मक्का निर्यात में बढ़ोतरीघरेलू उत्पादन में तेज बढ़ोतरी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों की अनुकूल स्थिति के चलते भारत के मक्का निर्यात में एक बार फिर सुधार के संकेत मिल रहे हैं. पिछले वित्त वर्ष में कीमतों की बराबरी न कर पाने से निर्यात पांच साल के निचले स्तर पर चला गया था, लेकिन चालू वित्त वर्ष में हालात बदले हुए नजर आ रहे हैं. अप्रैल से अक्टूबर की अवधि में मक्का के निर्यात में मात्रा और मूल्य दोनों के स्तर पर बढ़त दर्ज की गई है. खरीफ सीजन 2025 में देश का मक्का उत्पादन रिकॉर्ड 283 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल इसी सीजन के 248 लाख टन से काफी अधिक है.
बेहतर दाम की उम्मीद और बढ़ती औद्योगिक मांग को देखते हुए किसानों ने बड़े पैमाने पर मक्का का रकबा बढ़ाया, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा. पूरे 2024-25 फसल वर्ष में भारत का कुल मक्का उत्पादन भी रिकॉर्ड 434 लाख टन तक पहुंच गया, जिससे घरेलू बाजार में आपूर्ति मजबूत बनी हुई है. सरकारी और व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से अक्टूबर के बीच भारत से मक्का का निर्यात बढ़कर करीब 2.84 लाख टन हो गया.
पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 2.36 लाख टन था. यानी मात्रा के लिहाज से करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. मूल्य के मोर्चे पर यह बढ़त और भी ज्यादा रही. इस दौरान मक्का निर्यात से करीब 1,124.9 लाख डॉलर की कमाई हुई, जबकि एक साल पहले यह 876.3 लाख डॉलर थी. यानी निर्यात मूल्य में लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. कमोडिटी बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल घरेलू कीमतें निर्यात के लिहाज से व्यवहारिक स्तर पर हैं. इसी वजह से विदेशों में भारतीय मक्का की मांग दोबारा बनने लगी है.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, IGrain India के राहुल चौहान ने कहा कि इस समय मक्का का शिपमेंट इसलिए संभव हो पा रहा है, क्योंकि कीमतें खरीदारों के लिए अनुकूल हैं. हालांकि, बांग्लादेश जैसे प्रमुख आयातक देशों में मौजूदा हालात को लेकर व्यापार अब भी सतर्क बना हुआ है और कारोबारी जोखिम को ध्यान में रखकर सौदे कर रहे हैं. अगर पिछले दो वर्षों की तुलना करें तो मक्का निर्यात में उतार-चढ़ाव साफ दिखता है.
2023-24 में भारत ने करीब 14.42 लाख टन मक्का का निर्यात किया था, जिसकी कुल कीमत लगभग 4,430 लाख डॉलर रही. इसके बाद 2024-25 में घरेलू पोल्ट्री, इथेनॉल और स्टार्च उद्योग की मजबूत मांग के चलते निर्यात घटकर सिर्फ 5.56 लाख टन पर आ गया और निर्यात मूल्य भी 2,011.7 लाख डॉलर तक सिमट गया. उस समय घरेलू कीमतें ऊंची थीं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय मक्का प्रतिस्पर्धी नहीं रह पाया.
रिपोर्ट के मुताबिक, CLFMA ऑफ इंडिया के चेयरमैन दिव्य कुमार गुलाटी ने कहा कि पिछले साल निर्यात में आई सुस्ती के पीछे कई कारण थे. घरेलू स्तर पर फीड, इथेनॉल और औद्योगिक उपयोग की मांग काफी मजबूत थी, वहीं वैश्विक स्तर पर उत्पादन बढ़ने से कीमतों में दबाव बना हुआ था. इसके अलावा व्यापारिक तनाव और लॉजिस्टिक दिक्कतों के कारण भी खरीदारी के पैटर्न बदले, जिससे निर्यात गतिविधियां सीमित रहीं. उन्होंने कहा कि इस साल स्थिति में साफ बदलाव दिख रहा है और निर्यात दोबारा पटरी पर लौटता नजर आ रहा है.
बता दें कि इस साल अमेरिका, यूक्रेन और ब्राजील जैसे बड़े उत्पादक देशों में भी अच्छी फसल हुई है, जिससे वैश्विक बाजार में मक्का की उपलब्धता बढ़ी है. इसके चलते अंतरराष्ट्रीय कीमतें स्थिर और अपेक्षाकृत संतुलित बनी हुई हैं. कई भारतीय निर्यातकों ने नए बाजारों की पहचान की है और उन देशों में अपनी पकड़ मजबूत की है, जहां पिछले साल दूसरे सप्लायर कमजोर पड़े थे. इससे भारतीय मक्का को दोबारा मौके मिलने लगे हैं.
घरेलू बाजार की बात करें तो बड़ी खरीफ फसल के चलते कई राज्यों में कीमतों पर दबाव बना हुआ है. अखिल भारतीय मंडी थोक भाव करीब 1,710 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रहा है, जो न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,400 रुपये से लगभग 28 प्रतिशत कम है. दाम गिरने के बाद कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों ने किसानों को राहत देने के लिए बाजार हस्तक्षेप के कदम उठाने शुरू किए हैं.
रबी सीजन में भी मक्का की बुवाई बढ़ी है. 2 जनवरी तक रबी मक्का का रकबा 23.32 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया, जो पिछले साल इसी समय 21.87 लाख हेक्टेयर था. यानी करीब 6.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. जानकारों का मानना है कि आगे भी उत्पादन मजबूत रह सकता है. हालांकि, भारत में मक्का निर्यात की सीमा घरेलू जरूरतें तय करेंगी, क्योंकि फीड, इथेनॉल और स्टार्च उद्योग को प्राथमिकता दी जाती है.
1. भारत के मक्का निर्यात में अचानक बढ़ोतरी क्यों हुई है?
घरेलू उत्पादन बढ़ने, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों की बराबरी बनने और वैश्विक सप्लाई स्थिर होने से भारतीय मक्का इस साल निर्यात के लिए प्रतिस्पर्धी हो गया है, जिससे शिपमेंट बढ़ा है.
2. अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच भारत ने कितना मक्का निर्यात किया?
चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से अक्टूबर के दौरान भारत से करीब 2.84 लाख टन मक्का का निर्यात हुआ, जो पिछले साल की समान अवधि से लगभग 20 प्रतिशत ज्यादा है.
3. पिछले साल मक्का निर्यात क्यों घट गया था?
2024-25 में घरेलू पोल्ट्री, इथेनॉल और स्टार्च उद्योग की मजबूत मांग और ऊंचे घरेलू दामों के कारण भारतीय मक्का अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगा पड़ा, जिससे निर्यात घट गया.
4. बांग्लादेश से मक्का व्यापार को लेकर व्यापारी सतर्क क्यों हैं?
बांग्लादेश में मौजूदा राजनीतिक और कारोबारी हालात को देखते हुए भुगतान और लॉजिस्टिक जोखिम बढ़ा है, इसलिए व्यापारी वहां नए सौदों में सावधानी बरत रहे हैं.
5. किसानों को मक्का का MSP क्यों नहीं मिल पा रहा है?
रिकॉर्ड खरीफ उत्पादन के कारण बाजार में सप्लाई ज्यादा है, जिससे मंडी भाव गिरकर MSP से नीचे चले गए हैं और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल पा रहा.
6. क्या रबी सीजन में मक्का उत्पादन और बढ़ सकता है?
हां, रबी सीजन में मक्का का रकबा 6.6 प्रतिशत बढ़ा है, जिससे आने वाले महीनों में उत्पादन और सप्लाई मजबूत रहने की संभावना है.
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