आलू के दाम में भारी गिरावटपश्चिम बंगाल के मार्केट में आलू के दाम कम हो गए हैं. इससे खरीदारों को फायदा जरूर है, लेकिन आलू किसानों पर इसका बहुत बुरा असर पड़ा है. राज्य के कई जिलों में किसानों को अब आलू उगाने की लागत का हिसाब लगाना पड़ रहा है क्योंकि कोई खरीदार नहीं है. किसानों को नुकसान में आलू बेचना पड़ रहा है. उनका कहना है कि जो भाव अभी मिल रहे हैं, उससे तो लागत निकाल पाना भी बहुत मुश्किल है.
वेस्ट मिदनापुर के चंद्रकोना के आलू किसान सुमन मंडल ने बताया कि चंद्रकोना पूरे बंगाल में एवरेज आलू प्रोड्यूसर के तौर पर जाना जाता है. यहां ज्योति आलू दो दिन पहले खेत से 200 टका प्रति क्विंटल के दाम पर बिका. यानी किसान को हर किलो आलू बेचने पर सिर्फ 2 टका मिला. वहीं, K22 आलू खेत में 300 टका प्रति क्विंटल के दाम पर बिका. उसे भी 3 टका का भाव मिला. इस भाव से क्या लागत निकलेगी? किसान क्या खाएगा और क्या बचाएगा?
आलू किसान ने बताया कि अब हालत यह हो गई है कि किसानों ने एक बीघा आलू उगाने में करीब 40 हजार टका खर्च किया है. लेकिन वे आलू बेचकर प्रति बीघा 23-24 हजार टका से ज्यादा नहीं जुटा पा रहे हैं. यानी किसानों को प्रति बीघा लगभग 16-17 हजार टका का नुकसान हो रहा है. उनका दावा है, "अभी भी बड़ी मात्रा में आलू खेत में पड़े हैं. घाटल में किसानों ने इसके खिलाफ विरोध भी किया है. अगर इस बीच बारिश होती है, तो बहुत सारा आलू बर्बाद हो जाएगा."
उत्तर बंगाल से आलू किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने भी बड़े कदम उठाए हैं. राज्य सरकार की टास्क फोर्स टीम के सदस्य कमल डे ने bengali.aajtak.in को बताया कि तारकेश्वर से ट्रेन के जरिए असम और त्रिपुरा आलू भेजने की पहल पहले ही की जा चुकी है. उनका दावा है कि इसके नतीजे में राज्य के किसानों को आलू के लिए लगभग 5 टका प्रति किलो का दाम मिल रहा है. अगले कुछ दिनों में यह आंकड़ा बढ़कर 6-7 टका हो जाएगा.
दूसरी ओर, राज्य सरकार मिनिमम सपोर्ट प्राइस देने के लिए सीधे किसानों से आलू खरीद रही है. ऐसे में किसानों को 7-8 टका प्रति किलो का भाव मिल रहा है. हालांकि, सूत्रों का दावा है कि राज्य के कोल्ड स्टोरेज में अभी आलू भरे हुए हैं. इस वजह से और आलू खरीदने की संभावना नहीं है.
सोमवार को सियालदह कोले मार्केट में ज्योति आलू का होलसेल रेट 7.50 टका प्रति किलो है. लेकिन रिटेल मार्केट में भाव 12-14 टका है. यानी जो आलू आम लोग 14 टका में खरीद रहे हैं, किसान खेत से ही 2-5 टका में बेच रहे हैं. उसके बाद जैसे-जैसे अलग-अलग हाथ बाजार में आ रहे हैं, भाव बढ़ रहा है और किसान माथा पीट रहे हैं.(किशोर शील की रिपोर्ट)
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