
उत्तर प्रदेश सरकार तिलहन की खेती को बढ़ावा देने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए कई अहम कदम उठा रही है. इसी कड़ी में वाराणसी में किसानों को फ्री तोरिया यानी सरसों के बीज की मिनीकिट बांटी गई. इस मिनीकिट का वितरण चांदपुर स्थित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ परिसर के सरकारी बीज भंडार पर किया गया. शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में वाराणसी मंडल के कृषि संयुक्त निदेशक और मुख्य अतिथि शैलेंद्र कुमार ने ई-लॉटरी के जरिए चुने गए किसानों को बीज मिनीकिट बांटी. इस दौरान किसानों को तोरिया की खेती के फायदे भी बताए गए.
कृषि अधिकारियों ने किसानों से अपील की कि जिन किसानों के पास खेत में खाली जमीन है, वे वहां तोरिया यानी पीली सरसों की खेती कर सकते हैं. खास बात यह है कि तोरिया की फसल करीब 90 से 95 दिन में तैयार हो जाती है. इसके बाद किसान उसी खेत में गेहूं या दूसरी रबी फसल की बुवाई कर सकते हैं. इस तरह किसान एक ही खेत से कम समय में एक अतिरिक्त फसल ले सकते हैं. इससे उनकी आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सकती है. अधिकारियों ने किसानों को तोरिया यानी लाही की खेती को नकदी फसल के तौर पर अपनाने की सलाह दी.
कार्यक्रम में किसानों से दूसरी रबी फसलों के बीज लेने के लिए ऑनलाइन बुकिंग कराने को भी कहा गया. अधिकारियों ने किसान पंजीकरण कराने पर भी जोर दिया. उनका कहना था कि किसान रजिस्ट्रेशन कराने के बाद सरकार की ओर से किसानों के लिए चलाई जा रही अलग-अलग योजनाओं का लाभ आसानी से ले सकते हैं. कार्यक्रम में बीज भंडार प्रभारी राहुल राज, सहायक विकास अधिकारी बालकेश्वर सिंह, बीटीएम रामनरेश, तकनीकी सहायक सुप्रिया सोनी, नेहा रानी और अंकिता मौर्य समेत कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे. ई-लॉटरी के जरिए चुने गए किसान नवीन कुमार, छोटेलाल और छविनाथ समेत अन्य किसान भी कार्यक्रम में शामिल हुए.
तोरिया की अच्छी फसल के लिए 15 सितंबर से अक्टूबर के मध्य तक बुवाई करना बेहतर माना जाता है. इस समय मॉनसून की बारिश के बाद खेत में पर्याप्त नमी रहती है. इससे बीज जल्दी और अच्छी तरह अंकुरित होता है. वहीं, तोरिया की खेती के लिए बलुई दोमट या हल्की दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है. खेत में पानी की निकासी की अच्छी व्यवस्था जरूर रखें, क्योंकि पानी रुकने से तोरिया की जड़ों को नुकसान हो सकता है. बुवाई से पहले खेत की पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें. इसके बाद कल्टीवेटर से दो से तीन बार जुताई करें और अंत में पाटा लगाएं. समतल और भुरभुरी मिट्टी में बीज एक समान गहराई पर पड़ता है. इससे बीज का अंकुरण अच्छा होता है और फसल की शुरुआती बढ़वार भी बेहतर रहती है. (ANI)