेश में सेब की खेती अब लाभदायक नहीं रह जाएगी. आयात शुल्क में भारी कमी की गई है, और यूरोपीय संघ और अमेरिका से सेब पूरे साल भारत में आते रहेंगे, जिससे हमारे बागवान बुरी तरह प्रभावित होंगे. (ANI) 

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