
पंजाब के संगरूर जिले के दिड़बा विधानसभा क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है. वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के कार्यक्रम में नशे के मुद्दे पर सवाल उठाने वाले किसान गुलजार सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई. किसान ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ निगल लिया था, जिसके बाद उन्हें पहले स्थानीय अस्पताल और फिर लुधियाना के डीएमसी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां देर रात उन्होंने दम तोड़ दिया.
मृतक किसान के परिवार का आरोप है कि कार्यक्रम में मंत्री से ड्रग्स के कारोबार को लेकर सवाल पूछने के बाद गांव की पंचायत के कुछ लोगों ने उन पर माफी मांगने का दबाव बनाया. परिवार का दावा है कि इसी मानसिक तनाव के कारण गुलजार सिंह ने जहरीली चीज खा ली.
गुलजार सिंह ने कार्यक्रम के दौरान सवाल उठाते हुए कहा था कि सरकार नशा खत्म होने का दावा कर रही है, जबकि गांवों में खुलेआम नशा बिक रहा है और उनका बेटा भी इसकी गिरफ्त में है.
वहीं, दिड़बा की डीएसपी डॉ. रूपिंदर कौर बाजवा ने किसान की मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और आरोपों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
दूसरी ओर, गांव के सरपंच पक्ष ने सभी आरोपों को खारिज किया है. सरपंच बलजिंदर कौर सिद्धू के पति बलजीत सिंह का कहना है कि किसान को किसी तरह की धमकी नहीं दी गई थी. उन्होंने दावा किया कि कार्यक्रम में ड्रग्स के मुद्दे पर चर्चा हुई थी और पंचायत और मंत्री ने किसान को सहयोग का भरोसा दिया था.
इस घटना के बाद पंजाब की सियासत भी गरमा गई है. शिरोमणि अकाली दल, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी सरकार को निशाने पर लिया है. अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया, कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
हालांकि, पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. इसके बावजूद यह मामला पंजाब में नशे के खिलाफ राज्य सरकार के अभियान और उसकी प्रभावशीलता पर नई राजनीतिक बहस का कारण बन गया है.
इस मामले में राजनीति भी शुरू भी हो गई है. कांग्रेस पार्टी ने कहा, "उनकी (किसान) मौत राज्य में फैली ड्रग्स की समस्या की एक गंभीर याद दिलाती है, जिसे AAP पंजाब सरकार करोड़ों रुपये के विज्ञापनों के जरिए छिपाने की कोशिश करती है. लेकिन सच को ज्यादा देर तक छिपाया नहीं जा सकता. इस बेगुनाह आदमी की मौत का जिम्मा आपके सिर है."
शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने ड्रग्स के मुद्दे पर AAP सरकार से सवाल किया. "AAP सरकार ने इस बारे में कुछ क्यों नहीं किया?"
बीजेपी नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि संगरूर के उस व्यक्ति ने इस त्रासदी के लिए चीमा को जिम्मेदार ठहराया था.
बिट्टू ने कहा, "गुलजार सिंह ने अपने बेटे को बचाने की कोशिश में चीमा से ड्रग्स की समस्या के बारे में सवाल किया था. आरोप है कि उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया और मरने से पहले उन्होंने मंत्री को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया. भगवंत मान सरकार के दौर में पंजाब के हालात इतने बिगड़ गए हैं कि जवाब और अपने अधिकार मांगने वाले आम नागरिकों को कथित तौर पर मौत के कगार पर धकेला जा रहा है. चीमा को तुरंत मंत्रिपरिषद से हटाया जाना चाहिए और उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए."(विवेक धल का इनपुट)