
कश्मीर के बागवानों के हित में PDP अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने सरकार से एक मांग की है. दरअसल, महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार को कश्मीर से घाटी के बाकी हिस्सों तक बागवानी उत्पादों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए रेल लिंक के जरिए एक डेडिकेटेड फ्रूट कॉरिडोर बनाने की मांग की है. उन्होंने इसके लिए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को एक पत्र लिखा है. पत्र में मुफ्ती ने घाटी से देश के बाकी हिस्सों तक फलों की आवाजाही के लिए एक डेडिकेटेड रेलवे लाइन की मांग की है. साथ ही उन्होंने बागों से गुज़रने वाली रेल परियोजनाओं को रोकने के लिए उन्हें धन्यवाद भी दिया है.
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने X हैंडल पर शेयर किए गए पत्र में लिखा है कि किसान रेलवे कनेक्टिविटी के खिलाफ नहीं हैं. इसके विपरीत, एक भरोसेमंद रेल नेटवर्क के जरिए एक डेडिकेटेड फ्रूट कॉरिडोर की तुरंत जरूरत है, खासकर नेशनल हाईवे की अनिश्चितता और बार-बार होने वाली रुकावटों को देखते हुए.
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि विकास के काम सस्टेनेबिलिटी के साथ होने चाहिए और रेलवे परियोजनाओं के लिए उपजाऊ खेती की जमीन नहीं, बल्कि बंजर और बेकार पड़ी जमीन का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. उन्होंने जम्मू से चिनाब घाटी और पीर पंजाल तक रेल कनेक्टिविटी की मांग करते हुए कहा कि बेहतर रेलवे लिंक से इन इलाकों का विकास तेज होगा और किसानों और बागवानों को सीधा फायदा मिलेगा.
PDP प्रमुख ने कश्मीर घाटी में प्रस्तावित तीन रेलवे परियोजनाओं को रोके रखने के लिए अपनी "ईमानदारी से सराहना" व्यक्त की. उन्होंने कहा कि इस फैसले से लाखों किसान परिवारों को बहुत ज़रूरी राहत मिली है, जिनकी आजीविका सीधे खतरे में थी. उन्होंने कहा कि बाकी भारत की तरह, कश्मीर भी अपने गांवों में बसता है, जहां ज़्यादातर किसान छोटे ज़मीन वाले हैं, जिनके पास आय का कोई वैकल्पिक नहीं है. यह कठिनाई शिक्षित युवाओं में व्यापक बेरोजगारी से और बढ़ जाती है, जिससे पूरे परिवारों को जीवित रहने के लिए पूरी तरह से खेती पर निर्भर रहना पड़ता है.
महबूबा ने कहा कि हाल के वर्षों में किसानों ने हाई-डेंसिटी और पूंजी-गहन खेती की ओर रुख किया है. उन्होंने कहा है कि परियोजनाओं को सिर्फ़ रोके रखने से लगातार यह डर बना रहता है कि उनकी कड़ी मेहनत से किया गया निवेश बेकार हो सकता है. महबूबा ने कहा कि इसलिए इन परियोजनाओं को उनके मौजूदा अलाइनमेंट में खत्म करना "बड़े जनहित" में होगा, और अधिकारियों से आग्रह किया कि वे कीमती उपजाऊ भूमि की सुरक्षा के तरीके से उनका फिर से मूल्यांकन करें. उन्होंने कहा कि ऐसा कदम न केवल मौजूदा चिंता को दूर करेगा, बल्कि लगभग डेढ़ मिलियन परिवारों की आजीविका की भी रक्षा करेगा. (PTI)
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