
कोच्चि चाय नीलामी में इस हफ्ते दामों का मिजाज सख्त रहा और लिमिटेड सप्लाई के मुकाबले मजबूत मांग ने बाजार को सहारा दिया. 8वीं सेल के दौरान प्रीमियम ऑर्थोडॉक्स लीफ ग्रेड में 5 से 10 रुपये प्रति किलो तक की बढ़त दर्ज की गई, जबकि CTC डस्ट के भाव ऊंचे स्तर पर टिके रहे. कीमतें चढ़ने के बावजूद नीलामी में उठाव अच्छा रहा और बेहतर गुणवत्ता वाली खेप घरेलू ब्लेंडरों और निर्यातकों ने तुरंत खरीद ली.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, टी ट्रेड एसोसिएशन ऑफ कोच्चि (Tea Trade Association of Cochin) के चेयरमैन अनिल जॉर्ज ने कहा कि बाजार की मजबूती के पीछे आवक में कमी, देश में स्थिर खपत और CIS और मिडिल ईस्ट के खरीदारों की दोबारा सक्रियता बड़ी वजह है. खासतौर पर ऑर्थोडॉक्स चाय के लिए इन बाजारों से मांग में सुधार दिखा. केरल में बेहतर आर्थिक गतिविधियां, स्थानीय खरीदारों की आक्रामक बोली और सप्लाई चेन का दबाव भी दामों को थामे हुए है.
उन्होंने कहा कि कीमतों में आई यह तेजी दक्षिण भारत के चाय उत्पादकों के लिए राहत लेकर आई है. मजदूरी और उर्वरक जैसे इनपुट खर्च लगातार बढ़ रहे हैं. ऐसे में बेहतर दाम लागत का कुछ बोझ कम करने में मदद करेंगे, बशर्ते उत्पादन पर्याप्त बना रहे. अगर मांग-आपूर्ति का यह अंतर आगे भी कायम रहता है तो महीने के अंत तक भाव मजबूत बने रहने की संभावना है.
नीलामी एजेंसी Forbes, Ewart & Figgis के अनुसार CTC डस्ट सेगमेंट में 6,33,184 किलो की पेशकश के मुकाबले 94 प्रतिशत बिक्री हुई. कुल बिके माल का करीब 66 प्रतिशत हिस्सा ब्लेंडरों ने उठाया. वहीं, ऑर्थोडॉक्स डस्ट बाजार भी मजबूत रहा, जहां 11,500 किलो की पेशकश पर 95 प्रतिशत बिक्री दर्ज की गई और ज्यादातर माल अपकंट्री खरीदारों और निर्यातकों ने खरीदा.
ऑर्थोडॉक्स लीफ सेगमेंट में 1,90,432 किलो की पेशकश के सामने 98 प्रतिशत तक उठाव देखने को मिला. CIS और मिडिल ईस्ट के खरीदारों की सक्रिय भागीदारी ने इस सेगमेंट में बाजार को खासा सहारा दिया और कोच्चि नीलामी में दामों की मजबूती को पुख्ता किया.
इधर, बीते दिनों कुन्नूर की चाय नीलामी में ठंड और पाले के चलते पेशकश कम रही. शुरुआती सुबह तापमान में तेज गिरावट से चाय की कोमल पत्तियां प्रभावित हुईं, जिससे नई फ्लश की बढ़वार धीमी पड़ गई. नीलगिरी में हरी पत्तियों की आवक घटने से कुल उत्पादन और फैक्ट्रियों से चाय की आवाजाही भी कम हुई. नीलामी में CTC लीफ की पेशकश करीब 7.75 लाख किलो रही, जिसमें लगभग 88 प्रतिशत बिक्री हुई, जबकि डस्ट ग्रेड में 2.24 लाख किलो की आवक पर करीब 89 प्रतिशत बिक्री दर्ज की गई.