
देश की प्रमुख कृषि उपज मंडियों में प्याज की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. सितंबर 2026 के राज्यवार थोक मूल्य आंकड़ों के अनुसार प्याज का औसत थोक भाव बढ़कर 4,249 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया है. अगस्त 2026 में यह औसत 3,235 रुपये प्रति क्विंटल था. यानी मात्र एक महीने में कीमतों में 31.3 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है. वहीं सितंबर 2025 के औसत 1,837 रुपये प्रति क्विंटल की तुलना में कीमतें 131.3 फीसदी ऊपर पहुंच गई हैं.
प्याज की कीमतों में यह तेजी ऐसे समय आई है जब कई राज्यों में मौसम संबंधी चुनौतियों, सप्लाई की कमी और भंडारण संबंधी समस्याओं का असर बाजार पर दिखाई दे रहा है. हालांकि बढ़ते भावों के बावजूद किसानों का कहना है कि बाजार में बढ़ती कीमतों का पूरा फायदा उन्हें नहीं मिल रहा है.
राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश में प्याज के थोक भाव में सबसे अधिक 50.7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यहां सितंबर में औसत कीमत 2,923 रुपये प्रति क्विंटल रही, जबकि अगस्त में यह 1,940 रुपये थी.
इसके अलावा गुजरात में 51.4 फीसदी, चंडीगढ़ में 47.5 फीसदी, छत्तीसगढ़ में 46.4 फीसदी, पंजाब में 46.3 फीसदी और तेलंगाना में 42.4 फीसदी की मासिक वृद्धि दर्ज की गई. राजस्थान, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर जैसे प्रमुख उपभोक्ता राज्यों में भी कीमतों में 40 फीसदी से अधिक की तेजी देखने को मिली.
सितंबर 2026 में सबसे अधिक थोक भाव मेघालय में 6,117 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. इसके बाद मणिपुर में 6,044 रुपये, केरल में 6,072 रुपये और तमिलनाडु में 5,807 रुपये प्रति क्विंटल का भाव रहा.
जम्मू-कश्मीर में प्याज 5,338 रुपये, असम में 5,022 रुपये और अंडमान-निकोबार में करीब 5,000 रुपये प्रति क्विंटल बिकता रहा. इन राज्यों में परिवहन लागत और सीमित स्थानीय उत्पादन भी ऊंची कीमतों का प्रमुख कारण माना जा रहा है.
देश का प्रमुख प्याज उत्पादक राज्य महाराष्ट्र भी कीमतों की तेजी से अछूता नहीं रहा. राज्य में सितंबर के दौरान औसत थोक भाव 3,950 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया, जो अगस्त के मुकाबले 41.6 फीसदी अधिक है. मध्य प्रदेश में भाव 3,039 रुपये, कर्नाटक में 4,126 रुपये और गुजरात में लगभग 3,996 रुपये प्रति क्विंटल रहे.
विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ प्याज की नई आवक अपेक्षा से धीमी होने और कुछ क्षेत्रों में मौसम की अनिश्चितता के कारण बाजार में सप्लाई दबाव बना हुआ है.
प्याज की बढ़ती कीमतों से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है. खुदरा बाजार में भी थोक भाव का असर दिखाई देने लगा है. कई शहरों में प्याज की खुदरा कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं.
हालांकि किसानों का कहना है कि बढ़े हुए बाजार भाव का लाभ हर किसान तक नहीं पहुंच रहा. कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक किसानों की आय केवल बाजार मूल्य पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उत्पादन लागत, परिवहन खर्च, भंडारण क्षमता और बिचौलियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है. यही वजह है कि मंडियों में भाव बढ़ने के बावजूद बड़ी संख्या में किसानों की वास्तविक आय में उचित सुधार नहीं हो रहा.
त्योहारी सीजन के नजदीक आने और मांग बढ़ने के साथ प्याज बाजार पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं. यदि नई फसल की आवक तेज नहीं हुई और आपूर्ति दबाव बना रहा तो आने वाले हफ्तों में कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. दूसरी ओर, बेहतर आवक होने पर बाजार को कुछ राहत मिल सकती है.
फिलहाल सितंबर 2026 के आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि प्याज एक बार फिर देश की महंगाई और कृषि बाजार दोनों के केंद्र में आ गया है. किसानों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं तीनों के लिए आने वाले सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं.