
केंद्र सरकार ने सोमवार को प्याज को लेकर एक अहम फैसला लिया. इस फैसले के अंतर्गत डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने एक सर्कुलर जारी किया है. इसके मुताबिक, प्याज एक्सपोर्ट कंसेशन (RoDTEP) में पचास परसेंट की कटौती की गई है. जानकारों की मानें तो इस फैसले से प्याज उगाने वाले किसानों को भारी नुकसान होगा. किसान तो वैसे भी नुकसान में चल रहे थे, लेकिन हालिया कदम और गहरे घाटे में डालेगा.
सरकार के इस फैसले से भारतीय प्याज इंटरनेशनल मार्केट में कम कॉम्पिटिटिव (निर्यात में गिरावट) हो जाएगा. ये कंसेशन एक्सपोर्ट में अहम भूमिका निभाते हैं. नतीजतन, प्याज की कीमतों में तेजी से गिरावट आएगी. इसका प्याज उगाने वाले किसानों पर बड़ा असर पड़ेगा.
दरअसल, यह एक्सपोर्ट कंसेशन वही मुद्दा है जिसे लेकर कुछ महीने पहले महाराष्ट्र के सांसदों ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री और कृषि मंत्री से गुहार लगाई थी. गुहार में मांग की गई थी कि सरकार RoDTEP यानी एक्सपोर्ट कंसेशन को बढ़ाए. लेकिन सरकार का ताजा फैसला इसके विपरीत है. सरकार ने कंसेशन को बढ़ाने के बजाय 50 फीसद तक घटा दिया है. यह रोडटेप कंसेशन पहले 1.9 फीसद होता था जिसे घटाकर 0.95 फीसद कर दिया गया है. इससे प्याज एक्सपोर्ट पर मिलने वाली सब्सिडी अब आधी हो जाएगी. जानकारों का कहना है कि रोडटेप घटने से प्याज का निर्यात गिरेगा और किसानों को नुकसान होगा.
नासिक के सांसद राजाभाऊ (पराग) प्रकाश वाजे ने केंद्र सरकार को पिछले साल जुलाई महीने में ही आगाह कर दिया था कि आगामी सीजन में भारी आवक से प्याज के दामों में गिरावट आएगी, जिससे किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान होगा. सांसद वाजे ने जुलाई 2025 के अंत में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर प्याज निर्यात को बढ़ावा देने के लिए तात्कालिक राहत उपायों की मांग की थी.
दाम में गिरावट की स्थिति से निपटने के लिए सांसद ने सरकार से दो प्रमुख मांगें की थीं. पहली, प्याज निर्यात पर मिलने वाली सब्सिडी (RoDTEP) को बढ़ाकर 5 प्रतिशत किया जाए. दूसरी, प्याज निर्यात पर ट्रांसपोर्ट और मार्केटिंग सहायता (TMA) योजना के तहत 7 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाए, ताकि ट्रांसपोर्टेशन की लागत कम हो और भारतीय प्याज अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बन सके.
किसानों को उम्मीद थी कि प्याज की गिरती कीमतों को थामने के लिए सरकार कोई बड़ा कदम उठाएगी. लेकिन सरकार ने रोडटेप बढ़ाने के बजाय उसे आधा कर दिया है. इस बारे में नासिक के बड़े प्याज किसान और जय किसान फार्मर्स फोरम, महाराष्ट्र के विभागीय अध्यक्ष निवृत्ती न्याहारकर ने कहा, हमने रेडटेप को मौजूदा 1.9 परसेंट से बढ़ाकर 4 परसेंट करने की मांग की थी और प्रेजेंटेशन भी दिया था. लेकिन आज (सोमवार) सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर सभी खेती और समुद्री एक्सपोर्ट के सामान के लिए रोडटेप को आधा कर दिया है. हम सरकार से प्याज के रोडटेप पर फिर से सोचने का अनुरोध कर रहे हैं क्योंकि हमें गर्मियों के प्याज के मौसम में फिर से बंपर फसल की उम्मीद है.
न्याहारकर ने कहा कि नासिक में प्याज के भाव 1000 रुपये क्विंटल तक आ गए हैं. तीन रुपये से लेकर अधिकतम 10 रुपये किलो का भाव चल रहा है. प्याज किसान को 10 रुपये किलो से अधिक रेट नहीं मिल रहा है जबकि उत्पादन खर्च 30 रुपये है. सरकार ने एक्सपोर्ट कंसेशन को आधा कर दिया है जिससे प्याज का निर्यात भी आधा हो जाएगा. इससे रेट और तेजी से गिरेंगे. उन्होंने बताया कि विदेशी मार्केट में भारत का प्याज कम खरीदा जा रहा है. एक्सपोर्ट कंसेशन घटने के बाद स्थिति और भी खराब होगी.
न्याहारकर ने बताया कि मंडी में आने वाला प्याज विदेशों में कम निर्यात होगा जिससे किसानों को सीधा नुकसान होगा. चार-पांच दिन बाद इसका बड़ा असर दिखेगा क्योंकि एक तरफ एक्सपोर्ट घटेगा जबकि दूसरी ओर मंडियों में नई फसल की आवक बढ़ेगी. लिहाजा, लेट खरीफ प्याज की कीमतों पर बड़ा संकट आने वाला है.
ताजा भाव की बात करें तो सोमवार को, लासलगांव APMC में प्याज की औसत होलसेल कीमत 1,100 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई. प्याज की कम से कम और ज्यादा से ज्यादा थोक कीमतें क्रमशः 500 रुपये और 1,372 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गईं. सोमवार को लासलगांव APMC में करीब 30,814 क्विंटल प्याज की नीलामी हुई.