Soyabean Price: पिछले साल से बेहतर हुआ सोयाबीन का रेट, लेकिन अब भी MSP से दूर, किसानों को कब मिलेगा सही भाव?

Soyabean Price: पिछले साल से बेहतर हुआ सोयाबीन का रेट, लेकिन अब भी MSP से दूर, किसानों को कब मिलेगा सही भाव?

Soyabean Mandi Bhav: देशभर में किसानों को एक बार फिर एमएसपी से नीचे सोयाबीन बेचनी पड़ रही है. ज्‍यादातर राज्‍यों में कीमतें एमएसपी से काफी नीचे हैं. जानिए नवंबर और दिसंबर 2025 में किसानों को सोयाबीन का क्‍या भाव और अब जनवरी में क्‍या हाल है...

Soybean Mandi RateSoybean Mandi Rate
प्रतीक जैन
  • Noida,
  • Jan 10, 2026,
  • Updated Jan 10, 2026, 4:57 PM IST

देश के सोयाबीन किसान एक बार फिर न्‍यूनतम समर्थन मूलय (MSP) नहीं मिलने से परेशान हैं. भले ही इस बार सोयाबीन की औसत कीमत पिछले साल से बेहतर है, लेकिन यह लागत और मेहनत के लिहाज से अपर्याप्‍त है. जनवरी में भी किसानों को मंडियों में एमएसपी लाभ हासि‍ल नहीं हो रहा है. कुछ मंडियों में न्‍यूनतम कीमतें 1000 रुपये प्रति क्विंटल तो कहीं 1500 तो कहीं-कहीं 2000 से 2500 के बीच दर्ज की जा रही हैं. वहीं, मॉडल रेट भी एमएसपी से नीचे चल रहे हैं. 

नवंबर और दिसंबर में इतना रहा औसत भाव

सरकारी पोर्टल- एगमार्कनेट पर उपलब्‍ध प्राइस ट्रेंड के आंकड़ाें के मुताबिक, देशभर में नवंबर 2025 में सोयाबीन का थोक औसत भाव 4707.23 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया और दिसंबर 2025 में यह औसत 4,789.18 दर्ज किया गया. अगर इसमें से दो राज्‍यों तमिलनाडु और मणिपुर के असमान्‍य रूप से ऊंचे भाव को छोड़ दें तो यह औसत और भी नीचे पहुंच रहा है.  यह करीब 4,250 रुपये प्रति क्विंटल रह जाता है, जो MSP 5,328 रुपये प्रति क्विंटल से सीधे तौर पर 1,000 से 1,100 रुपये कम है.

प्रमुख सोयाबीन उत्‍पादक राज्‍यों में क्‍या रहा हाल?

आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश जैसे कोर सोयाबीन उत्पादक राज्यों में दिसंबर 2025 के भाव 4,300 रुपये से 4,600 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहे. मध्य प्रदेश में औसत भाव 4,300 रुपये, महाराष्ट्र में 4,383 रुपये और राजस्थान में 4,466 रुपये क्विंटल दर्ज किया गया. ये सभी भाव MSP से 15 से 20 प्रतिशत नीचे हैं.

नवंबर के मुकाबले दिसंबर में बढ़ी कीमतें

वहीं, नवंबर 2025 से दिसंबर 2025 के बीच कीमतों में कुछ राज्यों में हल्की तेजी जरूर दिखी. कर्नाटक, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में 1 से 5 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज हुई. लेकिन यह तेजी MSP के स्तर तक पहुंचने के लिए नाकाफी रही. बाजार में सुधार के बावजूद किसानों को समर्थन मूल्य का फायदा नहीं मिल पाया.

मालूम हो कि सोयाबीन देश को खाद्य तेल के उत्‍पादन के लिहाज से अहम फसल है और खरीफ सीजन 2025 में किसानों ने खरीफ सीजन 2024 के मुकाबले बुवाई से दूरी बनाई, जिसके चलते इसके रकबे और उत्‍पादन में गिरावट का अनुमान है. इस बीच कई राज्‍यों में फसलों को बारिश और रोग-कीटों से भी नुकसान पहुंचा था.

मध्‍य प्रदेश में भावांतर योजना से मिली राहत

मध्‍य प्रदेश में इस स्थि‍ति को देखते हुए सरकार ने किसानों को मुआवजा दिया. साथ ही राज्‍यभर में सोयाबीन पर भावांतर योजना लागू की और किसानों को मॉडल रेट और एमएसपी की अंतर राशि उनके खाते में भेजी. हालांकि, कई जगहों पर भावांतर से भी नाखुश दिखाई दिए और सीधे तौर पर एमएसपी की मांग उठाई.

महाराष्‍ट्र में 6000 रुपये क्विंटल का वादा अधूरा

वहीं, महाराष्‍ट्र में महायुति सरकार का किसानों को सोयाबीन पर 6000 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी का वादा अभी भी अधूरा है. यहां भी किसान वर्तमान एमएसपी से भी वंचति हैं. ऐसे में आने वाले खरीफ सीजन में सोयाबीन की बुवाई पर और असर पड़ने की आशंका है. इसके अलावा मौसम विभाग ने अल-नीनो की स्थित‍ि रहने का पूर्वानुमान जारी किया है, जिसके चलते इस मॉनसून सीजन के दौरान कम बारिश हो सकती है, जिससे ओवरऑल खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है.

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