
हरियाणा में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर होने वाली सरकारी खरीद को लेकर राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने अहम निर्देश जारी किए हैं. नए नियमों के मुताबिक, सरकारी एजेंसी की ओर से MSP पर कृषि उपज खरीदने की स्थिति में आढ़ती किसान से तय शुल्क के अलावा अतिरिक्त मजदूरी का पैसा नहीं वसूल सकेंगे. इसका सीधा फायदा मंडियों में अपनी फसल बेचने वाले किसानों को मिलेगा.
हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड, पंचकूला की ओर से जारी अधिसूचना में मंडी में कृषि उपज की बिक्री, खरीद, भंडारण और प्रोसेसिंग से जुड़ी सेवाओं के लिए शुल्क की दरें तय की गई हैं. यह व्यवस्था खरीफ सीजन 2025 के लिए 1 अक्टूबर 2025 से लागू की गई है. अधिसूचना में साफ किया गया है कि मार्केट फंक्शनरी किसान से तय दरों से ज्यादा रकम की मांग या वसूली नहीं कर सकते.
नोटिफिकेशन में धान समेत अलग-अलग फसलों की सरकारी खरीद के दौरान लगने वाले शुल्क की जानकारी भी दी गई है. अगर सरकारी एजेंसी किसान से MSP पर फसल खरीदती है, तो तय नियमों के मुताबिक लगने वाले ज्यादातर शुल्क सरकारी एजेंसी को ही देने होंगे, इसलिए किसान से इन शुल्कों के नाम पर अलग से पैसे नहीं लिए जा सकेंगे. नोटिफिकेशन में यह भी कहा गया है कि किसानों को अपनी साफ की हुई फसल मंडी में लाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. वहीं, अगर फसल की खरीद निजी तौर पर होती है, तो तय शुल्क का भुगतान कौन करेगा, यह खरीदार और किसान के बीच तय होगा.
अधिसूचना में 50 किलो और 35/37.5 किलो के बैग के हिसाब से अलग-अलग काम के रेट भी दिए गए हैं. इनमें मंडी प्लेटफॉर्म से अनलोडिंग, सफाई और ड्रेसिंग, प्लेटफॉर्म पर बोरी रखना, वजन करना, बोरी सिलना और लोडिंग जैसे काम शामिल हैं. मसलन, 50 किलो की बोरी के लिए मंडी प्लेटफॉर्म पर अनलोडिंग का शुल्क 3 रुपये प्रति बोरी और सफाई और ड्रेसिंग का शुल्क मैनुअल तरीके से 2.61 रुपये है. वहीं, मशीन से 4.16 रुपये निर्धारित किया गया है. बोरी की सिलाई, वजन और लोडिंग के लिए भी अलग-अलग दरें तय की गई हैं.
अधिसूचना के मुताबिक सरकारी एजेंसी द्वारा MSP पर खरीद और निजी एजेंसी/व्यापारी द्वारा खरीद के लिए शुल्क की व्यवस्था अलग है. निजी खरीद के मामले में निर्धारित नियमों के अनुसार कुछ शुल्क विक्रेता और कुछ खरीदार को देने होंगे. वहीं सरकारी, MSP खरीद में किसान पर अनावश्यक अतिरिक्त शुल्क का बोझ न पड़े, इस पर विशेष जोर दिया गया है.
मंडी में फसल बेचते समय कई बार किसानों को अलग-अलग काम के नाम पर अतिरिक्त रकम देने की शिकायत रहती है. ऐसे में यह आदेश किसानों के लिए महत्वपूर्ण है. सरकारी MSP खरीद में किसान से तय शुल्क से ज्यादा आकस्मिक या मजदूरी शुल्क वसूलना नियमों के खिलाफ होगा. इसका मतलब है कि किसान अपनी फसल सरकारी खरीद केंद्र पर बेचते समय तय नियमों के अनुसार ही भुगतान करें और अगर उससे अतिरिक्त शुल्क मांगा जाता है, तो वह संबंधित मंडी प्रशासन के सामने इसकी शिकायत कर सकता है.