
केंद्र सरकार ने 30 जुलाई से URS (कम-स्पेसिफिकेशन वाली) कैटेगरी के प्याज की खरीद बंद कर दी है. इस फैसले पर सरकार ने कहा कि अब सिर्फ A-ग्रेड प्याज ही 2,335 रुपये प्रति क्विंटल के संशोधित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदे जाएंगे. इस तरह सरकार अब ए ग्रेड प्याज की ही खरीद कर रही है. हालांकि, पिछले दो हफ्तों में हुई खरीद पर सवाल उठ रहे हैं. आरोप है कि URS कैटेगरी के तहत खराब क्वालिटी के प्याज A-ग्रेड की कीमतों पर खरीदे गए.
प्याज उगाने वाले किसानों के बीच ऐसी चर्चा है कि कुछ एजेंसियों, दूसरे राज्यों के व्यापारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से खराब क्वालिटी के प्याज खरीदे गए. प्याज निर्यातक प्रवीण कदम ने आरोप लगाया है कि NAFED और NCCF द्वारा की गई खरीद का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ कागजों पर ही था. इससे केंद्र सरकार के प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड (PSF) के तहत प्याज खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
केंद्र ने NAFED और NCCF को 25 मई से महाराष्ट्र में दो लाख टन प्याज खरीदने का काम सौंपा था. शुरू में, दोनों एजेंसियों ने अच्छी क्वालिटी के प्याज के साथ-साथ URS-ग्रेड के प्याज भी खरीदे, जिनमें छोटे आकार और थोड़े दाग-धब्बे वाले प्याज शामिल थे. हालांकि, 30 जुलाई से URS प्याज की खरीद अचानक रोक दी गई और सिर्फ A-ग्रेड प्याज की खरीद ही जारी रखी गई है.
किसान सवाल उठा रहे हैं कि URS खरीद रोकने का फ़ैसला तब क्यों लिया गया जब कथित तौर पर बड़ी मात्रा में खरीद हो चुकी थी. वे मांग कर रहे हैं कि सरकार पिछले 15 दिनों की खरीद का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करे, जिसमें खरीदी गई मात्रा, किसानों के नाम, ग्रेड के हिसाब से कीमत और स्टोरेज की जगहें शामिल हों.
किसानों का तर्क है कि उनकी उपज के लिए बाजार तक पहुंच और MSP सुनिश्चित करने के बजाय, सरकार ने बीच में ही खरीद के नियम बदल दिए, जबकि कथित तौर पर दूसरे राज्यों से खराब क्वालिटी के प्याज खरीद सिस्टम में आने दिए गए.
महाराष्ट्र राज्य प्याज़ उत्पादक संघ के अध्यक्ष भारत दिघोले ने इस मुद्दे पर विरोध जाहिर करते हुए कहा, "किसानों को उचित बाजार और पक्की कीमत देने के बजाय, सरकार ने खरीद के नियम बदल दिए और URS खरीद रोक दी, जबकि सरकारी योजना के तहत दूसरे राज्यों से खराब क्वालिटी के प्याज खरीदने की कोशिशें हो रही हैं. यह एक गंभीर विरोधाभास है."
इस पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए लासलगांव के प्याज निर्यातक प्रवीण कदम ने कहा, "NAFED और NCCF द्वारा की गई खरीद की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि किसानों से असल में कितना प्याज खरीदा गया और कितना दूसरे राज्यों से मंगाया गया."