SKM आंदोलनसंयुक्त किसान मोर्चा (SKM) अब एक और बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहा है. इस बार यह आंदोलन केंद्र के उस प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के खिलाफ है जो भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार, अमेरिका के साथ किया जाना है. SKM किसान संगठनों का वह राष्ट्रीय स्तर का गठबंधन है जिसने केंद्र सरकार को 2020 में बनाए गए तीन कृषि कानूनों को वापस लेने पर मजबूर किया था.
28 जुलाई को दिल्ली में किसान संगठनों के इस साझा मंच का एक राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ, जिसमें केंद्र की FTA को तेजी से आगे बढ़ाने की नीति के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर अभियान और रैलियां करने की अपील की गई.
SKM के घोषणापत्र में कहा गया, "जहां तक कृषि का सवाल है, FTA के कारण सस्ती फसलें और कृषि उत्पाद आयात होंगे, खेती की कमाई और कमजोर होगी, फूड प्रोसेसिंग बाजार पर कब्जा हो जाएगा और फसल उगाने के तरीकों में ऐसे बदलाव आएंगे जिनसे खाद्य आत्मनिर्भरता को नुकसान पहुंचेगा."
संयुक्त किसान मोर्चा ने मांग की कि सरकार एक ऐसा कानून बनाए जो सभी फसलों की खरीद की गारंटी दे और एमएस स्वामीनाथन (जो 2006 में राष्ट्रीय किसान आयोग के अध्यक्ष थे) के सुझाए गए C2+50% फॉर्मूले के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करे.
किसानों के इस संगठन की मुख्य मांगों में कृषि लोन पूरी तरह माफ करना, सरकार की ओर से लाए गए चार लेबर कोड को रद्द करना, MGNREGA जॉब गारंटी योजना को उसके मूल स्वरूप में बहाल करना, और बिजली निजीकरण बिल 2025, बीज बिल 2025 और NFSA संशोधन बिल आदि को वापस लेना शामिल है.
SKM ने कृषि, फूड प्रोसेसिंग और निर्यात क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का भी विरोध किया है. उसने खाने-पीने की चीजों की कमी और कालाबाजारी को खत्म करने के लिए सरकार के दखल की मांग की है. साथ ही सब्सिडी बहाल करके खाद, ईंधन, पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित करने की भी मांग की है. फसल और पशुधन बीमा, और बाढ़/सूखे जैसी आपदाओं में पारदर्शी और प्रभावी राहत के लिए पर्याप्त फंड आदि भी इसकी अन्य मांगें शामिल हैं.
SKM ने अपने सदस्य संगठनों से कहा है कि वे अगले दो महीनों में राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित करें ताकि सरकार की नीतियों के खिलाफ लंबे समय तक चलने वाले आंदोलन की तैयारी की जा सके.
17 अगस्त को SKM नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता, मुख्यमंत्रियों, राज्य स्तर पर विपक्ष के नेताओं, सांसदों और विधानसभा सदस्यों को अपनी मांगों का चार्टर सौंपेगा और मुख्य मांगों पर कार्रवाई की मांग करेगा. SKM ने 26 नवंबर से देश भर में 100 जगहों पर - जिसमें दिल्ली का राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र भी शामिल है - किसान रैलियां और कई दिनों तक चलने वाले बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने का प्रस्ताव रखा है.
मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर के बैनर तले हजारों किसानों ने हिसार के विद्युत नगर में HVPNL और DHBVN के दफ्तरों का घेराव किया और गेट नंबर 4 पर 4 घंटे धरना-प्रदर्शन किया. किसानों ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मुख्यमंत्री नायब सैनी के नाम के ज्ञापन HVPNL और DHBVN के डायरेक्टर्स को सौंपे. DHBVN और HVPNL के अधिकारियों ने कहा कि अगले 1 सप्ताह के भीतर वे किसानों के प्रतिनिधिमंडल की बैठक उच्च अधिकारियों के साथ कराएंगे.
बीकेयू ने अपनी मांगों में कहा, पेंडिंग ट्यूबवेल कनेक्शन तुरंत जारी किए जाएं और बोर खराब होने पर किसान द्वारा अपने ही खेत में ट्यूबवेल शिफ्टिंग करने पर विभाग द्वारा एस्टीमेट बनाकर अवैध वसूली बंद की जाए. कृषि क्षेत्र को पर्याप्त और व्यवस्थित बिजली सप्लाई सुनिश्चित कराई जाए, खरीफ फसलों के सीजन को देखते हुए खेतों के लिए दिन में 10 घंटे बिजली दी जाए. यदि फॉल्ट होने की वजह से बिजली बाधित होती है तो बाद में उसकी पूर्ति कर के खेतों के लिए दिन में 10 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए. गांवों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार के लिए पर्याप्त बिजली कर्मी नियुक्त किए जाएं.
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