
हरियाणा में धान की सरकारी खरीद 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली है. प्रदेश के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने इसकी घोषणा की है. सरकार के इस फैसले के बाद किसानों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. किसानों का कहना है कि कई इलाकों में धान की फसल समय से पहले पककर तैयार हो गई है और मंडियों में आवक भी शुरू हो चुकी है. ऐसे में सरकारी खरीद 1 अक्टूबर तक रोकने से किसानों को परेशानी हो सकती है.
किसानों का कहना है कि धान की जल्दी पकने वाली किस्मों की कटाई शुरू हो चुकी है. अगर किसान फसल काटकर मंडी में लाता है तो उसे कई दिनों तक अपनी फसल संभालकर रखने की समस्या होगी. किसानों का आरोप है कि सरकारी खरीद में देरी होने से मंडियों में फसल की आवक बढ़ सकती है और इसका असर धान के बाजार भाव पर पड़ सकता है.
करनाल समेत हरियाणा और आसपास की कई अनाज मंडियों में 1509 किस्म के धान की आवक तेज हो गई है. किसानों को इस किस्म के धान के लिए फिलहाल करीब 3500 से 4100 रुपये प्रति क्विंटल तक के भाव मिल रहे हैं. अच्छे भाव मिलने से 1509 धान उगाने वाले कई किसान इस बार खुश नजर आ रहे हैं. मंडियों में पहुंच रही इस फसल की खरीद भी साथ-साथ हो रही है. हालांकि किसानों का कहना है कि 1509 धान के भाव में पिछले कुछ दिनों में गिरावट भी देखने को मिली है. कुछ दिन पहले जहां किसानों को 4000 रुपये से ज्यादा का भाव मिल रहा था, वहीं अब कई जगहों पर यह भाव 3800 से 3900 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास पहुंच गया है.
करनाल की अनाज मंडी में 1509 धान लेकर पहुंचे किसान सतीश कुमार ने बताया कि उन्हें इस साल पिछले साल के मुकाबले बेहतर भाव मिल रहे हैं. उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले उनकी 1509 धान की फसल 4000 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा के भाव पर बिकी, लेकिन पिछले एक-दो दिनों में भाव करीब 3800 से 3900 रुपये प्रति क्विंटल तक रहा है. किसान सतीश कुमार ने बताया कि वह करीब 150 एकड़ जमीन पर खेती कर रहे हैं और पिछले 20 से 25 साल से खेती से जुड़े हैं. उनके मुताबिक इस साल बारिश कम होने की वजह से फसल का उत्पादन कुछ कम हुआ है, लेकिन 1509 धान के अच्छे भाव से किसानों को राहत मिली है.
उन्होंने सरकारी खरीद की तारीख को लेकर कहा कि सरकार को धान की खरीद 1 अक्टूबर के बजाय 15 सितंबर के आसपास ही शुरू कर देनी चाहिए थी. किसान के मुताबिक 15 जून के आसपास धान की रोपाई होती है और करीब तीन महीने में जल्दी पकने वाली किस्म तैयार हो जाती है. ऐसे में फसल पकने के बाद किसान उसे लंबे समय तक खेत में नहीं रोक सकता.
किसानों का कहना है कि जब धान पूरी तरह पक जाता है तो उसे ज्यादा दिनों तक खेत में खड़ा रखना मुश्किल होता है. मौसम खराब होने पर फसल को नुकसान हो सकता है. वहीं कटाई के बाद भी किसानों के सामने फसल को सुरक्षित रखने की समस्या रहती है. सतीश कुमार ने कहा कि किसान के पास अपनी फसल को 15 दिन तक सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होती. उनका आरोप है कि अगर मंडियों में एक साथ ज्यादा फसल पहुंचती है और सरकारी खरीद शुरू नहीं होती, तो किसानों को अपनी फसल कम भाव पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.
मंडी में धान लेकर पहुंचे किसान हवा सिंह ने भी कहा कि इस साल 1509 धान के भाव पिछले साल के मुकाबले बेहतर हैं. उनके मुताबिक पिछले साल किसानों को मंडी में कम भाव मिलने से नुकसान हुआ था, लेकिन इस बार स्थिति कुछ बेहतर है. हवा सिंह ने कहा कि सरकार को 1 अक्टूबर से पहले ही धान की सरकारी खरीद शुरू करनी चाहिए, ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े. उन्होंने कहा कि किसान इस समय अपनी पकी हुई फसल लेकर मंडी पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं. सरकारी खरीद में जितनी देरी होगी, किसानों को उतनी ही परेशानी हो सकती है.
उन्होंने बताया कि करनाल मंडी में आम तौर पर किसानों के लिए खरीद के दौरान अच्छी व्यवस्थाएं रहती हैं, लेकिन सरकारी खरीद की तारीख पहले करने से किसानों को और राहत मिल सकती है.
किसान राजपाल सिंह ने बताया कि करीब 8 से 10 दिन पहले 1509 धान का भाव लगभग 4200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया था. लेकिन अब इसके भाव में करीब 300 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई है. उनके मुताबिक अभी व्यापारियों की ओर से 1509 धान करीब 3900 रुपये के आसपास खरीदा जा रहा है. राजपाल सिंह ने आगे कहा कि अब किसानों को पीआर किस्म के धान की सरकारी खरीद का इंतजार है. उन्होंने सरकार से मांग की कि खरीद के दौरान धान में नमी की तय सीमा को लेकर किसानों को राहत दी जाए. किसान का कहना है कि बारिश के कारण धान में नमी ज्यादा हो सकती है और किसान के लिए खेत से निकलने के बाद नमी को तुरंत कम करना हमेशा संभव नहीं होता.
किसान ने सरकार से यह भी मांग की कि पीआर धान का उचित भाव मिले, क्योंकि इसकी खेती में किसानों की लागत और मेहनत काफी अधिक होती है. उनके मुताबिक खरीद के नियम ऐसे होने चाहिए जिससे किसानों को मंडियों में फसल बेचते समय परेशानी का सामना न करना पड़े.
धान की सरकारी खरीद 1 अक्टूबर से शुरू करने के फैसले को लेकर किसान संगठनों की ओर से भी आपत्ति जताई जा रही है. भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रत्न मान ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब खेतों में धान पककर तैयार हो चुका है और मंडियों में आवक शुरू हो गई है, तो सरकारी खरीद के लिए 1 अक्टूबर तक इंतजार क्यों किया जा रहा है. रत्न मान ने कहा कि सरकार की ओर से किसानों को जल्दी पकने वाली किस्मों के बीज उपलब्ध कराए जाते हैं, लेकिन जब फसल तैयार हो जाती है तो उसकी खरीद में देरी की जाती है. किसान नेता के मुताबिक इससे किसानों के सामने फसल को रखने और उचित भाव पर बेचने की समस्या खड़ी हो सकती है.
रत्न मान ने कहा कि किसान अपनी पकी हुई धान की फसल को लंबे समय तक खेत में नहीं रख सकता. वहीं कटाई के बाद हर किसान के पास इतना बड़ा गोदाम भी नहीं होता, जहां वह कई दिनों तक अपनी फसल सुरक्षित रख सके. उन्होंने कहा कि मंडियों में जो धान अभी पहुंच रहा है, अगर उसकी सरकारी खरीद नहीं होती है तो किसानों को अपनी फसल निजी खरीदारों को बेचनी पड़ सकती है. किसान संगठन का कहना है कि इससे किसानों को सरकारी समर्थन मूल्य का पूरा लाभ मिलने में परेशानी हो सकती है.
किसान नेता रत्न मान ने सरकार से मांग की है कि धान की सरकारी खरीद की तारीख पर दोबारा विचार किया जाए और जिन किस्मों की फसल पककर मंडियों में पहुंच रही है, उनकी खरीद जल्द शुरू की जाए. उन्होंने कहा कि किसानों में इस फैसले को लेकर नाराजगी बढ़ रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने इस फैसले पर ध्यान नहीं दिया तो किसान संगठन आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं. उन्होंने मंडियों और सड़कों पर विरोध प्रदर्शन तथा अधिकारियों के घेराव की बात भी कही है.
फिलहाल हरियाणा में धान की सरकारी खरीद 1 अक्टूबर से शुरू करने की घोषणा हो चुकी है, जबकि किसान और किसान संगठन इसे पहले शुरू करने की मांग कर रहे हैं. दूसरी ओर, मंडियों में 1509 धान की आवक लगातार बढ़ रही है और किसानों को इस किस्म के लिए बाजार में 3500 से 4100 रुपये प्रति क्विंटल तक के भाव मिल रहे हैं. अब किसानों की नजर सरकार के अगले कदम पर है.
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