
Potato Mandi Rate: मार्च 2026 में देशभर में आलू बाजार में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. मार्च 2026 में मंडियों में पिछले साल यानी मार्च 2025 के मुकाबले आवक में भारी कमी दर्ज की गई, लेकिन बावजूद इसके दामाें में भारी गिरावट दर्ज हुई है. कम भाव के चलते कई राज्यों के किसानों में रोष है और वे सरकार से एमएसपी की मांग कर रहे हैं. इनमें मुख्य रूप से बंगाल और उत्तर प्रदेश के किसान शामिल हैं. दरअसल, ये दो राज्य ही आलू के सबसे बड़े उत्पादक राज्य हैं और यहां इस सीजन में अच्छी पैदावार हुई है और नई आवक बढ़ने से मंडियों में दाम लुढ़के हुए हैं. हालांकि, बंगाल में आलू की सीमित मात्रा को एमएसपी पर खरीद की मंजूरी दी गई है, लेकिन फिर भी यह सभी आलू किसानों के लिहाज से नाकाफी है. वहींं, यूपी और अन्य राज्यों में आलू किसानों के लिए ऐसी पहल अब तक नहीं हुई है.
एगमार्कनेट पोर्टल के मुताबिक, 1 से 29 मार्च 2026 के बीच देशभर में करीब 6.39 लाख मीट्रिक टन आलू की आवक दर्ज की गई. इसके मुकाबले पिछले साल इसी अवधि में आवक लगभग तीन गुना ज्यादा रही थी. इसके बावजूद 2025 में दाम बेहतर बने हुए थे, जबकि इस साल कीमतों पर भारी दबाव बना हुआ है.
मार्च 2025 के पूरे महीने में 18.24 लाख मीट्रिक टन आलू की कुल आवक दर्ज की गई थी. इतनी बड़ी सप्लाई के बावजूद उस समय बाजार में कीमतें मजबूत बनी हुई थीं. इसके उलट इस साल कम आवक के बावजूद दाम गिरना बाजार की कमजोर मांग या ओवरसप्लाई के स्थानीय दबाव के संकेत दे रहा है.
राज्यवार आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे प्रमुख राज्यों में 45 फीसदी से 50 फीसदी तक की सालाना गिरावट दर्ज की गई है. चंडीगढ़ में गिरावट 60 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई. औसत स्तर पर भी मार्च 2026 में कीमतें पिछले साल के मुकाबले करीब 18-21 प्रतिशत तक नीचे रहीं.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च के आखिरी हफ्ते में दिल्ली, असम और हरियाणा जैसे राज्यों में साप्ताहिक तेजी जरूर देखने को मिली. दिल्ली में एक हफ्ते में 18% से ज्यादा उछाल आया, लेकिन यह तेजी लंबे समय के ट्रेंड को बदल नहीं सकी. सालाना आधार पर यहां भी कीमतें कमजोर बनी हुई हैं.
केरल इस गिरावट के बीच अपवाद बना हुआ है, जहां सालाना आधार पर करीब 28-29% की बढ़त दर्ज की गई. वहीं ओडिशा और असम में भी हल्की मजबूती देखी गई. इसके अलावा देश के अधिकांश राज्यों में गिरावट ही प्रमुख ट्रेंड बना रहा.