Holi 2026: गाजर-गुलाब से बना अनोखा गुलाल, गाल पर भी लगाएं, हलवे में भी खाएं

Holi 2026: गाजर-गुलाब से बना अनोखा गुलाल, गाल पर भी लगाएं, हलवे में भी खाएं

ये सुगंधित और खास गुलाल लोगों को रिलैक्स महसूस कराने में मदद कर सकता है. खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए इसे त्वचा के अनुकूल और रसायन मुक्त है. वहीं, इस बार हर्बल और अरोमा गुलाल की मांग तेजी से बढ़ रही है.

गाजर-गुलाब से बना अनोखा गुलालगाजर-गुलाब से बना अनोखा गुलाल
क‍िसान तक
  • Bhagalpur,
  • Feb 27, 2026,
  • Updated Feb 27, 2026, 8:09 AM IST

होली, रंगों का त्योहार, पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और खुशियों में रंगीन होते हैं. इस दिन लोग कई अलग-अलग प्रकार के गुलाल से होली खेलते हैं, जो कई बार हानिकारक भी होते हैं, लेकिन बिहार के भागलपुर में एक संस्था ने ऐसा खास गुलाल बनाया है जिसे लगाने के साथ-साथ खाया भी जा सकता है. दरअसल एक संस्था द्वारा अरोमाथेरेपी आधारित ऑर्गेनिक गुलाल बनाया जा रहा है. रंग बिरंगी गुलाल सुखाती और बनाती महिलाओं के हाथों और अंगुलियों में लगा चटक रंग प्योर ऑर्गेनिक है. इस गुलाल कि खास बात ये है कि इसे न सिर्फ गाल पर लगाया जा सकता है बल्कि हलुवा बनाने में मिलाकर खाया भी जा सकता है.

खुशबू और सेहत का खास संगम है ये गुलाल

होली के खास मौके पर इस गुलाल के साथ खुशबू और सेहत का भी संगम देखने को मिल रहा है. अरोमाथेरेपी (सुगंध चिकित्सा) को ध्यान में रखकर खास तरह का गुलाल तैयार किया जा रहा है. उद्यमिता सह स्वयं सहायता समूह की संचालिका डॉ प्रिया सोनी ने 'जीएनटी' को बताया कि यह गुलाल सिर्फ रंग ही नहीं बिखेरेगा, बल्कि लोगों को मानसिक सुकून भी देगा.

गाजर, चुकंदर, गुलाब और लैवेंडर से बन रहा ये रंग

इस ऑर्गेनिक गुलाल में फूलों के साथ साथ गाजर, चुकंदर, गुलाब, लैवेंडर, चंदन और केवड़ा जैसी प्राकृतिक रंगों और सुगंधों का इस्तेमाल किया गया है. इन सुगंधों को अरोमाथेरेपी में तनाव कम करने और मन को शांत रखने के लिए उपयोगी माना जाता है. प्रिया सोनी ने बताया इस गुलाल कि खुशबू सीधे हमारे मस्तिष्क के भावनात्मक केंद्र पर असर डालती है, जिससे मूड बेहतर होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है.

त्वचा के लिए सुरक्षित है ये ऑर्गेनिक गुलाल 

त्योहारी भीड़ और भागदौड़ के बीच यह सुगंधित गुलाल लोगों को रिलैक्स महसूस कराने में मदद कर सकता है. खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए इसे त्वचा के अनुकूल और रसायन मुक्त है. इस बार हर्बल और अरोमा गुलाल की मांग तेजी से बढ़ रही है. प्राकृतिक सुगंध से बनी सामग्री रासायनिक रंगों की तुलना में बेहतर विकल्प साबित हो रही है. ख़ास बात यह भी है कि फगुआ यानी होली के बाद जिस तरह से मौसम और तापमान में बदलाब होता है, उसके अनुकूल हर्बल और ऑर्गेनिक गुलाल बॉडी के इम्यून सिस्टम को सपोर्ट भी करता है. (राजीव सिद्धार्थ की रिपोर्ट)

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