
प्याज की बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है. उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे ने बुधवार को कहा कि पिछले नौ दिनों में मंडियों में प्याज के थोक भाव में 9 फीसदी की गिरावट आई है. थोक कीमतों में कमी का असर आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में भी दिखाई दे सकता है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को देश में प्याज का औसत खुदरा भाव 53.92 रुपये प्रति किलोग्राम रहा. यह कीमत एक महीने पहले के मुकाबले 48 फीसदी और पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 94 फीसदी अधिक है. ऐसे में बीते 9 दिनों के दौरान थोक भाव में आई गिरावट से उपभोक्ताओं को आगे चलकर राहत मिलने की उम्मीद है.
उपभोक्ता मामले सचिव निधि खरे ने उद्योग संगठन पीएचडीसीसीआई के एक कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बातचीत में प्याज की कीमतों और उपलब्धता पर जानकारी दी. उन्होंने कहा कि देश में प्याज की कोई कमी नहीं है. सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार कदम उठा रही है कि प्याज उपभोक्ताओं तक उचित कीमत पर पहुंचे. उन्होंने उम्मीद जताई कि इसका सकारात्मक असर खुदरा कीमतों पर भी पड़ेगा और आने वाले दिनों में खुदरा भाव कम हो सकते हैं.
प्याज की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने पिछले महीने 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से प्याज की बिक्री शुरू की थी. यह प्याज बाजार भाव से कम कीमत पर राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (एनसीसीएफ), भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नाफेड) और केंद्रीय भंडार के खुदरा केंद्रों पर उपलब्ध कराया जा रहा है. इसके अलावा मोबाइल वैन के जरिए भी लोगों तक प्याज पहुंचाया जा रहा है. सरकारी खुदरा बिक्री के जरिए अब तक देश के करीब 48 शहरों तक प्याज पहुंचाया जा चुका है. इसके लिए सड़क परिवहन और अन्य परिवहन माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
सरकार ने प्याज की उपलब्धता बनाए रखने और मौसमी कीमतों में बढ़ोतरी को नियंत्रित करने के लिए बफर स्टॉक से चरणबद्ध तरीके से प्याज बाजार में उतारना शुरू किया है. इसके लिए रेलवे रैक और सड़क परिवहन, दोनों का इस्तेमाल किया जा रहा है. रेलवे के जरिए प्याज भेजने की व्यवस्था को ‘कांदा एक्सप्रेस’ नाम दिया गया है. मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत रखे गए प्याज के स्टॉक की बिक्री 24 अगस्त से नाफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से शुरू की गई थी. सरकार के अनुसार, इस कदम से बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिली है.
केंद्र सरकार ने चालू वर्ष के लिए 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक रखा है. इस भंडार का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार बाजार में प्याज की आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों में अचानक होने वाली बढ़ोतरी को नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में देश में प्याज का उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है. पिछले वर्ष 2024-25 में उत्पादन 307.67 लाख टन था. इस तरह उत्पादन में करीब 0.30 लाख टन की मामूली कमी आई है.
प्याज की कीमतों में आम तौर पर अगस्त से सितंबर के बीच मौसमी तेजी देखी जाती है. इस दौरान त्योहारों की मांग, मौसम में बदलाव, बारिश से आपूर्ति पर असर और परिवहन व्यवस्था में बदलाव जैसे कारण कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं. हालांकि, थोक भाव में हालिया गिरावट से आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में भी कीमतों के नरम पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है. (पीटीआई)