
हरियाणा की अनाज मंडियों में धान की नई फसल पहुंचनी शुरू हो गई है. खेतों में फसल पककर तैयार होने के बाद किसान बड़ी मात्रा में मंडियों का रुख कर रहे हैं, लेकिन सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. किसानों का कहना है कि मंडियों में फसल पहुंचने के बावजूद खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ भंडारण और मौसम की मार का भी खतरा झेलना पड़ रहा है.
अंबाला कैंट की अनाज मंडी में इन दिनों धान के ढेर दिखाई दे रहे हैं. किसान अपनी फसल लेकर पिछले कई दिनों से मंडी में डेरा डाले हुए हैं. किसानों का कहना है कि मंडियों में फसल आने के साथ ही सरकारी खरीद शुरू होनी चाहिए, लेकिन इस बार खरीद में देरी हो रही है. इसके चलते उनकी फसल खुले में पड़ी है और खराब मौसम के कारण नुकसान का खतरा बढ़ गया है.
कई किसानों ने बताया कि वे चार से पांच दिनों से मंडी में अपनी उपज के साथ बैठे हैं. इस दौरान उन्हें न केवल अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है बल्कि कृषि कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं. किसानों का कहना है कि धान बेचने के बाद उन्हें आलू समेत अन्य रबी फसलों की तैयारी करनी है, लेकिन ट्रैक्टर और मजदूर मंडी में फंसे होने के कारण खेतों का काम प्रभावित हो रहा है.
किसानों के मुताबिक हाल ही में हुई बारिश ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है. दो दिन पहले हुई तेज बारिश के कारण कई किसानों की फसल भीग गई थी. उनका कहना है कि अधिकांश किसानों के पास घरों पर इतनी जगह नहीं होती कि वे बड़ी मात्रा में धान को सुरक्षित रख सकें. ऐसे में फसल को मंडी में लाना उनकी मजबूरी होती है. अगर खरीद में देरी होती है और बारिश आ जाती है तो फसल की क्वालिटी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है.
किसानों का आरोप है कि हर साल खरीद की तारीखें तय होने के बावजूद फसल पहले तैयार हो जाती है. ऐसे में उन्हें मजबूरन निजी व्यापारियों को कम कीमत पर धान बेचने की नौबत आ जाती है. किसानों ने मांग की है कि सरकार एक अक्टूबर का इंतजार किए बिना तुरंत खरीद शुरू करे.
अंबाला कैंट अनाज मंडी के सचिव के अनुसार धान की आवक लगातार बढ़ रही है और अब तक करीब 10 हजार क्विंटल धान मंडी में पहुंच चुका है. उन्होंने बताया कि सरकारी खरीद भले अभी शुरू नहीं हुई हो, लेकिन विभाग की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.
मंडी प्रशासन के मुताबिक किसानों के लिए पीने के स्वच्छ पानी, रोशनी और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई है. किसान मजदूर अटल कैंटीन के माध्यम से किसानों और श्रमिकों को सस्ती दर पर भोजन भी उपलब्ध कराया जा रहा है. अधिकारियों ने बताया कि आढ़तियों को मॉइश्चर मीटर तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि धान में नमी की जांच की जा सके.
मंडी सचिव ने कहा कि बारिश की स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त मात्रा में तिरपाल और पॉलिथीन की व्यवस्था भी की गई है, जिससे किसानों की फसल को सुरक्षित रखा जा सके. उन्होंने बताया कि मंडी में आने वाली प्रत्येक खेप का रिकॉर्ड दर्ज किया जा रहा है और खरीद शुरू होते ही किसानों को औपचारिक प्रक्रिया पूरी करानी होगी.
उधर करनाल और आसपास की मंडियों में भी धान की 1509 वैरायटी की आवक तेज हो गई है. किसानों को इस वैरायटी का अच्छा भाव मिल रहा है. मंडियों में 1509 धान का भाव लगभग 3,500 से 4,100 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है.
करनाल की अनाज मंडी में फसल बेचने पहुंचे किसान सतीश कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 1509 धान की कीमत बेहतर मिल रही है. उन्होंने कहा कि कुछ दिनों पहले उन्हें 4,000 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक का भाव मिला था, हालांकि हाल के दिनों में कीमतें घटकर 3,800 से 3,900 रुपये प्रति क्विंटल तक आ गई हैं.
किसान का कहना है कि इस बार मॉनसून कमजोर रहने से फसल का झाड़ अपेक्षा से कम रहा है, लेकिन अच्छे बाजार भाव के कारण कुछ हद तक राहत मिल रही है.
हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि राज्य में पीआर धान की सरकारी खरीद 1 अक्टूबर से शुरू की जाएगी. हालांकि किसान संगठनों और किसानों का एक वर्ग इस फैसले से संतुष्ट नहीं है. उनका मानना है कि जब फसल सितंबर के मध्य तक तैयार होकर मंडियों में पहुंचने लगती है तो खरीद भी उसी समय शुरू होनी चाहिए.
किसानों का कहना है कि खरीद में देरी से उन्हें भंडारण, परिवहन और मौसम संबंधी जोखिम उठाने पड़ते हैं. साथ ही बाजार में अधिक आवक होने पर भाव दबने की आशंका भी बनी रहती है. ऐसे में किसानों ने सरकार से खरीद प्रक्रिया जल्द शुरू कर राहत देने की मांग की है.
फिलहाल धान की आवक लगातार बढ़ रही है और आने वाले दिनों में मंडियों पर दबाव और बढ़ सकता है. अब किसानों की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है कि क्या खरीद निर्धारित तिथि से पहले शुरू की जाती है या उन्हें 1 अक्टूबर तक इंतजार करना पड़ेगा.(करनाल से कमलदीप का इनपुट)