BRICS Summit 2026 में छाई ओडिशा की कोरापुट कॉफी, आदिवासी किसानों को मिला बड़ा मंच

BRICS Summit 2026 में छाई ओडिशा की कोरापुट कॉफी, आदिवासी किसानों को मिला बड़ा मंच

BRICS समिट में ओडिशा की कोरापुट कॉफी ने देश-दुनिया का ध्यान खींचा है. विदेश मंत्रालय की ओर से डेलीगेट्स और पत्रकारों को दी गई किट में ‘टाइगर ब्राइट’ कॉफी शामिल की गई. यह कॉफी कोरापुट के आदिवासी किसानों द्वारा उगाई जाती है, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलने का मौका मिला है.

ओडिशा की कोरापुट कॉफीओडिशा की कोरापुट कॉफी
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Sep 13, 2026,
  • Updated Sep 13, 2026, 12:17 PM IST

नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में ओडिशा की मशहूर कोरापुट कॉफी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर खास पहचान मिली. समिट में शामिल अलग-अलग देशों के डेलीगेट्स और पत्रकारों को ओडिशा के आदिवासी किसानों द्वारा उगाई गई यह कॉफी उपहार के तौर पर दी गई. विदेश मंत्रालय की ओर से बांटी गई किट में कोरापुट कॉफी का ‘टाइगर ब्राइट’ ब्रांड शामिल था. हर किट में 250 ग्राम कॉफी का पैकेट दिया गया. इससे न केवल कोरापुट के स्थानीय उत्पाद को बड़े मंच पर पहचान मिली, बल्कि आदिवासी किसानों की मेहनत और उनकी खेती को भी दुनिया के सामने आने का मौका मिला.

‘वोकल फॉर लोकल’ को मिला बढ़ावा

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर कोरापुट कॉफी को जगह मिलने पर खुशी जताई. उन्होंने कहा कि इससे ओडिशा के स्थानीय उत्पादों को दुनिया के सामने पहचान दिलाने का मौका मिला है. उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान से भी जोड़ा. मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरापुट कॉफी के जरिए राज्य के आदिवासी किसानों की मेहनत और ओडिशा की जमीन की खासियत को वैश्विक मंच पर पहचान मिल रही है. उपमुख्यमंत्री प्रवति परिदा ने भी इसे राज्य के लिए गर्व का पल बताया.

इतने ऊंचाई पर उगाई जाती है ये कॉफी

कोरापुट कॉफी मुख्य रूप से ओडिशा के कोरापुट जिले के नंदापुर और मछकुंड इलाकों में उगाई जाती है. यहां कॉफी के बागान करीब 920 से 950 मीटर की ऊंचाई पर हैं. यह कॉफी मुख्य रूप से 100 प्रतिशत अरेबिका किस्म की है. खास बात यह है कि कॉफी के पौधे आम, कटहल और खट्टे फलों वाले पेड़ों की छाया में उगाए जाते हैं. कॉफी के फल पूरी तरह पकने के बाद उन्हें हाथ से तोड़ा जाता है.

किसानों से खरीदकर की जाती है प्रोसेसिंग

कॉफी की खरीद और उसकी आगे की पूरी प्रक्रिया में ट्राइबल डेवलपमेंट कोऑपरेटिव कॉरपोरेशन ऑफ ओडिशा लिमिटेड यानी TDCCOL की अहम भूमिका है. संस्था किसानों से कॉफी खरीदने के बाद उसे सुखाने, ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग और पैकिंग जैसी प्रक्रियाओं से गुजारती है. इसके बाद इसे बाजार में बेचा जाता है. ‘कोरापुट कॉफी’ ब्रांड को 11 सितंबर 2019 को लॉन्च किया गया था. इसका उद्देश्य आदिवासी किसानों की कॉफी के लिए एक बेहतर और व्यवस्थित बाजार तैयार करना और पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना था.

कॉफी की खरीद में बड़ा इजाफा

आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 सीजन में TDCCOL ने रिकॉर्ड 102.54 मीट्रिक टन कॉफी फल खरीदे, जबकि 2022-23 में यह मात्रा 34.68 मीट्रिक टन और 2024-25 में 34.41 मीट्रिक टन थी. कॉफी की खरीद बढ़ने से करीब 360 आदिवासी किसान परिवारों को फायदा हुआ है. इससे पता चलता है कि कोरापुट में कॉफी की खेती किसानों के लिए कमाई का बेहतर जरिया बनती जा रही है.

‘टाइगर ब्राइट’ है प्रीमियम अरेबिका कॉफी

कोरापुट कॉफी के ‘टाइगर ब्राइट’ ब्रांड को प्रीमियम अरेबिका कॉफी के तौर पर बाजार में बेचा जाता है. अधिकारियों के मुताबिक, इसका स्वाद ट्रॉपिकल सिट्रस के साथ कैरमेल, चॉकलेट और कोको जैसा हल्का स्वाद देता है. कॉफी के फलों को ऊंचे लकड़ी के बेड पर धूप में सुखाया जाता है. बाजार में पहुंचाने से पहले इसकी सफाई और प्रोसेसिंग के तय मानकों का भी ध्यान रखा जाता है. BRICS समिट में कोरापुट कॉफी की मौजूदगी से आदिवासी किसानों के इस स्थानीय उत्पाद को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिलने की उम्मीद बढ़ी है. (PTI)

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